मेरठ का ‘साइनाइड कांड’: एक अवैध संबंध, भाई की ‘गंदी नजर’ और मौत का वो घातक पाउच
मेरठ, उत्तर प्रदेश | विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट
मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र में 3 अप्रैल 2026 की उस शाम को जब सूरज ढल रहा था, किसी को अंदाजा नहीं था कि एक साधारण सी दिखने वाली शराब की थैली (पाउच) तीन परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए निगल जाएगी। जिसे शुरुआत में ‘जहरीली शराब’ का प्रशासनिक हादसा माना जा रहा था, वह दरअसल प्यार, नफरत, जमीन के लालच और प्रतिशोध की एक ऐसी खौफनाक पटकथा निकली, जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए।
वह काली शाम: जब मातम में बदली दौराला की फिजा
दौराला कस्बे के वार्ड नंबर 14 में स्थित ‘रिया स्पिलर आटा चक्की’ पर रोज की तरह चहल-पहल थी। शाम के वक्त अंकित उर्फ दौलत (45 वर्ष), जो कि मोहन पट्टी गांव का निवासी था, अपनी सरसों की पिराई कराने चक्की पर पहुंचा। अंकित एक साधारण मेहनतकश व्यक्ति था, जो तेल बेचकर अपना गुजारा करता था।
चक्की मालिक बाबूराम प्रजापति (55 वर्ष) ने अंकित से कहा कि काम में थोड़ा समय लगेगा। इसी बीच, अंकित ने अपनी जेब से शराब का एक पाउच निकाला। थकान मिटाने के नाम पर उसने बाबूराम और वहां मौजूद अपने एक अन्य दोस्त जितेंद्र कश्यप (50 वर्ष) को भी जाम साझा करने का न्योता दिया। तीनों ने मिलकर उस पाउच से शराब पी। लेकिन, कुछ ही मिनटों के भीतर मंजर बदल गया।
बाबूराम का दम घुटने लगा। उसने अपने बेटे को आवाज लगाई— “बेटा, मेरी सांस फूल रही है, मुझे बचा लो।” देखते ही देखते अंकित और जितेंद्र की हालत भी बिगड़ गई। आनन-फानन में तीनों को ‘आर्यावर्त अस्पताल’ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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प्रशासनिक हड़कंप: क्या मेरठ में फिर मौत का तांडव मचाएगी शराब?
एक साथ तीन मौतों की खबर ने पूरे मेरठ प्रशासन में बिजली जैसी दौड़ पैदा कर दी। पुलिस को प्राथमिक सूचना मिली कि ‘शराब पीने से मौत हुई है।’ उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब के पुराने इतिहास को देखते हुए एडीजी भानु भास्कर, डीएम बी.के. सिंह और एसएसपी अविनाश पांडे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
उस रात दौराला के मंदिर और मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर ऐलान कराया गया:
“क्षेत्र के लोग ध्यान दें, आज जिसने भी शराब खरीदी है, वह उसे बिल्कुल न पिए। यदि किसी ने पी ली है, तो तुरंत अस्पताल पहुंचे।”
पुलिस ने तुरंत शराब के ठेके को सील कर दिया। जांच में पता चला कि उस दिन वहां से 350 पाउच बिके थे। प्रशासन के माथे पर पसीना था—अगर एक पाउच से तीन मर सकते हैं, तो 350 पाउच का परिणाम क्या होगा? लेकिन जैसे-जैसे अगली सुबह हुई, राहत की खबर आई कि कहीं और से मौत की सूचना नहीं है। यहीं से पुलिस की सुई ‘हादसे’ से घूमकर ‘साजिश’ की ओर मुड़ गई।

जांच की दिशा: जब कॉल डिटेल ने खोला राज
एसएसपी अविनाश पांडे और उनकी टीम ने जब गहराई से जांच शुरू की, तो कई सवाल खड़े हुए। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि अंकित (मृतक) ने उस दिन ठेके से शराब खरीदी ही नहीं थी। तो फिर उसके पास वह पाउच कहां से आया?
