धर्मेंद्र के निधन के बाद बिखरा देओल परिवार? तीन अलग-अलग प्रेयर मीट्स ने खोली पुरानी कड़वाहट की परतें!
मुंबई/दिल्ली: 24 नवंबर 2025 की वह सुबह भारतीय सिनेमा के लिए एक काले अध्याय जैसी थी, जब ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनके जाने के बाद जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहां पूरा देश शोक में डूबा था, वहीं दूसरी तरफ 45 साल पुरानी वह पारिवारिक कड़वाहट फिर से सतह पर आ गई, जिसे धर्मेंद्र ने अपनी पूरी जिंदगी सहेजने और छिपाने की कोशिश की थी।
अंतिम संस्कार से शुरू हुआ अलगाव
धर्मेंद्र के निधन के बाद जूहू स्थित उनके बंगले पर पूरा परिवार इकट्ठा हुआ था। सनी देओल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, बॉबी देओल रोते हुए उनके पीछे खड़े रहे। वहां प्रकाश कौर और हेमा मालिनी दोनों मौजूद थीं, लेकिन उनके बीच की दूरी साफ महसूस की जा रही थी। अंतिम संस्कार के बाद जैसे-जैसे दिन बीतते गए, परिवार की एकजुटता की तस्वीर धुंधली पड़ती गई।
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27 नवंबर: मुंबई की ‘सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ’ बनाम हेमा की ‘भजन संध्या’
असली विवाद तब शुरू हुआ जब 27 नवंबर को मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में प्रकाश कौर और उनके बच्चों (सनी, बॉबी, विजेता और अजीता) ने एक भव्य प्रेयर मीट का आयोजन किया। इसे ‘सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ’ नाम दिया गया। इस आयोजन में बॉलीवुड के दिग्गज जैसे सलमान खान, ऐश्वर्या राय और अक्षय कुमार पहुंचे। सनी और बॉबी ने अपने पिता की बहादुरी और पंजाब की यादें साझा कीं।
लेकिन हैरानी की बात यह थी कि इस विशाल आयोजन में हेमा मालिनी, ईशा देओल या अहाना देओल कहीं नजर नहीं आईं। उसी शाम हेमा मालिनी ने अपने बंगले पर अलग से एक निजी भजन संध्या आयोजित की। जहां महिमा चौधरी और सुनीता आहूजा जैसे करीबी दोस्त पहुंचे। एक ही शहर में, एक ही दिन, एक ही पिता के लिए दो अलग-अलग शोक सभाओं ने मीडिया और फैंस के बीच चर्चा छेड़ दी— क्या देओल परिवार अब दो हिस्सों में बंट चुका है?
संघर्ष और दो परिवारों का इतिहास
धर्मेंद्र की जिंदगी हमेशा दो किनारों के बीच बहती रही। 1954 में उनकी शादी प्रकाश कौर से हुई थी, जिनसे उनके चार बच्चे हुए। 1970 के दशक में उन्हें हेमा मालिनी से प्यार हुआ और 1980 में उन्होंने इस्लाम कबूल कर हेमा से शादी की, क्योंकि प्रकाश कौर ने तलाक देने से मना कर दिया था। धर्मेंद्र ने अपनी पूरी उम्र लोनावाला फार्म हाउस और मुंबई के बीच दोनों परिवारों को बैलेंस करने में बिता दी। लेकिन उनके निधन के बाद यह संतुलन ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

दिल्ली और मथुरा: राजनीतिक और व्यक्तिगत शोक सभाएं
विवाद तब और गहरा गया जब 11 दिसंबर को हेमा मालिनी ने दिल्ली के अंबेडकर सेंटर में एक और प्रेयर मीट रखी। यहां अमित शाह और ओम बिरला जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हुए, क्योंकि हेमा मथुरा से भाजपा सांसद हैं। हेमा ने भावुक होकर कहा, “धर्म जी मेरे लिए सब कुछ थे—पति, दोस्त और मार्गदर्शक।” इसके बाद 13 दिसंबर को उन्होंने मथुरा में भी एक सभा की।
इन सभी आयोजनों की एक ही कड़वी सच्चाई थी— सनी और बॉबी देओल इनमें शामिल नहीं हुए। ईशा के पूर्व पति भरत तख्तानी तो दिल्ली पहुंचे, लेकिन ‘देओल ब्रदर्स’ ने पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
संपत्ति का बंटवारा: क्या शुरू होगी कानूनी लड़ाई?
धर्मेंद्र की अनुमानित 400-500 करोड़ की संपत्ति अब चर्चा का विषय बन गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि प्रकाश कौर के साथ उनकी पहली शादी ही कानूनी रूप से वैध थी, इसलिए हेमा मालिनी के लिए संपत्ति में हिस्सा पाना कानूनी रूप से जटिल हो सकता है। हालांकि, धर्मेंद्र के वसीयत के अनुसार उनके सभी बच्चों (सनी, बॉबी, ईशा और अहाना) का हक बराबर माना जा रहा है। पारिवारिक सूत्रों का दावा है कि सनी देओल अपनी बहनों (ईशा और अहाना) को बेदखल नहीं करेंगे, लेकिन प्रेयर मीट्स की तस्वीरों ने इन दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
निष्कर्ष: ही-मैन की अधूरी अंतिम इच्छा?
धर्मेंद्र हमेशा चाहते थे कि उनका पूरा परिवार एक साथ रहे। लेकिन उनकी मौत के बाद हुए इन अलग-अलग आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि पुरानी कड़वाहट इतनी गहरी है कि मौत भी उसे मिटा नहीं पाई। प्रकाश कौर की खामोशी और हेमा मालिनी का अलग रास्ता चुनना यह दिखाता है कि बॉलीवुड की यह सबसे बड़ी प्रेम कहानी पर्दे पर जितनी खूबसूरत थी, असल जिंदगी में उतनी ही जटिल और दर्दनाक रही।
फैंस आज भी यही दुआ कर रहे हैं कि शायद समय के साथ ये दरारें भर जाएं और धर्मेंद्र की आत्मा को तभी शांति मिलेगी जब उनके दोनों परिवार एक होकर उनकी विरासत को आगे बढ़ाएंगे।
ओम शांति।
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