अग्निपरीक्षा: जब पत्नी बनी पति की तकदीर
अध्याय 1: सादगी भरा मिलन और छोटे सपने
रवि और सीमा की मुलाकात किसी फिल्म के दृश्य जैसी नहीं थी। एक साधारण पारिवारिक समारोह में रवि ने पहली बार सीमा को देखा था। वह भीड़ से दूर, शांत स्वभाव की लड़की थी। रवि को उसकी उसी सादगी से प्रेम हो गया। परिवारों की सहमति से दोनों का विवाह हुआ और एक छोटे से किराए के घर में उनकी गृहस्थी शुरू हुई।
रवि एक निजी दफ्तर में अकाउंट असिस्टेंट था। उसकी तनख्वाह बहुत कम थी, लेकिन सीमा ने कभी शिकायत नहीं की। वे दोनों भविष्य के छोटे-छोटे सपने बुनते—एक छोटी सी बाइक लेना, सीमा की अधूरी पढ़ाई पूरी करना और साल में एक बार कहीं घूमने जाना। उनके जीवन की गाड़ी पटरी पर दौड़ रही थी, पर वे नहीं जानते थे कि आगे एक बहुत बड़ा मोड़ आने वाला है।
अध्याय 2: वह काली रात और जिंदगी का ठहराव
विवाह के दो साल बाद, एक बरसात की रात रवि ऑफिस से घर लौट रहा था। अचानक एक अनियंत्रित ट्रक ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। रवि लहूलुहान होकर सड़क पर पड़ा रहा। जब अस्पताल में सीमा ने उसे देखा, तो उसका पूरा संसार उजड़ता हुआ प्रतीत हुआ। डॉक्टरों ने जाँच के बाद जो कहा, वह किसी बिजली गिरने से कम नहीं था—रवि की रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) में गंभीर चोट आई थी। वह अब शायद कभी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाएगा।
रवि घर तो आ गया, लेकिन बिस्तर पर। वह आदमी जो पूरे घर का बोझ उठाता था, अब खुद एक बोझ महसूस करने लगा। ऑफिस ने कुछ महीनों बाद उसे नौकरी से निकाल दिया। रिश्तेदार जो शादी में साथ थे, अब धीरे-धीरे कतराने लगे। उधार का पहाड़ बढ़ता जा रहा था और घर में राशन के लाले पड़ गए थे।
अध्याय 3: सीमा का संकल्प और टिफिन सर्विस की शुरुआत
रवि अवसाद (Depression) में डूबने लगा। वह अक्सर चिड़चिड़ा हो जाता और सीमा से कहता, “तुम मुझे छोड़ क्यों नहीं देती? मेरी वजह से तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो रही है।” सीमा उसकी बातें सुनती, रोती, पर उसका हाथ कभी नहीं छोड़ती। उसने ठान लिया था कि वह अपने पति को इस लाचारी से बाहर निकालेगी।
सीमा ने अपने स्वाद के जादू को हथियार बनाया। उसने घर से ‘टिफिन सर्विस’ शुरू की। सुबह 4 बजे उठकर वह खाना बनाती और खुद साइकिल पर जाकर पास के ऑफिसों में टिफिन पहुँचाती। शुरू में केवल दो ग्राहक थे, लेकिन सीमा की मेहनत और खाने के घर जैसे स्वाद ने धीरे-धीरे लोगों का दिल जीत लिया।

अध्याय 4: संघर्ष से सफलता तक का सफर
देखते ही देखते सीमा के ग्राहकों की संख्या 50 के पार पहुँच गई। उसने मोहल्ले की तीन अन्य जरूरतमंद महिलाओं को भी काम पर रखा। अब वह केवल एक पत्नी नहीं, बल्कि एक उद्यमी बन चुकी थी। उसने अपनी बचत का एक-एक पैसा रवि के इलाज और फिजियोथेरेपी में लगा दिया।
