मेरठ का ‘खूनी खेल’: फौजी पति, बेवफा पत्नी और वो 6 लाख की सुपारी – एक रोंगटे खड़े कर देने वाली मर्डर मिस्ट्री

मेरठ, उत्तर प्रदेश | विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

28 मार्च 2026 की वह सुबह मेरठ के इंचोली थाना क्षेत्र के धनपुर गांव के लिए आम दिनों की तरह ही शुरू हुई थी। पक्षी चहचहा रहे थे और गांव की गलियों में हल्की हलचल शुरू हो चुकी थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि एक घर के भीतर भारतीय सेना का एक जांबाज सिपाही अपनी आखिरी नींद सो चुका है—एक ऐसी नींद जिससे वह कभी जागने वाला नहीं था।

वह मनहूस दोपहर और मासूम की चीख

सुबह करीब 7:00 बजे प्रियंका (मृतक फौजी के छोटे भाई प्रदीप की पत्नी) अपने दोनों बच्चों, दक्ष और गोरा को डांट रही थी। वह बार-बार बच्चों से कह रही थी, “धीरे बोलो, तुम्हारे ताऊजी (नैन सिंह) फौजी हैं, वह थक कर आए हैं और सो रहे हैं। अगर उनकी नींद खुली और उन्हें गुस्सा आया, तो तुम्हारी पिटाई तय है।” मासूम बच्चे शांत हो गए। दोपहर करीब 2:00 बजे जब प्रियंका बच्चों के साथ मेरठ से खरीदारी कर वापस लौटी, तो घर में वही खामोशी पसरी थी। उसे लगा शायद फौजी अभी भी सो रहे हैं। उसने अपने बेटे दक्ष से कहा, “बेटा, जा अपने ताऊजी को जगा दे, दोपहर के दो बज चुके हैं।”

दक्ष जैसे ही कमरे के भीतर गया, उसकी एक ऐसी चीख निकली जिसने पूरे मोहल्ले को हिला कर रख दिया। कमरे का नजारा भयावह था। बिस्तर पर नैन सिंह (38 वर्ष) खून से लथपथ पड़े थे। उनके सिर में एक गहरे घाव से खून बहकर जम चुका था। 315 बोर के तमंचे से चली एक गोली ने उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी थी।

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कौन थे फौजी नैन सिंह?

नैन सिंह एक किसान परिवार के बड़े बेटे थे। उनके पिता गरीब दास मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। गरीब दास के तीन बेटे थे:

    नैन सिंह (बड़ा बेटा): बीएसएफ (BSF) की 78वीं बटालियन में मालदा, पश्चिम बंगाल में तैनात।

    प्रदीप सिंह (मझला बेटा): वह भी बीएसएफ में है और राजस्थान के जैसलमेर में तैनात है।

    जॉनी (छोटा भाई): मोदीनगर में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है।

नैन सिंह की शादी 2013 में कोमल नाम की महिला से हुई थी। उनके दो बच्चे थे—कक्षा 9 में पढ़ने वाली बेटी यशिका और कक्षा 7 में पढ़ने वाला बेटा। 27 मार्च की उस काली रात को घर में सिर्फ नैन सिंह और उनकी छोटी बहू प्रियंका मौजूद थे।

शुरुआती शक और पुरानी रंजिश का एंगल

जैसे ही पुलिस को सूचना मिली, एसएसपी समेत तमाम आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में नैन सिंह के पिता गरीब दास ने अपने पड़ोसी महेश और उसके तीन बेटों—प्रेम, शिवम और निशु पर हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस को बताया कि 1996 से जमीन का एक विवाद चल रहा था और हाल ही में होली के मौके पर महेश ने धमकी दी थी कि वह नैन सिंह को मार डालेगा।

पुलिस ने तुरंत चारों को हिरासत में लिया और सख्ती से पूछताछ की। लेकिन जैसे-जैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, मामला उलझता गया। डॉक्टरों के मुताबिक, नैन सिंह की हत्या 12 से 13 घंटे पहले हुई थी। इसका मतलब था कि हत्या रात के करीब 1:00 से 1:30 बजे के बीच हुई थी, जब प्रियंका घर में ही सो रही थी।

प्रियंका की गवाही: वो संदूक जैसी आवाज

पुलिस की सुई अब प्रियंका की ओर घूमी। वह उस रात घर में मौजूद एकमात्र वयस्क थी। पूछताछ में प्रियंका ने बताया, “साहब, रात करीब डेढ़ बजे मुझे एक आवाज सुनाई दी थी, जैसे किसी बड़े भारी संदूक को जोर से बंद किया गया हो। मैं जागी भी थी, लेकिन अंधेरा था और कुछ संदिग्ध न दिखने पर मैं वापस सो गई।”

