वर्दी का फर्ज और अधूरी मोहब्बत: जब इंस्पेक्टर पत्नी 6 साल बाद अपने गरीब पति को गिरफ्तार करने पहुंची
प्रस्तावना: समय का चक्र और बदलती तकदीर समय कभी एक जैसा नहीं रहता। यह कभी इंसान को अर्श पर बिठा देता है, तो कभी फर्श पर लाकर पटक देता है। 6 साल पहले, सीमा और अर्जुन का रिश्ता एक छोटे से विवाद और समाज के दबाव के कारण टूट गया था। आज सीमा एक निडर पुलिस इंस्पेक्टर थी, और अर्जुन उसी गाँव में एक बेहद गरीब और लाचार जिंदगी जी रहा था। लेकिन नियति ने एक ऐसी चाल चली कि सीमा को अपने ही पूर्व पति को गिरफ्तार करने के लिए उसके दरवाजे पर जाना पड़ा।
अध्याय 1: एक टूटी हुई शादी और दो अलग रास्ते
6 साल पहले, अर्जुन और सीमा की शादी बड़े अरमानों से हुई थी। अर्जुन एक छोटे से गैरेज में काम करता था, लेकिन उसका सपना था कि सीमा पढ़-लिखकर एक बड़ी अफसर बने। उसने अपनी दिन-रात की कमाई सीमा की पढ़ाई पर लगा दी। लेकिन सीमा के घरवाले इस रिश्ते के खिलाफ थे। जब सीमा पुलिस ऑफिसर बन गई, तो उसके परिवार ने अर्जुन की गरीबी का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया।
गलतफहमियों की दीवार इतनी ऊंची हो गई कि बात तलाक तक पहुँच गई। सीमा को लगा कि अर्जुन उसकी सफलता से जलता है, जबकि अर्जुन बस यह चाहता था कि सीमा उसे भी थोड़ा समय दे। अंत में, दोनों अलग हो गए। सीमा शहर चली गई और अर्जुन उसी गाँव की धूल में कहीं खो गया।
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अध्याय 2: गिरफ्तारी का वारंट और गाँव की गलियाँ
6 साल बाद, सीमा के पास एक केस आया—गाँव के एक अमीर जमींदार के गोदाम से कीमती सामान की चोरी। शक की सुई अर्जुन पर थी क्योंकि वह उसी इलाके में मजदूरी करता था। पुलिस रिकॉर्ड में अर्जुन का नाम “मुख्य संदिग्ध” के रूप में दर्ज था। सीमा के दिल में एक टीस उठी, लेकिन “वर्दी के फर्ज” ने उसे मजबूर कर दिया।
वह अपनी सरकारी जीप और पुलिस बल के साथ गाँव पहुँची। पूरा गाँव इकट्ठा हो गया। सबको पता था कि आज इंस्पेक्टर साहिबा अपने ही पूर्व पति के हाथों में हथकड़ी पहनाने आई हैं।
अध्याय 3: अर्जुन की झोपड़ी और वह खौफनाक मंजर
सीमा जब अर्जुन की टूटी-फूटी झोपड़ी के सामने पहुँची, तो उसकी आँखों में गुस्सा और नफरत थी। उसने चिल्लाकर कहा, “अर्जुन, बाहर आओ! तुम्हारे नाम का वारंट है।”
जब अर्जुन बाहर आया, तो सीमा उसे पहचान भी नहीं पाई। 6 साल में अर्जुन इतना बूढ़ा और कमजोर लग रहा था जैसे वह कोई 60 साल का आदमी हो। उसके कपड़े फटे हुए थे और पैरों में चप्पल तक नहीं थी। अर्जुन ने शांति से सीमा की तरफ देखा और कहा, “साहब, मुझे पता था आप आएंगी। बस 5 मिनट दे दीजिए।”

अध्याय 4: झोपड़ी के अंदर छिपा “इंसानियत का राज”
सीमा गुस्से में झोपड़ी के अंदर दाखिल हुई। वह देखना चाहती थी कि अर्जुन ने चोरी का सामान कहाँ छिपाया है। लेकिन अंदर जो उसने देखा, उसके बाद उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
झोपड़ी के कोने में एक छोटी सी बच्ची लेटी हुई थी, जो तेज बुखार से तप रही थी। पास ही गाँव की एक अनाथ बुढ़िया सो रही थी जिसे अर्जुन ने सहारा दिया था। झोपड़ी में चोरी का कोई सामान नहीं था, बल्कि वहाँ दवाइयों की कुछ शीशियां और सूखी रोटियाँ पड़ी थीं।
तभी गाँव के एक आदमी ने बताया, “मैडम, अर्जुन चोर नहीं है। वह तो दिन-भर मेहनत करके इन अनाथों और बीमारों की सेवा करता है। उस जमींदार ने उसे झूठे केस में फंसाया है क्योंकि अर्जुन ने उसकी अवैध शराब की तस्करी का विरोध किया था।”
अध्याय 5: जमीर की अदालत और वर्दी का आंसू
सीमा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने अर्जुन के हाथों की तरफ देखा, जो मेहनत की वजह से खुरदरे हो गए थे। उसे याद आया कि इन्हीं हाथों ने कभी उसकी फीस भरी थी। अर्जुन ने चोरी नहीं की थी, बल्कि वह उन लोगों की मदद कर रहा था जिन्हें समाज ने त्याग दिया था।
अर्जुन ने धीमी आवाज में कहा, “सीमा, तुम अपना फर्ज निभाओ। मुझे हथकड़ी लगाओ। बस इस बच्ची का ध्यान रखना, इसका इस दुनिया में मेरे सिवा कोई नहीं है।”
यह सुनते ही सीमा का “इंस्पेक्टर” वाला सख्त मुखौटा टूट गया। उसने सबके सामने अर्जुन के हाथों से हथकड़ी हटा दी और अपनी वर्दी की परवाह किए बिना वहीं जमीन पर बैठकर रोने लगी। पूरा गाँव यह मंजर देखकर रो पड़ा।
अध्याय 6: असली गुनहगार का अंत
सीमा ने उसी वक्त अपने हेडक्वार्टर फोन किया और मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए। उसने अपनी पावर का इस्तेमाल उस भ्रष्ट जमींदार के खिलाफ किया जिसने अर्जुन को फंसाया था। कुछ ही घंटों में असली चोर पकड़े गए और जमींदार के काले कारनामों का पर्दाफाश हो गया।
सीमा ने अर्जुन से माफी मांगी, लेकिन अर्जुन ने सिर्फ मुस्कुराकर कहा, “तुमने अपना फर्ज निभाया, इसमें माफी कैसी?”
निष्कर्ष: रिश्तों की नई शुरुआत
सीमा को समझ आ गया था कि पैसा और पद इंसान को बड़ा नहीं बनाते, बल्कि उसके कर्म बनाते हैं। उसने अर्जुन को शहर चलने और अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करने को कहा। अर्जुन मान गया, लेकिन एक शर्त पर—कि वे उन अनाथों और गरीबों को कभी नहीं छोड़ेंगे जिनका अर्जुन एकमात्र सहारा था।
कहानी की सीख: यह कहानी हमें सिखाती है कि “न्याय” सिर्फ कानून की किताबों में नहीं होता, बल्कि अपनी आँखों से सच देखने और अपने दिल की सुनने में होता है। वर्दी के पीछे भी एक इंसान होता है, और रिश्तों की डोर भले ही टूट जाए, लेकिन इंसानियत का रिश्ता कभी नहीं मरता।
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