वह हर रात थककर चूर हो जाती, लेकिन सोने से पहले रवि के पैरों की मालिश करना और उसे हिम्मत देना नहीं भूलती थी। रवि ने देखा कि उसकी पत्नी उसके लिए एक ढाल बनकर खड़ी है। धीरे-धीरे रवि के भीतर भी जीने की इच्छा जागी। उसने बिस्तर पर बैठे-बैठे ही सीमा के काम का हिसाब-किताब (Accounting) संभालना शुरू कर दिया।
अध्याय 5: चमत्कार और नई सुबह
इलाज और सीमा के अटूट विश्वास ने असर दिखाना शुरू किया। तीन साल के कड़े संघर्ष के बाद, एक सुबह रवि ने बिना किसी सहारे के बिस्तर से उठने की कोशिश की। उसके पैर कांप रहे थे, लेकिन वह खड़ा हो गया। सीमा की आँखों से खुशी के आंसू बह निकले। यह उसकी जीत थी।
कुछ ही महीनों में रवि लाठी के सहारे चलने लगा और फिर पूरी तरह सामान्य हो गया। सीमा का छोटा सा टिफिन का काम अब ‘सीमा होम मील एंड किचन सर्विसेज’ के नाम से एक बड़ी कैटरिंग कंपनी बन चुका था। रवि अब उस कंपनी का पूरा फाइनेंस देखता है।
उपसंहार: साथ का असली मतलब
आज रवि और सीमा के पास अपनी कार है, अपना घर है और एक प्यारी सी बेटी ‘आरुष’ है। रवि हमेशा कहता है, “उस दुर्घटना ने मेरे पैर छीन लिए थे, लेकिन सीमा ने मुझे उड़ने के लिए पंख दिए।”
यह कहानी हमें सिखाती है कि रिश्ता केवल अच्छे समय में साथ निभाने का नाम नहीं है। असली जीवनसाथी वह है जो आपकी सबसे बड़ी कमजोरी में आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाए।
सीख: कठिन समय में धैर्य और अपनों का साथ ही वह चाबी है जो बंद किस्मत के ताले खोल सकती है। कभी हार मत मानिए, क्योंकि हर रात के बाद एक सुनहरी सुबह जरूर आती है।
News
“5 साल बाद जब IPS पत्नी झोपड़ी लौटी, तो सामने खड़ा सच उसे तोड़ गया… फिर जो हुआ
झोपड़ी का प्यार, वर्दी का अहंकार और 5 साल बाद का खौफनाक सच: रमेश और आईपीएस रश्मि की झकझोर देने…
अमीर लड़की की ज़िद और भिखारी के आँसू: बीच सड़क पर जब लड़की ने भिखारी को गले लगाया, तो रो पड़ा पूरा देश।
इंसानियत की जीत: जब एक भिखारी बना करोड़ों के ट्रस्ट का चेयरमैन प्रस्तावना: दिल्ली की एक ठंडी शाम और किस्मत…
गरीब लड़के ने करोड़पति लड़की की जान बचाई… फिर लड़की ने जो किया, इंसानियत रो पड़ी 😢
इंसानियत की कोई कीमत नहीं: जब एक गरीब लड़के ने बचाई करोड़पति की जान प्रस्तावना: दिल्ली की एक खामोश रात…
जिस पागल को लोग पत्थर मारते थे, उसकी झोपड़ी के सामने रुकीं 50 लाल बत्ती की गाड़ियां 😱
पागल मास्टर: कचरे से निकले हीरों और एक गुरु के बलिदान की अमर गाथा प्रस्तावना: एक अनजाना मसीहा और समाज…
कल तक जिसकी कोई कीमत नहीं थी… आज वही करोड़ों की मालकिन के सामने खड़ा था—अंजाम सुनकर रो पड़ोगे।
झोपड़ी से दिल के महल तक: राजू और प्रिया की एक अनकही दास्तान प्रस्तावना: लखनऊ की पटरियाँ और एक अनजाना…
जिस पति ने कुली बनकर पत्नी को पढ़ाया, उसी ने TT बनते ही पहचानने से मना कर दिया; फिर जो हुआ!
पसीने की कमाई और वर्दी का अहंकार: जब कुली पति को पहचानने से मुकर गई टीटी पत्नी प्रस्तावना: स्टेशन की…
End of content
No more pages to load






