धर्मेंद्र की आखिरी वसीयत: जब हेमा मालिनी ने ठुकराई करोड़ों की जायदाद और सनी देओल से मांगा सिर्फ एक ‘वादा’
मुंबई: रिश्तों की एक अनकही दास्तां
अक्सर बॉलीवुड की गलियों से जब किसी बड़े सितारे के जाने की खबर आती है, तो दुनिया की नजरें उसकी जायदाद, बंगलों और बैंक बैलेंस पर टिक जाती हैं। लेकिन ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र के जाने के बाद जो कहानी सामने आई, उसने यह साबित कर दिया कि कुछ चीजें पैसों से कहीं ज्यादा कीमती होती हैं। यह कहानी करोड़ों की विरासत की नहीं, बल्कि उन टूटे हुए रिश्तों की है जिन्हें धर्मेंद्र जाते-जाते एक धागे में पिरो गए।
जब धर्मेंद्र इस दुनिया से विदा हुए, तो उनके पीछे दो परिवार थे, दशकों पुरानी दूरियां थीं और करोड़ों की संपत्ति थी। हर किसी को लग रहा था कि अब अदालतों में केस चलेंगे, अब झगड़े होंगे। लेकिन हेमा मालिनी के एक फैसले ने पूरे हिंदुस्तान को हैरान कर दिया।
दौलत नहीं, दुआ मांगी: हेमा मालिनी का बड़ा फैसला
धर्मेंद्र के जाने के बाद जब वकीलों ने संपत्ति के बंटवारे की बात की, तो सबकी निगाहें हेमा मालिनी पर थीं। लेकिन उस दिन वह ‘ड्रीम गर्ल’ नहीं, बल्कि एक ऐसी पत्नी थीं जिसने अपने पति की खामोश ख्वाहिश को समझ लिया था। हेमा जी ने सिर झुकाया और कहा, “मुझे बंगला, जमीन या करोड़ों का बैंक बैलेंस नहीं चाहिए। धर्म जी ने जीते-जी मुझे कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। अब उनके जाने के बाद मैं इस दौलत का क्या करूंगी?”
कमरे में सन्नाटा छा गया। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने आगे जो कहा, वह और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने सनी देओल की तरफ देखा और कहा, “मुझे जायदाद नहीं, बस सनी से एक वादा चाहिए।”
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सनी देओल से वो एक खास मांग
हेमा मालिनी ने सनी देओल से जो मांगा, वह कागजों पर नहीं लिखा जा सकता था। उन्होंने कहा, “सनी, तुम इस परिवार के सबसे बड़े बेटे हो। धर्म जी की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि उनके बाद यह परिवार बिखर न जाए। मुझे बस यह वादा चाहिए कि तुम अपनी बहनों (ईशा और अहाना) का हाथ कभी नहीं छोड़ोगे। उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने देना कि उनके पिता के जाने के बाद वे इस परिवार में अकेली हैं।”
कहा जाता है कि सनी देओल, जिन्हें दुनिया उनके सख्त अंदाज और ‘ढाई किलो के हाथ’ के लिए जानती है, उस पल पूरी तरह टूट गए। उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने अपनी सौतेली मां का हाथ थामा और वादा किया कि वह धर्मेंद्र की इज्जत और परिवार की एकता पर कभी आंच नहीं आने देंगे। यह एक बेटे का अपनी मां (भले ही सौतेली हो) को दिया गया सबसे बड़ा सम्मान था।

40 साल की वो डरावनी खामोशी
इस वादे की अहमियत समझने के लिए हमें इतिहास के उन पन्नों को पलटना होगा जिन्हें देओल परिवार ने हमेशा ढका रहा। जब धर्मेंद्र ने प्रकाश कौर के रहते हुए हेमा मालिनी से शादी की, तो सनी देओल एक युवा लड़के थे। अपनी मां के आंसू और पिता का दूसरा घर—यह किसी भी बेटे के लिए स्वीकार करना आसान नहीं था।
बरसों तक सनी और हेमा के बीच एक ऐसी दीवार रही जिसे कभी तोड़ा नहीं जा सका। एक पुरानी कहानी आज भी बॉलीवुड के गलियारों में गूंजती है कि शादी के कुछ समय बाद एक रात सनी देओल गुस्से में हेमा मालिनी के नए घर के बाहर आकर रुके थे। वह अंदर नहीं आए, लेकिन उनकी खामोशी ने हेमा को डरा दिया था। हेमा ने उस रात महसूस किया था कि वह सिर्फ किसी की पत्नी नहीं बनी हैं, बल्कि किसी बेटे की तकलीफ की वजह भी बन चुकी हैं। उन्होंने धर्मेंद्र से कहा था, “अगर वह दोबारा आए, तो मैं बाहर चली जाऊंगी।” यह डर नहीं, बल्कि उस बेटे की नफरत और घिन का सामना न कर पाने की लाचारी थी।
क्या मौत ने दूरियों को मिटा दिया?
धर्मेंद्र ने अपनी पूरी जिंदगी दो परिवारों को संभालने में गुजार दी। वह अक्सर अपनी डायरी में लिखते थे कि उन्हें अफसोस है कि वह सबको एक ही छत के नीचे नहीं रख पाए। लेकिन उनके जाने के बाद सनी देओल के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखा गया। शायद पिता के जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि नफरत से बड़ा बोझ और कुछ नहीं होता।
आज सनी देओल न केवल ईशा और अहाना के साथ खड़े नजर आते हैं, बल्कि वे हेमा मालिनी के प्रति भी सम्मान दिखाते हैं। ‘गदर 2’ की सफलता के समय जब पूरा परिवार एक साथ आया, तो दुनिया ने देखा कि धर्मेंद्र का अधूरा सपना सच हो रहा है।
निष्कर्ष: रिश्तों का नया अध्याय
हेमा मालिनी ने करोड़ों की जायदाद ठुकराकर यह साबित कर दिया कि वह धर्म जी से निस्वार्थ प्रेम करती थीं। उन्होंने दौलत के बजाय ‘रिश्ते’ मांगे और सनी देओल ने उन रिश्तों को निभाने का ‘बोझ’ अपने कंधों पर उठा लिया। यह कहानी हमें सिखाती है कि संपत्ति तो आती-जाती रहती है, लेकिन जो इंसान अपनों के लिए खड़ा रहता है, वही असली वारिस कहलाता है।
अब सवाल आपसे है:
क्या आपको लगता है कि हेमा मालिनी ने करोड़ों की संपत्ति छोड़कर सही किया?
क्या सनी देओल को अब हेमा मालिनी और उनकी बेटियों को पूरी तरह से ‘देओल परिवार’ का हिस्सा मान लेना चाहिए?
क्या आप मानते हैं कि समय हर जख्म को भर देता है?
अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में हाँ या नहीं लिखकर जरूर बताएं।
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