धर्मेंद्र के जाने के बाद बदल गया देयोल परिवार का इतिहास: वो रात जब फूट-फूट कर रोए बॉबी और हेमा मालिनी
मुंबई: रिश्तों की एक अनकही दास्तां
मुंबई की सर्दी इस बार कुछ ज्यादा ही खामोश थी। जुहू की उन गलियों में, जहां कभी ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र की हंसी गूंजती थी, वहां अब एक भारी सन्नाटा पसरा हुआ है। धर्मेंद्र के निधन को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन उनके घर की दीवारें आज भी उनकी बुलंद आवाज और उनकी मौजूदगी को ढूंढती हैं। अक्सर फिल्मी परिवारों के झगड़े और दूरियां हेडलाइन बनती हैं, लेकिन धर्मेंद्र के जाने के बाद देओल परिवार के भीतर जो कुछ हुआ, उसने इंसानियत और रिश्तों की एक नई इबारत लिख दी है।
यह कहानी है बॉबी देओल और हेमा मालिनी के बीच के उस पवित्र और जटिल रिश्ते की, जिसे पिछले 40 सालों से दुनिया की नजरों से दूर रखा गया था।
वह आधी रात और एक अनपेक्षित मुलाकात
धर्मेंद्र के जाने के बाद पूरा देश शोक में था, लेकिन उनका छोटा बेटा बॉबी देओल अंदर से पूरी तरह टूट चुका था। कैमरे के सामने मजबूत दिखने वाले बॉबी ने न तो कोई सोशल मीडिया पोस्ट किया, न ही कोई बयान दिया। उनके करीबियों का कहना है कि बॉबी इस सच को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे थे कि उनके ‘पापा’ अब इस दुनिया में नहीं हैं।
धर्मेंद्र के निधन के ठीक 45 दिन बाद, एक रात लगभग 2:30 बजे, बॉबी देओल अचानक अपनी गाड़ी लेकर निकले। उन्होंने अपने ड्राइवर तक को नहीं बताया कि वे कहां जा रहे हैं। उनकी गाड़ी सीधे हेमा मालिनी के बंगले के सामने जाकर रुकी—वह दरवाजा, जो देओल परिवार के ‘दूसरे हिस्से’ के लिए बरसों से बंद था।
हेमा मालिनी भी उस रात सो नहीं रही थीं। जब डोरबेल बजी, तो उन्हें लगा कि शायद कोई गलती से आया होगा। लेकिन जब उन्होंने सीसीटीवी स्क्रीन पर बॉबी का चेहरा देखा, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने बरसों से अपने सौतेले बेटे को इतने करीब से नहीं देखा था।
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“मां, मैं आज अपने लिए आया हूं”
हेमा मालिनी ने खुद बाहर आकर दरवाजा खोला। जैसे ही दोनों की नजरें मिलीं, सालों की जमी हुई बर्फ पिघल गई। बॉबी ने बस इतना कहा, “मां, आज मैं पापा के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए आया हूं।” और इतना कहते ही बॉबी, हेमा मालिनी के गले लगकर फूट-फूट कर रो पड़े।
वह महिला, जिसे दुनिया ‘दूसरी औरत’ या ‘सौतेली मां’ कहती रही, उस रात सिर्फ एक ‘मां’ बन गई। उन्होंने बॉबी को अपने सीने से लगा लिया। यह एक ऐसा पल था जिसने बॉलीवुड के सबसे बड़े विवादों में से एक को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। धर्मेंद्र हमेशा चाहते थे कि उनके दोनों परिवार एक हो जाएं, लेकिन उनके जीते-जी यह कभी पूरी तरह मुमकिन नहीं हो पाया। उनकी मौत ने वह कर दिखाया जो जिंदगी नहीं कर सकी।

धर्मेंद्र की आखिरी वसीयत: वो डायरी जिसने सब बदल दिया
उस रात हेमा मालिनी बॉबी को अपनी एक पुरानी अलमारी के पास ले गईं और उन्हें धर्मेंद्र की लिखी हुई एक पुरानी डायरी थमाई। उस डायरी के एक पन्ने पर धर्मेंद्र ने अपने दिल का हाल लिखा था, जिसे पढ़कर किसी की भी आंखें भर आएं।
