प्रकाश कौर का अंतिम वादा: धर्मेंद्र की चिता पर फूट-फूट कर रोईं पहली पत्नी, जिसने 70 साल तक रखा अपने ‘बेवफ़ा’ पति का मान!
मुंबई, श्मशान घाट: दोपहर के 12 बज रहे थे। मुंबई के श्मशान घाट के बाहर भारी भीड़ थी—पुलिस, मीडिया के कैमरे और एक गहरा सन्नाटा। आज बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र देओल हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह गए थे। अर्थी के पास चुपचाप खड़ा था देओल परिवार, लेकिन तभी भीड़ को चीरती हुई एक बुजुर्ग महिला पहुँची।
सफ़ेद दुपट्टा, काँपते हुए हाथ और आँखों से बहता दशकों का दर्द—यह थीं प्रकाश कौर, धर्मेंद्र जी की पहली पत्नी। वो महिला, जिसने धर्मेंद्र को उनके संघर्षों के दिनों से लेकर फ़िल्मी सितारों की ऊँचाइयों तक चुपचाप सँभाला।
प्रकाश कौर के पैर काँप रहे थे। 89 साल के पति को आख़िरी विदाई देने की यह घड़ी उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं थी।
दशकों के प्यार का दर्द और वो अंतिम स्पर्श
प्रकाश कौर लड़खड़ाते क़दमों से आगे बढ़ीं। वह धीमी गति से अर्थी के पास पहुँचीं, झुकीं और धर्मेंद्र के चेहरे को आख़िरी बार छुआ। उस स्पर्श में सिर्फ़ विदाई नहीं थी, बल्कि 70 साल के साथ का सार था। और फिर, बाँध टूट गया।
वह फूट-फूट कर रो पड़ीं। यह ऐसा रोना था जो सुना नहीं जाता—यह महसूस किया जाता है। उनकी आवाज़ टूट गई, उनका शरीर काँपने लगा।
उन्होंने धर्मेंद्र जी के चेहरे को देखते हुए चीख़कर कहा, “धर्म! उठो, एक बार तो बोल दो… सुन लो मेरी जान! यह क्या कर गए तुम?”
आसपास खड़े सनी देओल और बॉबी देओल, जो ख़ुद भी गहरे सदमे में थे, तुरंत अपनी माँ को संभालने की कोशिश करने लगे। लेकिन प्रकाश कौर अपने ही संसार में टूट चुकी थीं। वह एक ऐसे दर्द से गुज़र रही थीं जिसे कोई बेटा या बेटी भी नहीं समझ सकता—यह एक पत्नी का दर्द था, जिसे बेवफ़ाई भी मिली, और साथ भी मिला।
आख़िरी बार गले लगना: ज़िंदगी भर का साथ
प्रकाश कौर धीरे-धीरे झुकीं और धर्मेंद्र जी की अर्थी से ऐसे लिपट गईं, जैसे वह ज़िंदगी भर के सारे अधूरे पल एक ही बार में जीना चाहती हों। वह केवल गले नहीं लगी थीं; उन्होंने उस साथ को आख़िरी बार पकड़ लिया था, जिसे 70 साल तक कोई और नहीं छीन पाया था।
टूट चुकी प्रकाश कौर उस अर्थी को छोड़ने को तैयार नहीं थीं। वहाँ मौजूद लोगों को बड़ी मुश्किल से उन्हें धर्मेंद्र जी से अलग करना पड़ा। सनी और बॉबी की आँखें माँ की इस हालत को देखकर आँसुओं से भर गईं। उनके पास कोई शब्द नहीं थे, बस एक ही वाक्य उनके मुँह से निकल पाया: “माँ… पापा को शांति मिली है। आप हिम्मत रखो।”
मगर उस पल, प्रकाश कौर किसी के शब्द नहीं सुन रही थीं। उनके लिए बस एक ही नाम था—धर्मेंद्र।
अंतिम वादा: जो सुनकर सबकी आँखें भर आईं

कुछ देर चुप रहने के बाद, प्रकाश कौर ने एक बार फिर हिम्मत जुटाई। उन्होंने धीमे स्वर में, धर्मेंद्र के कान के पास झुककर कुछ कहा। यह एक ऐसा वादा था, जिसे सुनकर वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की आँखें पूरी तरह से नम हो गईं।
कैमरे उनके काँपते होंठों को रिकॉर्ड कर रहे थे, और उनके शब्द हवा में गूँज गए, जिन्होंने वहाँ मौजूद हर इंसान का दिल हिला दिया:
