‘ही मैन’ धर्मेंद्र की अधूरी ख्वाहिश: टूटी वो माला, बिखर गए मोती—अब कभी एक नहीं होंगे देओल परिवार के दोनों घर!

अपने दोनों परिवारों को एक छत के नीचे लाने की थी एक्टर की अंतिम इच्छा, बेटे सनी देओल ने बेटे की शादी में भी हेमा को नहीं बुलाया; आज ऊपर से देखते होंगे ‘धरम’

मुंबई: बॉलीवुड के ‘ही मैन’ धर्मेंद्र ने अपनी पूरी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी। एक छोटे से गांव के पिंड से निकलकर उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म ‘शहीद’ देखकर स्टार बनने का फैसला किया और बाकी सब इतिहास है। उन्होंने क़रीब 340 फिल्मों में काम किया, हर जॉनर में खुद को साबित किया, और करोड़ों दिलों को जीता। उन्होंने अपने प्यार को भी पाया, अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर को भी सम्मान दिया, और दो-दो परिवार पाले।

लेकिन, जीवन की हर कसौटी पर खरे उतरने वाला यह महान शख्स एक मोर्चे पर विफल हो गया—वह था अपने पूरे परिवार को एकजुट करना

धर्मेंद्र की सबसे बड़ी जद्दोजहद यही रही कि उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर का परिवार (सनी देओलबॉबी देओल) और दूसरी पत्नी हेमा मालिनी का परिवार (ईशा देओलआहाना देओल) एक साथ एक छत के नीचे आ जाए। मगर, लाख कोशिशों के बावजूद यह हो न सका। धर्मेंद्र दोनों परिवारों के बीच ‘पुल’ (Bridge) का काम करते रहे, लेकिन चाहकर भी इस खाई को पूरी तरह से भर नहीं पाए।

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जीते जी और मौत के बाद भी अधूरी रही ख्वाहिश

धर्मेंद्र की अधूरी ख्वाहिश के कई बड़े उदाहरण उनके जीवन में देखने को मिले, जो बताते हैं कि परिवार के बीच की दूरियां कितनी गहरी थीं:

ईशा देओल की शादी: जब धर्मेंद्र ने अपनी बेटी ईशा मालिनी (हेमा मालिनी की बेटी) का कन्यादान किया, तब उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल शादी में नहीं पहुँचे। सारी रस्मों को धर्मेंद्र के भतीजे अभय देओल ने पूरा किया। धर्मेंद्र को इस बात का गहरा अफ़सोस रहा कि वह अपनी बेटियों की शादी में भी पूरे परिवार को एक साथ नहीं देख पाए। यह गम उन्हें आखिरी वक्त तक रहा।

करण देओल की शादी में हेमा को न बुलाना: सबसे बड़ा झटका तब लगा जब सनी देओल ने अपने बेटे करण देओल की शादी में अपनी सौतेली माँ हेमा मालिनी और उनकी बेटियों को आमंत्रित नहीं किया। यह बात धर्मेंद्र को बहुत चुभी। सोशल मीडिया पर उन्होंने माफ़ी भी माँगी और अफ़सोस ज़ाहिर किया कि वह काश हेमा और अपने दामादों को बुला पाते। उन्होंने अपने दामादों से भी सॉरी कहा था।

धर्मेंद्र चाहते थे कि उनके सामने पूरा परिवार एक साथ हो। उनकी यह इच्छा जीते जी तो पूरी नहीं हो पाई, लेकिन दुःख की बात यह है कि उनके जाने के बाद भी यह इच्छा पूरी नहीं हुई है।

टूटी माला, बिखर गए मोती: अंतिम संस्कार ने खोली आँखें

आज जब धर्मेंद्र ऊपर से यह सब देखते होंगे, तो उन्हें ज़रूर दुःख होता होगा। उनकी प्रार्थना सभा (प्रेयर मीट) और तेरहवीं की तैयारियाँ चल रही हैं, लेकिन उनकी दूसरी पत्नी हेमा मालिनी और बेटियाँ चाहकर भी उनके पास भटक नहीं पा रही हैं।

परिवार की मुखिया प्रकाश कौर के साथ सनी देओल के घर पर पूरा बॉलीवुड और राजनीतिक हस्तियाँ इकट्ठा हो रही हैं, जहाँ सनी और बॉबी सम्मान प्राप्त कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, हेमा मालिनी आज अपने घर में अकेली और तन्हा धर्मेंद्र को याद कर रही हैं।

हेमा की तन्हाई: हेमा मालिनी अपने घर में आयोजित प्रार्थना सभा में बिलकुल टूटी हुई और अकेली दिखीं। ऐसा लग रहा है जैसे उनके जाने के बाद उनका कोई बचा ही नहीं। उन्हें सांत्वना देने के लिए भी मुट्ठी भर लोग ही पहुंचे, जबकि ज़्यादातर सेलिब्रिटी सनी देओल के घर पर अपना समर्थन दिखाने पहुँचे।

सम्मान से वंचना: हेमा मालिनी चाहकर भी धर्मेंद्र को नज़दीक से जाकर देख नहीं पाईं और न ही उनके जाने के बाद उनके घर में आने वाले मेहमानों को रिसीव कर पाईं। उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वह हकदार थीं।

इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि धर्मेंद्र के जाने के बाद उनका सगा और सौतेला परिवार पूरी तरह से टूट चुका है। उनके बीच संबंधों की डोरियाँ लगभग टूट चुकी हैं।

धर्मेंद्र: वो मोती जिसने परिवार को पिरोए रखा

धर्मेंद्र अपने आप में एक माला थे, एक मोती थे, जो अपने पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरो कर रखते थे। उनके इस पुल (Bridge) के टूटते ही, सगे और सौतेले परिवार अलग हो गए हैं।

राजनीति और बॉलीवुड में इतनी ऊँचाई पाने के बावजूद, धर्मेंद्र की सबसे बड़ी विफलता परिवार को एक न कर पाना ही रहा। आज यह दुःखद निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि धर्मेंद्र के ये दो परिवार शायद ही कभी एक हो पाएँगे, क्योंकि उन्हें जोड़ने वाला मोती ही आज इस दुनिया से गायब हो चुका है।

उनकी मौत के बाद धर्मेंद्र की अधूरी ख्वाहिश अब देओल परिवार के लिए एक असहनीय गम बन गई है। परिवार का यह बिखराव, बॉलीवुड और उनके प्रशंसकों के लिए एक कड़वा राजनीतिक और सामाजिक सच है।