धर्मेंद्र ने लिखा था: “मुझे इस बात का हमेशा अफसोस रहेगा कि मैं अपने सभी बच्चों को एक ही छत के नीचे नहीं रख पाया। लेकिन बॉबी और सनी के लिए मेरे दिल में वही जगह है जो अहाना और ईशा के लिए है। अगर मेरी मौत के बाद मेरा कोई भी बेटा हेमा के पास आए, तो उसे कभी मना मत करना। उसे वही प्यार देना जो एक मां अपने बेटे को देती है।”
इस एक पन्ने ने बॉबी के दिल का सारा बोझ हल्का कर दिया। उन्होंने बहुत धीमी आवाज में पूछा, “मां, क्या मैं कभी इस घर का हिस्सा बन सकता हूं?” हेमा मालिनी ने बिना एक पल की देरी किए जवाब दिया, “बेटा, तुम हमेशा से इस घर का हिस्सा थे, बस दरवाजे हमने खुद ही बंद कर रखे थे।”
सनी देओल और हेमा मालिनी: नफरत से सम्मान तक का सफर
बॉबी और हेमा के इस मिलन के पीछे एक और कहानी है—सनी देओल की। साल 1980 में जब धर्मेंद्र ने धर्म बदलकर हेमा मालिनी से शादी की थी, तब 22-23 साल के सनी देओल सबसे ज्यादा आहत हुए थे। अपनी मां प्रकाश कौर की आंखों में आंसू देखकर किसी भी बेटे का खून खौलना लाजमी था। उस वक्त मीडिया में अफवाहें उड़ी थीं कि सनी हाथ में चाकू लेकर हेमा के घर पहुंच गए थे, लेकिन बाद में प्रकाश कौर ने खुद सामने आकर इन खबरों का खंडन किया था।
सनी ने सालों तक हेमा मालिनी से एक शब्द नहीं बोला। अगर वे किसी पार्टी में होते, तो सनी रास्ता बदल लेते थे। लेकिन साल 1992 में फिल्म ‘दिल आशना है’ के सेट पर पहली बार बर्फ पिघली, जब हेमा ने डिंपल कपाड़िया की मदद की थी। और फिर साल 2015 में जब राजस्थान में हेमा मालिनी का भयानक एक्सीडेंट हुआ, तब सनी देओल ही सबसे पहले अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने डॉक्टरों का इंतजाम किया और तब तक वहां रहे जब तक हेमा खतरे से बाहर नहीं आ गईं।
एक नया सवेरा: टूटा हुआ परिवार अब एक है
आज, धर्मेंद्र के निधन के कुछ समय बाद, खबर आ रही है कि बॉबी देओल अब हर हफ्ते हेमा मालिनी से मिलने जाते हैं। वहां कोई कैमरा नहीं होता, कोई मीडिया नहीं होती। बस चाय की प्याली होती है और ढेर सारी बातें—पापा की यादें, पुराने दिनों के किस्से और एक बेहतर भविष्य की योजनाएं।
ईशा देओल और अहाना देओल भी अब अपने भाइयों (सनी और बॉबी) के करीब आ गई हैं। ‘गदर 2’ की सफलता के दौरान पूरा परिवार एक साथ देखा गया था, जो इस बात का सबूत है कि अब नफरत की दीवार गिर चुकी है।
निष्कर्ष: इंसानियत सबसे बड़ी है
देओल परिवार की यह कहानी हमें सिखाती है कि वक्त हर जख्म को भर देता है। सनी और बॉबी ने अपनी मां का दर्द समझा, लेकिन उन्होंने अपने पिता के प्यार का भी सम्मान किया। उन्होंने नफरत को आगे बढ़ाने के बजाय इंसानियत और माफी को चुना। धर्मेंद्र भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन स्वर्ग से वे निश्चित रूप से अपने दोनों परिवारों को एक साथ देखकर मुस्कुरा रहे होंगे।
यह सिर्फ एक फिल्मी परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस इंसान के लिए सीख है जो रिश्तों में कड़वाहट लेकर जी रहा है। माफी और प्यार से बड़े से बड़े घाव भरे जा सकते हैं।
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