शीर्षक: “वर्दी, सब्जी और न्याय का तराजू”

अध्याय १: बाज़ार का अपमान

शहर के मुख्य बाज़ार में दोपहर की गहमागहमी थी। लोग ताज़ी सब्जियों के लिए मोलभाव कर रहे थे। वहीं सड़क के किनारे एक छोटी सी रेहड़ी पर ३२ वर्षीय आकाश बैठा था। पुराना कुर्ता, पसीने से लथपथ चेहरा और हाथों में तराजू—आकाश एक साधारण सब्जी वाला दिखता था। लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी शांति थी जो गरीबी में अक्सर खो जाती है।

तभी, सायरन बजाती एक पुलिस जीप वहां आकर रुकी। जीप से इंस्पेक्टर स्वाति उतरीं। खाकी वर्दी, चेहरे पर सत्ता का घमंड और आँखों में नफरत। स्वाति और आकाश का रिश्ता ५ साल पहले टूट चुका था। स्वाति को हमेशा से ऊंचे ओहदे और पैसे की भूख थी, जबकि आकाश सादगी पसंद था।

स्वाति ने अपनी छड़ी से आकाश की रेहड़ी के टमाटर गिरा दिए। “यहाँ अतिक्रमण करना मना है, तुम्हें समझ नहीं आता?” स्वाति ने कड़क आवाज़ में पूछा।

आकाश ने शांत स्वर में कहा, “इंस्पेक्टर साहिबा, मैं अपनी सीमा में हूँ। और सब्जी बेचना कोई अपराध नहीं है।”

स्वाति को उसका यह जवाब ‘अहंकार’ लगा। उसने सबके सामने आकाश को एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया। “एक मामूली सब्जी वाले की इतनी हिम्मत कि इंस्पेक्टर को कानून सिखाए? इसे थाने ले चलो!”

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अध्याय २: थाने की कालकोठरी और अतीत की यादें

थाने के लॉकअप में आकाश खामोश बैठा था। स्वाति अपने केबिन में बैठी पुरानी बातें याद कर रही थी। उसे याद आया कि कैसे उसने आकाश को सिर्फ इसलिए तलाक दिया था क्योंकि वह एक ‘असफल’ व्यक्ति था जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा रहता था। स्वाति को लगा कि वह जीत गई है, उसने आकाश को उसकी ‘औकात’ दिखा दी है।

उसने सिपाहियों को आदेश दिया, “इसे रात भर पानी मत देना। इसे पता चलना चाहिए कि सत्ता से टकराने का अंजाम क्या होता है।”

आकाश ने जेल की सलाखों के पीछे से स्वाति को देखा और मन ही मन मुस्कुराया। वह दर्द में नहीं था, वह तो बस उस ‘सिस्टम’ को देख रहा था जिसे सुधारने का उसने संकल्प लिया था।


अध्याय ३: कमिश्नर का औचक निरीक्षण (नया विस्तार)

अगली सुबह, पूरे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिली थी कि राज्य के नए विशेष जांच अधिकारी (Special Investigation Officer) शहर में ‘अंडरकवर’ (गुप्त रूप से) घूम रहे हैं ताकि भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन की जांच कर सकें।

स्वाति ने आनन-फानन में थाना साफ करवाया। उसे डर था कि कहीं कोई कमी न रह जाए। तभी, मुख्यालय से एक फैक्स आया जिसमें लिखा था कि ‘एस.आई.ओ.’ (SIO) लापता हैं और अंतिम बार उन्हें शहर के बाज़ार इलाके में देखा गया था।

स्वाति का माथा ठनका। उसे उस ‘सब्जी वाले’ की याद आई। “नहीं, वह तो बस आकाश है… वह इतना बड़ा अधिकारी कैसे हो सकता है?” उसने खुद को दिलासा दिया।


अध्याय ४: “मैं हूँ आकाश मेहरा, आईपीएस”

तभी थाने के द्वार पर तीन काली गाड़ियाँ रुकीं। जिले के पुलिस कमिश्नर खुद गाड़ी से नीचे उतरे और सीधे लॉकअप की ओर भागे। उनके पीछे कई वरिष्ठ अधिकारी थे।

स्वाति घबराकर बाहर आई। “सर, आप यहाँ? मैंने सब ठीक कर दिया है।”

कमिश्नर ने उसे धक्का देते हुए कहा, “हटिए इंस्पेक्टर! आपने किस अधिकार से उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया?”

