सुनील ग्रोवर: मिमिक्री की परिभाषा बदलने वाला वो कलाकार जिसने आत्मसम्मान के लिए ‘सिंहासन’ छोड़ दिया
प्रस्तावना: हंसी के पीछे का सन्नाटा
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में जब भी कॉमेडी की बात होगी, दो नाम हमेशा एक साथ लिए जाएंगे—कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मंच पर दुनिया हंसती थी, उसके पीछे कितनी गहरी खामोशी और कितना बड़ा संघर्ष छिपा था? यह कहानी सिर्फ एक कॉमेडियन की नहीं है, बल्कि उस ‘एक्टर’ की है जिसने मिमिक्री को नकल से उठाकर अभिनय की उच्चतम श्रेणी तक पहुँचा दिया।
1. मंडी डबवाली से मुंबई का कठिन सफर
हरियाणा के एक छोटे से कस्बे, मंडी डबवाली से निकलकर माया नगरी मुंबई तक का सफर सुनील ग्रोवर के लिए फूलों की सेज नहीं था। बचपन से ही लोगों की नकल उतारने में माहिर सुनील को समाज और परिवार ने कभी कलाकार के रूप में नहीं देखा।
जब वे मुंबई आए, तो उनके पास केवल सपने थे। एक समय ऐसा भी था जब उनकी मासिक आमदनी महज ₹500 थी। पॉश इलाकों के सपने देखने वाले सुनील को गोरेगांव के एक छोटे से कमरे में रहने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन उनके पिता का एक अधूरा सपना था—”जिंदगी में कुछ ऐसा करो कि बाद में पछतावा न हो।” यही शब्द सुनील की ताकत बने।
2. जसपाल भट्टी: पारखी नजर और पहला सबक
सुनील के जीवन में स्वर्गीय जसपाल भट्टी जी की भूमिका एक मार्गदर्शक की रही। भट्टी साहब ने भीड़ में छिपे इस हीरे को पहचाना। लेकिन संघर्ष तब भी कम नहीं हुआ। सुनील ने खुद बताया कि एक बार एक व्यक्ति ने उनकी फोटो के पीछे लिख दिया था—“क्लर्क टाइप”। यह टिप्पणी किसी भी कलाकार को तोड़ सकती थी, लेकिन सुनील ने इसे अपनी चुनौती बना लिया।

3. ‘गुत्थी’ और ‘डॉ. मशहूर गुलाटी’: जब किरदार कलाकार से बड़े हो गए
‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ और बाद में ‘द कपिल शर्मा शो’ ने सुनील ग्रोवर को घर-घर में पहचान दिलाई।
गुत्थी: दो चोटियाँ, लाल रिबन और “फूल खिले हैं गुलशन गुलशन” वाला वो अंदाज—दर्शकों ने ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा था।
डॉ. मशहूर गुलाटी: बिखरे बाल और “अभी तो नाम मशहूर है, धीरे-धीरे काम भी मशहूर हो जाएगा” वाला संवाद।
इन किरदारों की सफलता का राज सुनील की ‘ऑब्जर्वेशन पावर’ थी। उन्होंने केवल नकल नहीं की, बल्कि उन किरदारों की आत्मा को पकड़ लिया।
4. वो ‘फ्लाइट’ जिसने सब कुछ बदल दिया
ऑस्ट्रेलिया से लौटते वक्त विमान के बिजनेस क्लास में जो हुआ, उसने भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया। नशे में धुत्त कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच हुआ वो झगड़ा केवल एक विवाद नहीं था, बल्कि ‘अहंकार’ और ‘आत्मसम्मान’ की टक्कर थी।
कपिल ने गुस्से में कह दिया था—”मेरे बिना तुम कुछ नहीं हो।” सुनील ने पलटकर जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने जो किया वो और भी प्रभावशाली था। उन्होंने शो छोड़ दिया। उन्होंने साबित किया कि “रोटी से बड़ा आत्मसम्मान होता है।”
5. वनवास और शानदार वापसी
शो छोड़ने के बाद सुनील के लिए राह आसान नहीं थी। उनका अपना शो ‘कानपुर वाले खुरानाज’ फ्लॉप हो गया। आलोचकों ने कहना शुरू कर दिया कि सुनील ग्रोवर कपिल के बिना अधूरे हैं। लेकिन सुनील ने अपनी दिशा बदल दी।
उन्होंने ‘भारत’ फिल्म में सलमान खान के साथ काम किया।
‘तांडव’ और ‘सनफ्लावर’ जैसी वेब सीरीज में गंभीर अभिनय से सबको चौंका दिया।
‘जवान’ में शाहरुख खान के साथ उनकी मौजूदगी ने साबित किया कि वे किसी एक ‘जॉनर’ के मोहताज नहीं हैं।
6. नेटफ्लिक्स और 5 करोड़ बनाम 25 लाख का गणित
7 साल बाद, सलमान खान की मध्यस्थता और नेटफ्लिक्स (Netflix) के बड़े प्लेटफॉर्म ने इन दोनों दिग्गजों को फिर साथ लाया। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में फीस का अंतर (कपिल: ₹5 करोड़, सुनील: ₹25 लाख प्रति एपिसोड) चर्चा का विषय रहा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सुनील अब पैसों के लिए नहीं, बल्कि अपनी विरासत (Legacy) के लिए काम कर रहे हैं।
7. आमिर खान की मिमिक्री: कॉमेडी का मास्टरक्लास
हाल ही में सुनील ने आमिर खान की जो मिमिक्री की, उसने साबित कर दिया कि वे आज भी बेताज बादशाह हैं। खुद आमिर खान ने कहा, “यह मिमिक्री नहीं, यह तो ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद को देख रहा हूँ।”
निष्कर्ष: सुनील ग्रोवर से क्या सीखें?
सुनील ग्रोवर की यात्रा हमें तीन बड़ी बातें सिखाती है:
धैर्य: ₹500 से करोड़ों तक का सफर रातों-रात तय नहीं होता।
विविधता: खुद को एक खांचे में मत बांधिए। अगर दुनिया आपको कॉमेडियन कहे, तो आप एक्टर बनकर दिखाओ।
आत्मसम्मान: अगर आपकी इज्जत नहीं हो रही, तो उस सोने के पिंजरे को छोड़ देना ही बेहतर है।
सुनील ग्रोवर ने मिमिक्री को ‘कला’ बनाया और अपने संघर्ष को ‘प्रेरणा’। वे आज केवल एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि अभिनय की चलती-फिरती पाठशाला हैं।
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