विशेष रिपोर्ट: दिल्ली का ‘नकली’ गजनी – सिक्कों का दीवाना और स्मैक का मारा

नई दिल्ली | 2 अप्रैल, 2026 लेखक: मुसाफिर क्राइम डेस्क

राजधानी दिल्ली की तंग गलियों में जुर्म की हज़ारों कहानियाँ दफन हैं। यहाँ कभी कोई अपराधी अपनी क्रूरता के लिए जाना जाता है, तो कभी कोई अपनी शातिर चालों के लिए। लेकिन शाहदरा जिले की पुलिस ने हाल ही में जिस चोर को दबोचा है, उसकी कहानी सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यह कहानी किसी बॉलीवुड थ्रिलर और कॉमेडी का एक अजीब मिश्रण है।

मिलिए इमरान उर्फ इरफान उर्फ ‘गजनी’ से। नाम सुनते ही आमिर खान की वह सुपरहिट फिल्म ‘गजनी’ याद आती है, जिसका नायक 15 मिनट में सब कुछ भूल जाता था। लेकिन दिल्ली का यह गजनी कुछ भूलता नहीं है, बल्कि वह तो चोरी के नए-नए तरीके और ठिकाने याद रखता है। फर्क बस इतना है कि फिल्म वाला गजनी बदला लेने के लिए निकलता था, और यह असली गजनी अपनी स्मैक की तलब मिटाने के लिए ‘सिक्कों और नकली गहनों’ की तलाश में निकलता था।

अध्याय 1: जाल बिछा और ‘गजनी’ फँसा

घटना की शुरुआत होती है शाहदरा जिले के एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (AATS) की एक गुप्त सूचना से। पुलिस को खबर मिली थी कि न्यू सीमापुरी इलाके का एक कुख्यात चोर, जो ‘गजनी’ के नाम से मशहूर है, चोरी की एक बड़ी खेप लेकर सीमापुरी की तरफ आने वाला है।

एएटीएस की टीम ने तुरंत हरकत में आते हुए न्यू सीमापुरी के एमसीडी पार्क के पास घेराबंदी कर दी। रात का वक्त था, गलियों में सन्नाटा पसरने लगा था। तभी एक ग्रे रंग की टीवीएस स्कूटी आती दिखाई दी। स्कूटी सवार पुलिस को देखकर घबराया और उसने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उसे चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया।

जब उसकी पहचान पूछी गई, तो उसने बड़े गर्व से अपना नाम बताया—‘गजनी’

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अध्याय 2: ट्रॉली बैग का रहस्य – न सोना, न चांदी

पुलिस ने जब गजनी की स्कूटी की तलाशी ली, तो उन्हें पीछे एक भारी ट्रॉली बैग मिला। पुलिस वालों को लगा कि शायद इसमें लाखों का सोना, चांदी या नकदी होगी। लेकिन जैसे ही ज़िप खुली, हर कोई हैरान रह गया।

बैग के अंदर न तो हीरे थे और न ही असली सोना। उसमें भरा था 40 किलो वजन का सिक्कों का भंडार। ये सिक्के 5 और 10 रुपये के थे। इसके साथ ही भारी मात्रा में आर्टिफिशियल (नकली) ज्वेलरी बरामद हुई।

जांच अधिकारी भी सोच में पड़ गए कि कोई चोर इतनी मेहनत करके 40 किलो के सिक्के और नकली गहने क्यों चुराएगा? क्या यह किसी कबाड़ी का काम था या किसी सरफिरे का? लेकिन गजनी की आँखों में कोई अफ़सोस नहीं था। उसके लिए यह उसकी ‘दिहाड़ी’ थी, जो उसकी अगली स्मैक की पुड़िया का इंतज़ाम करने वाली थी।

