लालच का नरक: विजयनगर का खूनी राज
अध्याय 1: सन्नाटा और बेजुबान का विलाप
कर्नाटक के विजयनगर जिले का कोटू टूर कस्बा आमतौर पर शांत रहता है। यहाँ की एलवी कॉलोनी में मध्यम वर्गीय परिवार रहते हैं, जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता है। लेकिन जनवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में इस कॉलोनी के एक घर से आने वाली आवाजों ने पड़ोसियों की रातों की नींद उड़ा दी थी। वह चीखें किसी इंसान की नहीं थीं, बल्कि भीमराज के पालतू कुत्ते की थीं।
कुत्ता भौंक नहीं रहा था। वह रो रहा था। उसकी लंबी और दर्दनाक सिसकियाँ हवा में तैरती थीं। जब पुलिस की टीम, मजिस्ट्रेट और मजदूर उस घर के सामने पहुँचे, तो फिजा में एक अजीब सी भारीपन थी।
जब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तो कुत्ता शांत नहीं हुआ। वह कमरे के एक कोने में बैठकर फर्श को टकटकी लगाकर देख रहा था और उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने गौर किया कि कुत्ता न तो खाना खा रहा था और न ही किसी पर हमला कर रहा था। वह बस उस फर्श की ओर इशारा कर रहा था जहाँ मौत का रहस्य दफन था।
अध्याय 2: अक्षय कुमार का बुना हुआ जाल
कहानी की शुरुआत 24 साल के अक्षय कुमार से होती है। अक्षय दिखने में एक साधारण युवक था, लेकिन उसके भीतर एक खतरनाक साजिश पक रही थी। वह बेंगलुरु के तिलक नगर थाने पहुँचता है। उसके चेहरे पर पसीना था, हाथ कांप रहे थे और आँखों में (बनावटी) डर था।
“साहब, मेरे माता-पिता और बहन गायब हैं!” वह चिल्लाया। उसने पुलिस को बताया कि उसके पिता भीमराज (52), माँ जय लक्ष्मी (50) और बहन अमृता (17) बेंगलुरु के जयदेव अस्पताल में इलाज कराने आए थे और उसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिला।
तिलक नगर पुलिस ने जब अस्पताल में छानबीन की, तो पता चला कि उस नाम का कोई मरीज वहां आया ही नहीं था। अक्षय ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए चार मोबाइल नंबर दिए—अपना, पिता का, माँ का और बहन का। उसने सोचा कि पुलिस इन नंबरों को ढूंढेगी और मामला उलझ जाएगा।
अध्याय 3: तकनीक की पकड़ और सर्विलांस का सच
पुलिस ने जब चारों नंबरों की सीडीआर (Call Detail Record) निकाली और लोकेशन ट्रैक की, तो अक्षय की कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। चारों मोबाइलों की लोकेशन एक साथ घर से निकली थी, लेकिन तीन मोबाइल अचानक एक ही जगह बंद हो गए, जबकि अक्षय का फोन चालू रहा।
पुलिस ने अक्षय को हिरासत में लिया। “अक्षय, अगर वे अस्पताल गए थे, तो उनके फोन घर की लोकेशन पर ही क्यों बंद हुए?” पुलिस के इस एक सवाल ने अक्षय को हिलाकर रख दिया। वह पहले तो अपनी बातों में उलझा, फिर उसने एक झूठी कहानी गढ़ी कि उसने अपनी बहन की ‘ऑनर किलिंग’ कर दी है क्योंकि वह किसी गैर समुदाय के लड़के के साथ गर्भवती थी।

उसने पुलिस को झील के पास ले जाकर गुमराह किया, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला। आखिरकार, जब पुलिस ने ‘थर्ड डिग्री’ का हल्का सा इशारा किया, तो अक्षय टूट गया और उसने वह सच उगला जिसने विजयनगर को हिला दिया।
अध्याय 4: वह खूनी रात – 26 जनवरी 2026
26 जनवरी, जब पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, अक्षय के दिमाग में मौत का तांडव चल रहा था। उसका असली मकसद नफरत नहीं, बल्कि ‘लालच’ था। उसके पिता भीमराज ने हाल ही में अपना पुराना मकान 1 करोड़ 20 लाख रुपये में बेचा था। भीमराज ने 50 लाख रुपये अपनी बेटी अमृता की पढ़ाई के लिए एफडी कर दिए थे और अक्षय को एक फूटी कौड़ी देने से मना कर दिया था क्योंकि अक्षय नशेड़ी और लापरवाह था।
उस दोपहर, अक्षय ने सबसे पहले अपनी माँ जय लक्ष्मी पर हमला किया। उसने चाकू से अपनी माँ पर ताबड़तोड़ वार किए। माँ की मौत के बाद उसने चैन से स्नान किया, कपड़े बदले और सबूत मिटाए।
