Dưới đây là bài báo chi tiết, kịch tính và đầy cảm xúc được viết bằng tiếng Hindi, dựa trên câu chuyện về sự đoàn tụ bất ngờ của gia đình Deol sau sự ra đi của huyền thoại Dharmendra.


धर्मेंद्र के निधन के बाद सनी देओल का बड़ा कदम: 45 साल पुरानी नफरत खत्म, आधी रात को हेमा मालिनी के बंगले ‘अद्वैत’ पहुंचने का असली सच!

मुंबई: बॉलीवुड के इतिहास में कुछ तारीखें हमेशा के लिए काले अक्षरों में दर्ज हो जाती हैं। 24 नवंबर 2025—यह वह काला दिन था जब भारत ने अपने चहेते ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र जी को खो दिया। लेकिन इस दुखद घटना के बाद मुंबई की एक अंधेरी रात में जो कुछ हुआ, उसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया। क्या 450 करोड़ की जायदाद के लिए सनी देओल ने अपनी सौतेली मां के घर का दरवाजा खटखटाया? या फिर 40 साल पुरानी नफरत की दीवार ढह चुकी थी?

1. 45 साल की खामोश जंग और कड़वाहट

हेमा मालिनी और सनी देओल के परिवार के बीच की दरार कोई नई नहीं थी। इसकी शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, जब धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के प्यार के किस्से अखबारों की सुर्खियां बने। धर्मेंद्र उस वक्त शादीशुदा थे और चार बच्चों के पिता थे। जब उन्होंने 1980 में अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर को तलाक दिए बिना, धर्म बदलकर हेमा मालिनी से निकाह किया, तो सनी देओल के मन में एक गहरा घाव बन गया। सनी ने हमेशा अपनी मां के आंसू देखे थे, और यही वजह थी कि उन्होंने 45 सालों तक हेमा मालिनी और उनकी बेटियों, ईशा और अहाना से एक सम्मानजनक दूरी बनाए रखी।

.

.

.

2. वो ‘काली अंधेरी रात’ और ‘अद्वैत’ का दरवाजा

धर्मेंद्र के निधन के बाद, जब पूरी दुनिया यह सोच रही थी कि अब जायदाद को लेकर महाभारत होगी, तभी सनी देओल ने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। रात के सन्नाटे में, सनी देओल बिना किसी लाव-लश्कर के हेमा मालिनी के बंगले ‘अद्वैत’ पहुंचे।

हैरानी की बात यह थी कि उनके साथ गाड़ी में ईशा देओल के पूर्व पति, भरत तख्तानी भी मौजूद थे। जिस दामाद का रिश्ता ईशा से कानूनी तौर पर टूट चुका है, उसका सनी के साथ होना यह दर्शाता है कि दुख की इस घड़ी में सनी आज भी ईशा के बड़े भाई और रक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।

3. बंद कमरे के भीतर क्या हुआ?

सूत्रों के मुताबिक, घर के अंदर का माहौल बेहद भावुक था। अद्वैत का वही बड़ा डांस हॉल, जहां कभी हेमा जी रियाज करती थीं और जहां धर्मेंद्र जी की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी हैं, वहां सनी देओल ने अपनी सौतेली मां और बहनों के आंसू पोंछे। यह मुलाकात सिर्फ संपत्ति या रस्मों तक सीमित नहीं थी; यह एक बेटे द्वारा अपने पिता को दिया गया सबसे बड़ा सम्मान था। सनी वहां यह कहने गए थे— “मां, मैं हूं।”

4. 450 करोड़ की जायदाद और बंटवारे का सच

धर्मेंद्र जी अपने पीछे एक विशाल साम्राज्य छोड़ गए हैं—जूहू के आलीशान बंगले, लोनावला का 100 एकड़ का फार्म हाउस, विंटेज गाड़ियों का कलेक्शन और करोड़ों का रेस्टोरेंट बिजनेस। कानूनी तौर पर हेमा मालिनी का पक्ष कमजोर हो सकता था क्योंकि प्रकाश कौर को कभी तलाक नहीं मिला था। लेकिन सनी देओल ने साफ कर दिया है कि उनके परिवार में कोई ‘ड्रामा’ या ‘कोर्ट-कचहरी’ नहीं होगी। ईशा और अहाना को उनका पूरा हक और सम्मान मिलेगा। सनी ने साबित कर दिया कि उनका दिल भी उनके पिता की तरह विशाल है।

5. एक युग का अंत और नए रिश्तों की शुरुआत

धर्मेंद्र पाजी सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वह एक संस्कार थे। उन्होंने दो परिवारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में अपनी पूरी जिंदगी बिता दी। उनकी मौत ने शायद उस आखिरी कड़ी को तोड़ दिया था जो परिवार को जोड़ती थी, लेकिन सनी देओल ने उस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठा लिया है। आज सनी देओल सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं, बल्कि पूरे देओल खानदान के नए ‘वटवृक्ष’ बन गए हैं, जिनकी छांव में ईशा और अहाना भी उतनी ही सुरक्षित हैं जितने करण और राजवीर।

निष्कर्ष: रिश्तों की जीत

बॉलीवुड में जहां अक्सर जायदाद के लिए परिवार बिखर जाते हैं, वहां देओल परिवार की यह कहानी एक नई उम्मीद है। 450 करोड़ की दौलत तो आती-जाती रहेगी, लेकिन उस रात सनी देओल ने जो कमाया—अपनी बहनों का प्यार और सौतेली मां का आशीर्वाद—वह अनमोल है।

धर्मेंद्र जी की आत्मा को शांति मिले, जिन्होंने न केवल फिल्में दीं, बल्कि एक ऐसा परिवार भी पीछे छोड़ा जिसने नफरत पर प्यार की जीत साबित कर दी।