प्रयागराज माघ मेला 2026: आस्था की आड़ में काला खेल और एक ‘देवदूत’ का साहस

प्रस्तावना: संगम की लहरों में छिपा दर्द

प्रयागराज की पावन धरती, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन होता है, सदियों से करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र रही है। 2026 का माघ मेला भी अपनी पूरी भव्यता के साथ शुरू हुआ, लेकिन इस बार संगम की रेती पर केवल मंत्रोच्चार और भजन ही नहीं गूंजे, बल्कि एक ऐसी चीख भी सुनाई दी जिसे धर्म के नाम पर दबाने की कोशिश की गई थी। यह कहानी है ज्योति की, जो शांति की तलाश में यहाँ आई थी, लेकिन एक ‘नकली बाबा’ के चंगुल में फंस गई।

1. ज्योति: एक टूटे हुए मन की पुकार

नोएडा की रहने वाली 22 वर्षीय ज्योति की जिंदगी किसी सपने जैसी थी, जब तक कि एक सड़क हादसे ने उसके माता-पिता को उससे छीन नहीं लिया। अकेलेपन के उस गहरे कुएं में ज्योति को किसी सहारे की तलाश थी। जब विज्ञान और दवाइयां उसके मानसिक बोझ को कम नहीं कर पाईं, तो उसने ‘आस्था’ का रुख किया। उसे बताया गया कि प्रयागराज के माघ मेले में ऐसे सिद्ध महापुरुष हैं जो मन की शांति लौटा सकते हैं। ज्योति अपने माता-पिता की तस्वीर और कुछ उम्मीदों के साथ प्रयागराज पहुँची, यह सोचे बिना कि यहाँ उसका सामना ‘साधु’ के भेष में छिपे एक ‘शिकारी’ से होगा।

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2. बाबा हरिनाथ: सफेद कपड़ों में छिपा काला सच

मेले के बीचों-बीच एक शिविर में बाबा हरिनाथ का दरबार लगा था। 52 वर्ष की आयु, चेहरे पर कृत्रिम शांति और मीठी बोली—हरिनाथ ने पहली ही मुलाकात में ज्योति के दर्द को भांप लिया। उसने ज्योति से कहा, “बेटी, जब संसार साथ छोड़ दे, तो ईश्वर हाथ थामता है। लेकिन इसके लिए मन की शुद्धि अनिवार्य है।” ज्योति, जो पहले से ही मानसिक रूप से कमजोर थी, बाबा की बातों में आ गई। बाबा ने उसे अपने आश्रम ले जाने का प्रस्ताव दिया, जहाँ ‘विशेष साधना’ के जरिए नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का दावा किया गया।

3. आश्रम का रहस्य और ‘साधना’ का नकाब

आश्रम बाहर से जितना शांत था, अंदर से उतना ही डरावना। ज्योति ने वहां कुछ अन्य महिलाओं को देखा जिनके चेहरों पर शांति नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोश दहशत थी। बाबा हरिनाथ ने रात की ‘साधना’ के नाम पर ज्योति को एक विशेष कटोरे में ‘प्रसाद’ दिया। वह प्रसाद वास्तव में एक शक्तिशाली नशीला पदार्थ था। ज्योति का शरीर धीरे-धीरे सुन्न होने लगा और उसकी चेतना लुप्त होने लगी।

यहीं पर उस ‘सिस्टम’ का असली चेहरा सामने आया। बाबा हरिनाथ कोई सिद्ध पुरुष नहीं था, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा था, जो मजबूर महिलाओं को आस्था के नाम पर फंसाकर उनका शोषण करता था और उनके वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था।

4. देव: वो गुमनाम नायक जिसने हार नहीं मानी

आश्रम में काम करने वाला 28 वर्षीय ‘देव’ लंबे समय से इन संदिग्ध गतिविधियों को देख रहा था। उसने देखा था कि कैसे कुछ महिलाएं अचानक आश्रम से गायब हो जाती थीं। जब उसने ज्योति को उस कमरे में ले जाते देखा, तो उसके जमीर ने विद्रोह कर दिया। वह जानता था कि अगर उसने आज आवाज नहीं उठाई, तो एक और मासूम जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।

देव ने अपनी जान जोखिम में डालकर आश्रम की पिछली दीवार फांदी और माघ मेले के सुरक्षा शिविर की ओर दौड़ा। उसने अपने दोस्त यश और पुलिस को इस भयावह स्थिति की जानकारी दी।

5. आधी रात का छापा और सच का खुलासा

जब पुलिस और स्थानीय लोगों की भीड़ ने आश्रम पर धावा बोला, तो वहां अफरा-तफरी मच गई। बाबा हरिनाथ जो अब तक ‘भगवान’ बना बैठा था, पुलिस को देखते ही गिड़गिड़ाने लगा। ज्योति बेहोशी की हालत में मिली। पुलिस की तलाशी में जो सामने आया, उसने प्रयागराज को झकझोर दिया:

नशीले पदार्थ और इंजेक्शन: महिलाओं को बेहोश करने के लिए भारी मात्रा में नशीली दवाओं का भंडारण।

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स: दर्जनों मोबाइल फोन और छिपे हुए कैमरे, जिनमें आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए गए थे।

पुराना रिकॉर्ड: जांच में खुलासा हुआ कि ‘बाबा हरिनाथ’ का असली नाम कुछ और था और वह कई राज्यों में वांटेड अपराधी था।

6. माघ मेले का संदेश: अंधविश्वास बनाम विवेक

इस घटना ने माघ मेला 2026 के प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सोच पर गहरे सवाल खड़े किए। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्ध शिविरों की जांच के लिए विशेष टीमें गठित कीं।

ज्योति को समय रहते बचा लिया गया। कुछ हफ्तों के बाद जब वह ठीक हुई, तो उसने न केवल अपना बयान दर्ज कराया बल्कि अन्य पीड़ित महिलाओं के लिए एक सहारा बनने का संकल्प लिया। उसने साबित किया कि एक पीड़ित महिला केवल सहानुभूति की पात्र नहीं है, बल्कि वह अन्याय के खिलाफ एक ‘ज्वाला’ भी बन सकती है।

निष्कर्ष: असली धर्म क्या है?

प्रयागराज की यह घटना हमें सिखाती है कि धर्म और आस्था का मार्ग विवेक के बिना अधूरा है। असली साधु वह है जो त्याग सिखाता है, न कि वह जो आपकी मजबूरी का फायदा उठाए।

सतर्कता ही सुरक्षा है: किसी भी व्यक्ति पर केवल उसके भेष को देखकर भरोसा न करें।

सवाल उठाना सीखें: जहाँ रहस्य हो, जहाँ पर्दे के पीछे की बात हो, वहाँ खतरा हो सकता है।

मानवता सबसे बड़ा धर्म: देव जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि जब तक समाज में न्याय के लिए खड़े होने वाले लोग हैं, तब तक अंधेरा कभी जीत नहीं सकता।

गंगा आज भी बह रही है, माघ मेला आज भी लग रहा है, लेकिन अब वहां आने वाले श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था के साथ-साथ एक नई ‘जागरूकता’ भी है।