शाम को जब 17 साल की अमृता घर लौटी, तो अक्षय ने उसे एक ‘सरप्राइज गिफ्ट’ देने के बहाने कमरे में बुलाया। अमृता की आँखें बंद की गईं और जैसे ही उसने आँखें खोलीं, उसके सामने उसकी माँ की लाश थी। अमृता चीख पाती, उससे पहले ही अक्षय ने उसका गला रेत दिया।
रात 10:30 बजे, पिता भीमराज टीवी देख रहे थे। उन्हें खबर भी नहीं थी कि उनका बेटा एक जल्लाद बन चुका है। अक्षय ने अपने पिता की भी बेरहमी से हत्या कर दी।
अध्याय 5: लाशों का ठिकाना और कटर मशीन का खेल
27 जनवरी की सुबह, अक्षय बाजार गया। वह वहां से एक ग्राइंडर और कटर मशीन खरीद कर लाया। उसने अपने ही घर के एक कमरे की टाइल्स को बड़ी सावधानी से काटा। उसने एक गहरा गड्ढा खोदा और अपनी माँ, पिता और बहन की लाशों को वहां दफन कर दिया।
उसने सोचा कि टाइल्स को दोबारा ऊपर से लगाकर वह इसे हमेशा के लिए छुपा लेगा। लेकिन वह भूल गया था कि उसका पालतू कुत्ता सब देख रहा था। वह कुत्ता, जिसने अक्षय के हाथों अपने मालिकों को मरते देखा, वह उस दिन से रोने लगा।
अध्याय 6: मजिस्ट्रेट के सामने खुदाई और सच का सामना
31 जनवरी 2026 की तारीख। पुलिस की टीम विजयनगर के उसी एलवी कॉलोनी वाले घर में थी। मजिस्ट्रेट के आदेश पर मजदूरों ने खुदाई शुरू की। जैसे-जैसे मिट्टी हट रही थी, कमरे में सड़ांध फैलने लगी।
“साहब, कुछ सफेद दिख रहा है!” एक मजदूर चिल्लाया। वह भीमराज का हाथ था। एक-एक करके तीनों लाशें बाहर निकाली गईं। पूरा मोहल्ला इस मंजर को देखकर सन्न था। वह कुत्ता, जो पिछले चार दिनों से भूखा-प्यासा था, अब शांत हो गया था जैसे उसे इंसाफ मिल गया हो।
अध्याय 7: पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और अंतिम सच
लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अक्षय ने जो कहानी सुनाई थी कि उसकी बहन प्रेग्नेंट थी, वह पूरी तरह झूठ निकली। अमृता के शरीर पर कोई सेक्सुअल असॉल्ट नहीं था और न ही वह गर्भवती थी। अक्षय ने यह कहानी केवल पुलिस की सहानुभूति पाने और अपनी हत्या को ‘भावना’ का रूप देने के लिए गढ़ी थी।
सच तो यह था कि उसे वे 1 करोड़ 20 लाख रुपये चाहिए थे। वह उन पैसों से ऐश करना चाहता था। इस साजिश में पुलिस को अक्षय के चाचा, बसंत कुमार की भूमिका भी संदिग्ध लगी, जिन्हें बाद में गिरफ्तार किया गया।
अध्याय 8: अक्षय कुमार – एक सोशियोपैथ का अंत
जांच में पता चला कि अक्षय ने इस कत्ल की योजना बनाने के लिए कई क्राइम फिल्में और वेब सीरीज देखी थीं। उसने ‘होमवर्क’ किया था कि कैसे खून के धब्बों को साफ किया जाए और कैसे लाश को दफन किया जाए कि बदबू न आए। लेकिन वह पुलिस की सर्विलांस तकनीक और एक बेजुबान जानवर की वफादारी को नहीं समझ सका।
आज अक्षय कुमार जेल की सलाखों के पीछे है। वह लड़का जिसने अपने ही खून को मिट्टी में मिला दिया, अब खुद कानून के शिकंजे में है।
निष्कर्ष और जागरूकता संदेश
दोस्तों, उस्मान सैफी द्वारा बताई गई यह घटना हमें झकझोर देती है। यह हमें सिखाती है कि:
लालच का अंत: पैसा महत्वपूर्ण है, लेकिन रिश्तों से ऊपर नहीं। लालच इंसान को अंधा कर देता है।
बेजुबान की वफादारी: इंसान धोखा दे सकता है, लेकिन एक जानवर अपने मालिक के प्रति हमेशा वफादार रहता है।
अपराध कभी नहीं छुपता: आप कितनी भी प्लानिंग कर लें, कानून के लंबे हाथ और कुदरत का इंसाफ आपको ढूंढ ही लेता है।
अक्षय कुमार जैसे दरिंदों के लिए आप क्या सजा चाहेंगे? क्या ऐसे मामलों में केवल फांसी ही एकमात्र विकल्प है? अपनी राय हमें जरूर बताएं।
जाते-जाते, अरबाज शाह और अलन शेख को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आप सभी सुरक्षित रहें, जागरूक रहें।
जय हिंद, जय भारत।
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