पुलिस ने प्रियंका को भी संदेह के दायरे में रखा, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और बच्चों के बयानों ने उसे क्लीन चिट दे दी। सीसीटीवी में एक धुंधली परछाईं घर में दाखिल होती और बाहर निकलती दिखाई दी। यहीं से पुलिस को यकीन हो गया कि कातिल कोई बाहरी पेशेवर शूटर है, जिसे घर के किसी ‘भेदी’ ने रास्ता दिखाया है।

बेवफा पत्नी ‘कोमल’ और प्रेमी ‘गुलशन’ का खौफनाक गठजोड़

पुलिस ने अब फौजी की पत्नी कोमल की जानकारी जुटानी शुरू की। कोमल पिछले दो साल से ससुराल छोड़कर अपने मायके में रह रही थी। उसने आरोप लगाया था कि नैन सिंह शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता था। लेकिन जब पुलिस ने कोमल के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) निकाली, तो एक चौंकाने वाला नाम सामने आया—गुलशन

गुलशन कोई और नहीं, बल्कि नैन सिंह की अपनी सगी मौसी का लड़का था। जांच में पता चला कि जब नैन सिंह और कोमल के बीच झगड़े होते थे, तो गुलशन ‘सहारा’ देने के नाम पर कोमल के करीब आया। धीरे-धीरे यह सहानुभूति अवैध संबंधों में बदल गई। पिछले दो सालों से, जब नैन सिंह ड्यूटी पर होता था, कोमल और गुलशन होटलों और पार्कों में मिला करते थे।

6 लाख रुपये और 3 शूटर: हत्या की स्क्रिप्ट

6 मार्च 2026 को नैन सिंह छुट्टी पर घर आए थे। उन्हें 2 अप्रैल को वापस जाना था। कोमल और गुलशन को डर था कि अगर नैन सिंह वापस चला गया, तो उनका मिलना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, वे हमेशा के लिए साथ रहना चाहते थे। कोमल ने तय किया कि पति को रास्ते से हटाना ही एकमात्र विकल्प है।

कोमल ने अपने गहने एक सुनार के पास गिरवी रखे और झूठ बोला कि बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए। वहां से मिले 6 लाख रुपये उसने गुलशन को दिए। गुलशन ने मुजफ्फरनगर और मेरठ के तीन पेशेवर शूटरों—गुड्डू, मोंटू और राहुल उर्फ पवन से संपर्क किया। उन्हें 2 लाख रुपये की सुपारी दी गई।

वारदात की रात: गद्दारी का चरम

कोमल ने शूटरों को घर के एक-एक कोने की जानकारी दी। उसे पता था कि उस रात घर के पुरुष सदस्य बाहर होंगे और नैन सिंह अकेला कमरे में सो रहा होगा। 27 मार्च की रात 1:30 बजे, जब पूरी दुनिया सो रही थी, शूटर दीवार फांदकर अंदर घुसे। नैन सिंह गहरी नींद में थे। शूटरों ने 315 बोर के तमंचे से उनके सिर में सटाकर गोली मार दी। नैन सिंह को चीखने तक का मौका नहीं मिला। वे जिस करवट सो रहे थे, उसी हालत में उनकी सांसे थम गईं।

पुलिस का खुलासा और बिखरता परिवार

मेरठ पुलिस ने कड़ी मेहनत के बाद पांचों आरोपियों—कोमल (पत्नी), गुलशन (प्रेमी), और तीनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया। कोमल ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा कि वह नैन सिंह से छुटकारा पाना चाहती थी।

इस हत्याकांड ने न केवल एक फौजी की जान ली, बल्कि दो मासूम बच्चों का भविष्य भी अंधकार में डाल दिया। पिता दुनिया में नहीं रहे और मां अब उम्रकैद की सजा काटेंगी। गांव वाले हैरान हैं कि जिस पत्नी की रक्षा के लिए फौजी सीमा पर तैनात रहता था, उसी ने पीठ पीछे खंजर घोंप दिया।


चेतावनी: यह घटना हमें याद दिलाती है कि अवैध संबंध और क्षणिक आवेग किस तरह हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर सकते हैं। रिश्तों में ईमानदारी और संवाद की कमी अक्सर अपराध की ओर ले जाती है।


यह रिपोर्ट उस्मान सैफी के विवरण पर आधारित है।