पुलिस ने अंकित के पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच की। अंकित अविवाहित था और अपनी 42 वर्षीय बहन अलका के साथ रहता था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने पर एक नंबर बार-बार सामने आया—वह नंबर था गांव के ही पवन उर्फ पोली का। पवन शादीशुदा था, लेकिन उसके अलका के साथ पिछले 25 वर्षों से अवैध संबंध थे।
खौफनाक खुलासा: भाई की हरकत और प्रेमी का इंतकाम
पूछताछ और कड़ियां जोड़ने पर जो कहानी सामने आई, वह किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं थी। जांच में पता चला कि करीब एक महीने पहले अंकित शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचा था और उसने अपनी ही सगी बहन अलका की अस्मत से खिलवाड़ करने की कोशिश की थी।
अलका ने यह बात अपने प्रेमी पवन को बताई। पवन पहले से ही अंकित से चिढ़ा हुआ था क्योंकि अंकित उनके संबंधों का विरोध करता था और अक्सर अपनी बहन के साथ मारपीट करता था। साथ ही, अंकित के पास हाईवे पर करीब 4 बीघा जमीन थी, जिसकी कीमत 6 से 7 करोड़ रुपये थी। पवन के दिमाग में दोहरे मकसद चल रहे थे—प्रतिशोध और संपत्ति।
गूगल और पोटेशियम साइनाइड: एक ‘परफेक्ट मर्डर’ की तलाश
पवन ने अंकित को रास्ते से हटाने के लिए महीनों तक इंटरनेट और गूगल का सहारा लिया। उसने सर्च किया— “किसी को बिना शक के कैसे मारें?” इसी दौरान उसे पोटेशियम साइनाइड के बारे में पता चला। गूगल से उसे जानकारी मिली कि सुनार आभूषण साफ करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
पवन ने अपने एक सुनार दोस्त अशोक वर्मा से संपर्क किया। अशोक ने महज 500 रुपये के लालच में पवन को साइनाइड की गोली दे दी।
साजिश की तारीखें:
30 मार्च 2026: पवन ने अलका को साइनाइड दिया और कहा कि इसे खाने में मिला देना। लेकिन अलका की हिम्मत जवाब दे गई।
2 अप्रैल 2026: पवन ने अपने एक अन्य साथी से शराब का पाउच मंगवाया। उसने सिरिंज के जरिए पाउच में छेद किया, साइनाइड का पाउडर अंदर डाला और फिर फेवीक्विक से उस छेद को सील कर दिया।
3 अप्रैल 2026: पवन को अलका से लोकेशन मिली कि अंकित चक्की पर जा रहा है। पवन रास्ते में उसे मिला, उसे ‘दोस्ती’ का वास्ता देकर जहरीली शराब का पाउच थमाया और खुद वहां से रफूचक्कर हो गया।
एक शिकार, तीन मौतें
पवन का निशाना सिर्फ अंकित था। उसे नहीं पता था कि अंकित वह शराब अकेले नहीं पिएगा। अंकित की उदारता (दोस्तों के साथ बांटकर पीना) ने बाबूराम और जितेंद्र को भी मौत की नींद सुला दिया। साइनाइड इतना घातक जहर है कि शरीर के संपर्क में आते ही यह ऑक्सीजन के प्रवाह को रोक देता है, जिससे मिनटों में मौत हो जाती है।
न्याय का शिकंजा
पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अलका, उसके प्रेमी पवन और जहर देने वाले सुनार अशोक वर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने भारी मात्रा में सबूत जुटाए हैं, जिसमें गूगल सर्च हिस्ट्री, फेवीक्विक खरीदने के साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं।
मेरठ पुलिस का कहना है कि यह एक अत्यंत जटिल मामला था, जिसे ‘जहरीली शराब’ का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन टीम की सतर्कता ने इसे सुलझा लिया। अब तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास या फांसी जैसी कड़ी सजा दिलाने के लिए चार्जशीट दाखिल की जा रही है।
उपसंहार: दौराला की यह घटना हमें चेतावनी देती है कि रिश्तों में आती कड़वाहट और अपराधी मानसिकता समाज को किस पतन की ओर ले जा रही है। तकनीक (गूगल) जहां ज्ञान का स्रोत है, वहीं अपराधी इसका उपयोग विनाश के लिए कर रहे हैं। समाज को आज जागरूक रहने और अपने आस-पास की गतिविधियों पर नजर रखने की अत्यंत आवश्यकता है।
यह रिपोर्ट उस्मान सैफी के वृत्तांत पर आधारित है।
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