“इस जन्म में तुम चले गए, पर मैं भी जल्द तुम्हारे पास आ रही हूँ… अब ज़्यादा देर नहीं लगेगी धर्म। तुम अकेले नहीं रहोगे।”
यह एक पत्नी का अपने जीवन साथी से किया गया अंतिम वादा था—एक ऐसा वादा जिसे सुनकर लोग ख़ुद को रोक न सके और रो पड़े। यह केवल एक अंतिम संस्कार नहीं था, यह एक प्रेम कहानी का अंतिम अध्याय था जो आधी सदी से भी ज़्यादा चला। यह प्रेम कहानी बिना शोर, बिना कैमरों के, आख़िरी साँस तक सच्ची रही।
इसके बाद प्रकाश कौर ने हाथ जोड़कर आँखें बंद कर लीं। उन्होंने धीरे से कहा, “अब अगला क़दम मेरा है धर्म। तुम्हारे बिना अकेले नहीं रह पाऊँगी… मैं मर जाऊँगी।”
यह वह समर्पण था जिसने वहाँ मौजूद सभी को निशब्द कर दिया।
सच्ची प्रेम कहानी का इतिहास: बेवफ़ाई के बावजूद सम्मान
धर्मेंद्र और प्रकाश कौर की शादी 1950 के दशक में हुई थी। 70 साल से भी अधिक समय तक ये दोनों एक-दूसरे के साथ रहे, सुख-दुख बाँटा। प्रकाश कौर की ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ 1980 में आया, जब धर्मेंद्र जी ने हेमा मालिनी से शादी कर ली।
आमतौर पर, कोई भी पत्नी अपने पति की इस ‘बेवफ़ाई’ को माफ़ नहीं कर पाती, लेकिन प्रकाश कौर ने न सिर्फ़ धर्मेंद्र जी को माफ़ किया, बल्कि मीडिया में भी आकर उनका बचाव किया।
एक वक़्त था, जब उन्होंने मीडिया से कहा था, “मेरा पति कोई बुरा आदमी नहीं है। मेरा पति अच्छा है, सच्चा है।”
यह उनका ‘बड़ा करेज’ था, जिसने धर्मेंद्र जी के सम्मान को बचाए रखा। हालाँकि, उनके पूरे परिवार (सनी, बॉबी, और उनकी बहनों) ने हेमा मालिनी को कभी भी स्वीकार नहीं किया, और यही वजह थी कि अंतिम संस्कार में भी उन्होंने हेमा मालिनी को धर्मेंद्र जी के क़रीब नहीं आने दिया, और हेमा जी को सिर्फ़ 2 मिनट में वापस जाना पड़ा।
आई.सी.यू. में भी था यही सच्चा प्यार
प्रकाश कौर का धर्मेंद्र जी के प्रति यह प्यार सिर्फ़ एक अंतिम विदाई का प्रदर्शन नहीं था।
हाल ही में, जब धर्मेंद्र जी कैंडी हॉस्पिटल में आई.सी.यू. में थे, तो उनका एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में प्रकाश कौर जिस तरह चीख़ रही थीं, जिस तरह चिल्ला रही थीं, उसे देखकर हर किसी की आँखें भर आईं थीं।
वह रो-रोकर कह रही थीं, “एक बार बोल दे बलिए! एक बार तू मुझसे बात कर ले बलिए!”
उनकी चीख़ और चिल्लाहट ने वहाँ मौजूद सभी लोगों को रुला दिया था। उस वीडियो को देखने के बाद भी सभी लोगों ने यही कहा था कि पत्नी हो तो प्रकाश कौर जैसी!
प्रकाश कौर ने जीवन भर धर्मेंद्र जी का साथ दिया। उनकी वफ़ादारी, उनका धैर्य और उनका समर्पण एक ‘स्ट्रॉन्ग लेडी’ और एक ‘सच्ची महिला’ ही दिखा सकती है। उन्होंने अपने पति की ग़लतियों को माफ़ कर, अपने रिश्ते को 70 साल तक सँभाले रखा।
धर्मेंद्र जी की चिता पर किया गया प्रकाश कौर का वह अंतिम वादा—“मैं भी जल्द तुम्हारे पास आ रही हूँ”—एक ऐसी प्रेम कहानी का अंत था, जिसने सिखाया कि सच्चा प्यार हर मुश्किल और हर बेवफ़ाई से ऊपर होता है।
यह सिर्फ़ एक अंत नहीं, बल्कि उस युग के सच्चे प्रेम और त्याग की कहानी है, जो अब इतिहास बन गई है।
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