जैसे ही लॉकअप खुला, आकाश बाहर आया। लेकिन अब वह झुका हुआ नहीं था। कमिश्नर ने उसे ‘सैल्यूट’ किया। “सर, हमें माफ कर दीजिए। हमें नहीं पता था कि आप खुद बाज़ार में सर्वेक्षण कर रहे हैं।”

आकाश ने अपनी जेब से अपना ‘प्रोफेशनल आईडी’ निकाला। “आकाश मेहरा, आईपीएस (IPS), विशेष जांच विभाग।”

स्वाति के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह आदमी जिसे उसने ‘गरीब सब्जी वाला’ समझकर थप्पड़ मारा था, वह न केवल उसका पूर्व पति था, बल्कि उसका सबसे बड़ा ‘बॉस’ था।


अध्याय ५: न्याय का कोड़ा (नया अध्याय)

आकाश ने कमिश्नर की मेज पर अपनी रिपोर्ट रखी। “इंस्पेक्टर स्वाति सिंह, आपने कल एक नागरिक पर हाथ उठाया, उसकी संपत्ति का नुकसान किया और उसे बिना किसी ठोस कारण के जेल में रखा। आपने खाकी वर्दी का उपयोग अपनी व्यक्तिगत खुन्नस निकालने के लिए किया।”

स्वाति रोने लगी। “आकाश, मुझे माफ कर दो। मुझे नहीं पता था कि तुमने यूपीएससी (UPSC) क्लियर कर लिया है। मैं वापस आना चाहती हूँ।”

आकाश ने ठंडी आवाज़ में कहा, “आप वापस मेरे जीवन में नहीं, बल्कि कानून की पकड़ में आ रही हैं। जो औरत एक गरीब सब्जी वाले का सम्मान नहीं कर सकती, वह एक वर्दी पहनने के लायक नहीं है।”

आकाश ने तुरंत स्वाति के निलंबन (Suspension) और उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए। उसने उन सिपाहियों को भी दंडित किया जिन्होंने उसके आदेश पर आकाश को प्रताड़ित किया था।


अध्याय ६: सब्जी वालों का मसीहा (नया अध्याय)

आकाश ने अपनी पोस्टिंग के पहले हफ्ते में ही एक नया नियम लागू किया— ‘स्ट्रीट वेंडर्स प्रोटेक्शन एक्ट’ का सख्ती से पालन। उसने शहर के सभी सब्जी वालों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए एक विशेष हेल्पलाइन शुरू की ताकि पुलिस उन्हें परेशान न कर सके।

वह आज भी कभी-कभी सादे कपड़ों में बाज़ार जाता है, लेकिन अब वह सब्जी नहीं बेचता, वह यह देखता है कि कोई और ‘आकाश’ किसी ‘स्वाति’ के अहंकार की बलि न चढ़ जाए।

स्वाति की वर्दी छीन ली गई। वह अब उसी बाज़ार से गुजरती है जहाँ कभी उसने आकाश को अपमानित किया था। अब लोग उसे ‘भ्रष्ट इंस्पेक्टर’ के नाम से जानते हैं। यह वक्त का सबसे बड़ा न्याय था।


अध्याय ७: अंतिम मुलाकात और संदेश (नया अध्याय)

महीनों बाद, आकाश अपने दफ्तर में बैठा था। स्वाति उससे मिलने आई, इस बार वह साधारण कपड़ों में थी। उसने पूछा, “तुमने सब्जी बेचने का नाटक क्यों किया? तुम सीधे ऑफिसर बनकर आ सकते थे।”

आकाश ने मुस्कुराकर कहा, “अगर मैं ऑफिसर बनकर आता, तो मुझे तुम्हारी ‘चाटुकारिता’ दिखती, तुम्हारी ‘असलियत’ नहीं। ज़मीन पर बैठकर ही पता चलता है कि आसमान में उड़ने वाले कितने क्रूर हो सकते हैं।”

आकाश ने उसे एक सीख दी— “सत्ता सेवा के लिए होती है, शोषण के लिए नहीं।”

निष्कर्ष: मानवता की जीत

यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी की गरीबी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। वक्त बदलते देर नहीं लगती। जो आज नीचे है, वह कल शिखर पर हो सकता है। असली ताकत वर्दी या ओहदे में नहीं, बल्कि उस चरित्र में है जो दूसरों का सम्मान करना जानता है।

न्याय की चक्की भले ही धीरे चलती है, लेकिन वह बहुत बारीक पीसती है।


समाप्त