धर्मेन्द्र की अंतिम विदाई में दरार? सन्नी और बॉबी बनाम हेमा मालिनी: सोशल मीडिया पर बवाल
मुंबई: हिंदी सिनेमा के महानायक धर्मेन्द्र के निधन से उपजा शोक अभी शांत भी नहीं हुआ था कि देओल परिवार एक और विवाद में घिर गया है। दिग्गज अभिनेता की अंतिम यात्रा और उसके बाद की प्रार्थना सभाओं (Prayer Meets) में परिवार का अलग-थलग दिखना अब सोशल मीडिया पर बड़े विवाद का कारण बन गया है। नेटिज़न्स (Netizens) ने सन्नी देओल, बॉबी देओल और यहाँ तक कि हेमा मालिनी को भी ‘ही-मैन’ की अंतिम रस्मों में पारिवारिक अलगाव दिखाने के लिए कड़ी निंदा की है।
I. अलग-अलग प्रार्थना सभाएँ: दरार की सार्वजनिक घोषणा
विवाद तब शुरू हुआ जब यह सामने आया कि धर्मेन्द्र के लिए एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग प्रार्थना सभाएँ आयोजित की गईं।
सन्नी-बॉबी की ‘सेलिब्रेशन ऑफ़ लाइफ़’ मीट: सन्नी देओल और बॉबी देओल ने एक भव्य ‘सेलिब्रेशन ऑफ़ लाइफ़’ प्रार्थना सभा का आयोजन किया, जिसमें बॉलीवुड के कई दिग्गज और इंडस्ट्री के लोग शामिल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सभा में हेमा मालिनी और उनकी बेटियाँ (ईशा और अहाना) शामिल नहीं हुईं।
हेमा मालिनी की निजी पूजा: कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया कि हेमा मालिनी ने अपने आवास पर पंडितों द्वारा एक निजी पूजा का आयोजन किया। आश्चर्य की बात यह थी कि इस पूजा में भी सन्नी और बॉबी देओल शामिल नहीं हुए।
पारिवारिक शोक की इस घड़ी में दो अलग-अलग आयोजन, नेटिज़न्स के लिए ‘भाईचारे की कमी’ का स्पष्ट संकेत थे, जिससे सोशल मीडिया पर ग़ुस्सा फूट पड़ा।
II. नेटिज़न्स का हमला: “शर्म आनी चाहिए!”

सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई, जिसमें लोगों ने सन्नी देओल और बॉबी देओल की आलोचना करते हुए उन पर हेमा मालिनी और उनकी बेटियों को जानबूझकर अलग-थलग करने का आरोप लगाया।
एक यूज़र ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए लिखा: “सन्नी और बॉबी पर शर्म आनी चाहिए। यह कैसा अपमानजनक कृत्य है कि उन्होंने हेमा जी और उनकी बेटियों को प्रार्थना सभा से दूर रखा।” दूसरे यूज़र ने टिप्पणी की: “ठीक है, उन्हें हेमा जी पसंद नहीं हैं? ठीक है। लेकिन ईशा और अहाना की क्या गलती थी? क्या वे भूल गए कि वे दोनों उनके पिता की बेटियाँ और अंततः उनकी बहनें हैं? धर्म जी के जाते ही दोनों अपना असली रंग दिखा रहे हैं।”
सबसे तीखी आलोचना इस बात पर हुई कि ईशा और अहाना को अपने ही पिता की अंतिम रस्मों और प्रार्थना सभाओं का हिस्सा नहीं बनाया गया। इसे पारिवारिक मूल्यों का पतन और असंवेदनशील व्यवहार माना गया।
III. संपत्ति और अंतिम संस्कार की अफवाहें
आलोचना का एक बड़ा हिस्सा ₹450 करोड़ की संपत्ति के बँटवारे की आशंकाओं पर केंद्रित था। कई यूज़र्स ने सीधे तौर पर सन्नी देओल पर संपत्ति विवाद के डर से हेमा मालिनी और उनकी बेटियों को अंतिम संस्कार और प्रार्थना सभा से दूर रखने का आरोप लगाया।
एक कमेंट में कहा गया: “सन्नी ने शायद संपत्ति के बँटवारे के डर से उन्हें आमंत्रित नहीं किया होगा।” एक अन्य कमेंट में यह भी दावा किया गया कि हेमा मालिनी और ईशा देओल को श्मशान घाट पर भी “10 मिनट से ज़्यादा रुकने की अनुमति नहीं दी गई थी।”
हालाँकि, कुछ यूज़र्स ने हेमा मालिनी के पक्ष में भी तर्क दिए। एक व्यक्ति ने लिखा: “धर्मेंद्र अब नहीं रहे। अब पुराने परिवार से जुड़ने के लिए कुछ नहीं बचा। अगर कोई ड्रामा खड़ा करता तो उन्हें ही दुख होता। उनका अंतिम रस्मों में न जाना सही था।” इस टिप्पणी ने यह संकेत दिया कि हेमा मालिनी ने शायद शांति और आत्म-सम्मान बनाए रखने के लिए ख़ुद को अलग रखा।
IV. दो पत्नियों के बीच का आजीवन संघर्ष
यह पूरा विवाद एक बार फिर धर्मेन्द्र के आजीवन संघर्ष को सामने लाता है—एक सफल करियर और दो समानांतर परिवारों को संभालने का संघर्ष। नेटिज़न्स के एक तबके ने हेमा मालिनी को भी उनके शुरुआती जीवन के फ़ैसलों के लिए निशाना बनाया: “जो कुछ भी हो पर आपने धर्मेंद्र जी की पहली वाइफ (प्रकाश कौर) को बहुत दर्द दिया है।”
इन सारे आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच, यह स्पष्ट है कि धर्मेन्द्र के जाने के बाद, उनके दो परिवारों के बीच की दूरी सार्वजनिक रूप से और बढ़ गई है। दो अलग-अलग प्रार्थना सभाएँ केवल दो अलग-अलग आयोजनों से कहीं ज़्यादा हैं; वे इस बात का प्रतीक हैं कि देओल परिवार आज भी भावनात्मक और वैचारिक रूप से विभाजित है।
V. निष्कर्ष: रिश्तों पर भारी पड़ी शोहरत
धर्मेन्द्र ने भले ही पर्दे पर ‘यादों की बारात’ और ‘शोले’ जैसे रिश्ते निभाए हों, लेकिन उनके निजी जीवन के रिश्ते अंतिम क्षणों में भी अधूरे ही रहे। सन्नी और बॉबी का कृत्य—भले ही वह पहली पत्नी के प्रति वफ़ादारी का प्रतीक हो—ईशा और अहाना को दरकिनार करने के कारण एक असंवेदनशील और विघटनकारी कदम माना गया है। यह घटना बॉलीवुड के उन कड़वे सचों को उजागर करती है जहाँ शोहरत, दौलत और पारिवारिक दायित्वों के बीच सामंजस्य बिठाना असंभव हो जाता है। सबकी निगाहें अब ₹450 करोड़ की संपत्ति के बँटवारे पर हैं, यह देखने के लिए कि क्या क़ानून और सन्नी देओल का कथित हस्तक्षेप इस विभाजनकारी स्थिति में कुछ न्याय और शांति ला पाएगा।
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