अध्याय 3: कबाड़ी से अपराधी तक का सफर

पूछताछ में गजनी ने अपनी पूरी दास्तां उगल दी। वह न्यू सीमापुरी का ही रहने वाला है और पेशे से एक कबाड़ी है। दिन भर कबाड़ चुनना और बेचना उसका काम था, लेकिन धीरे-धीरे उसे स्मैक और शराब की ऐसी लत लगी कि कबाड़ की कमाई कम पड़ने लगी।

“साहब, कमाई कम है और शौक बड़े हैं,” गजनी ने पुलिस को बताया। स्मैक के नशे ने उसे अंधेरे की ओर धकेल दिया। उसने कबाड़ चुनने के बहाने घरों की रेकी (Requisition) करना शुरू किया। वह देखता था कि किस घर में ताला लगा है और कहाँ घुसना आसान है।

जिस स्कूटी पर वह पकड़ा गया, वह भी उसने मधु विहार इलाके से चुराई थी। और वह 40 किलो के सिक्के? वे भी उसने मधु विहार के ही एक घर में सेंधमारी (Burglary) करके चुराए थे। उसे घर की अलमारी में जो मिला—नकली गहने और गुल्लक में रखे सिक्के—उसने कुछ भी नहीं छोड़ा। उसके लिए ‘जो मिल गया, वही माल है’ वाली नीति काम करती थी।

अध्याय 4: याददाश्त नहीं, फितरत की बीमारी

दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि यह गजनी कोई नया खिलाड़ी नहीं है। वह पहले भी चोरी के तीन बड़े मामलों में शामिल रह चुका है। वह बार-बार पकड़ा जाता है, जेल जाता है और बाहर आकर फिर वही गलती दोहराता है।

फिल्म वाले गजनी की बीमारी ‘शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस’ थी, लेकिन इस गजनी की बीमारी ‘क्रिमिनल फितरत’ है। वह भूलता नहीं है कि चोरी कैसे करनी है, वह बस यह भूल जाता है कि पिछली बार वह कैसे पकड़ा गया था। उसकी किस्मत ने इस बार उसका साथ नहीं दिया और वह फिर से सलाखों के पीछे पहुँच गया।

अध्याय 5: स्मैक का ज़हर और अपराध का अंत

गजनी की यह कहानी दिल्ली के उन हज़ारों युवाओं का आईना है जो नशे की गिरफ्त में आकर अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं। स्मैक एक ऐसा ज़हर है जो इंसान की सोचने-समझने की शक्ति खत्म कर देता है। गजनी जैसा कबाड़ी, जो मेहनत करके अपनी ज़िंदगी जी सकता था, आज महज़ चंद सिक्कों और नकली गहनों के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी जेल में बिताने को तैयार है।

दिल्ली पुलिस अब गजनी के उन साथियों की तलाश कर रही है जो उसे चोरी का माल खपाने में मदद करते थे। साथ ही, पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उसने और कितने घरों में इस तरह की ‘अनोखी’ चोरियां की हैं।

निष्कर्ष: सजग पुलिस, सुरक्षित शाहदरा

शाहदरा जिला पुलिस और एएटीएस टीम का यह कार्य वाकई सराहनीय है। उन्होंने न केवल एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ा, बल्कि एक सक्रिय गिरोह की कमर भी तोड़ दी।

गजनी जैसे चोर भले ही मज़ाकिया लगें, लेकिन वे समाज की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं। आज उसने सिक्के चुराए हैं, कल वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता था। दिल्ली पुलिस का यह संदेश साफ़ है—अपराधी चाहे खुद को ‘गजनी’ समझे या ‘सुल्तान’, कानून के हाथ उस तक पहुँच ही जाते हैं।

आम जनता के लिए भी यह एक सबक है कि अपने घरों की सुरक्षा के प्रति हमेशा सजग रहें। क्योंकि दिल्ली की गलियों में कोई न कोई ‘गजनी’ हमेशा फिराक में बैठा रहता है कि कब उसे कोई ताला टूटा मिले और वह आपके ‘गुल्लक’ पर हाथ साफ कर सके।


मुसाफिर क्राइम तक – सच के साथ, जुर्म के खिलाफ।