जिस सड़क निर्माण पर पति मजदूरी कर रहा था उसको बनवाने का टेंडर तलाकशुदा पत्नी के पास था फिर जो हुआ…

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जिस सड़क निर्माण पर पति मजदूरी कर रहा था, उस सड़क का टेंडर तलाकशुदा पत्नी के पास था। फिर जो हुआ…

शहर से गांव को जोड़ने वाली वह सड़क, जो अब न सिर्फ गांव के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग बन गई थी, की योजना बन रही थी। सड़क के निर्माण का काम शुरू हुआ और सुबह से शाम तक धूल उड़ती रहती थी। जेसीबी मशीनें मिट्टी खोद रही थीं और ट्रक गिट्टी गिरा रहे थे। वहीं एक नौजवान मजदूर, अनुराग, फावड़ा चला रहा था। पुराने कपड़े, धूल से भरा चेहरा और हाथों में छाले थे। लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सी शांति थी, जैसे उसने अपनी किस्मत से समझौता कर लिया हो।

आसपास के मजदूरों से अनुराग का कोई खास मेलजोल नहीं था। वह चुपचाप काम करता, न किसी से उलझता न किसी से बहस करता। कई बार उसे गालियाँ भी दी जातीं, लेकिन वह चुप रहता और मुस्कुरा देता। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह लड़का कभी शहर का एक बड़ा व्यापारी था, जिसकी हार्डवेयर की दुकान जिले भर में मशहूर थी। दुकान जहां ठेकेदार लाइन लगाकर खड़े रहते थे, वही लड़का आज मजदूरी कर रहा था।

एक दिन, जब अनुराग अपने काम में व्यस्त था, अचानक चार शानदार गाड़ियां साइड पर आकर रुकीं। सूट-बूट पहने हुए लोग गाड़ी से उतरे और उनके बीच एक खूबसूरत और आत्मविश्वासी महिला उतरी। वह महिला थी लावण्या। वही लावण्या, जो अब एक बड़ी बिल्डर बन चुकी थी और इस सड़क का टेंडर उसी के नाम था। उसकी हाई हील्स, महंगे कपड़े और आत्मविश्वास से भरी चाल ने सबका ध्यान आकर्षित किया।

जैसे ही लावण्या की नजर मजदूरों पर पड़ी, उसकी आँखें एक चेहरे पर रुक गईं। वह चेहरा अनुराग का था। उसकी आंखों में आंसू थे और दिल तेजी से धड़कने लगा। एक पल में, पूरी जिंदगी की यादें उसके सामने घूम गईं। उसी पल अनुराग ने भी उसे देखा। वही लड़की, जो कभी फटे-पुराने कपड़े पहनकर आती थी, जो अपने भाई-बहन की फीस के लिए रोती थी, आज करोड़ों की मालकिन बन गई थी।

लावण्या ने धीरे से कदम बढ़ाया और अनुराग के पास पहुंच गई। अनुराग की आंखों में शर्मिंदगी, पछतावा और अफसोस था। उसने धीरे से कहा, “कैसे हो?” लावण्या ने गहरी सांस ली और कहा, “तुम ऐसे क्यों हो?” अनुराग ने सिर झुका लिया और कहा, “मैं इसके लायक हूं। मैंने जो किया उसकी यही सजा है।”

लावण्या की आँखों में नमी आ गई, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए कहा, “तुम्हें माफ कर सकती हूं, लेकिन अपना नहीं सकती।” फिर लावण्या ने एक गहरी सांस ली और बोली, “मैं तुम्हें फिर से खड़ा कर सकती हूं, लेकिन पहले तुम्हें खुद को माफ करना होगा।”

अनुराग के दिल में कई सवाल उठने लगे, लेकिन वह चुप रहा। लावण्या का यह कहना उसे अपनी गलती का एहसास दिला गया। लावण्या ने उसकी मदद करने का निश्चय किया और उसकी जिंदगी को फिर से एक दिशा देने का फैसला किया।


अतीत की सच्चाई

सात साल पहले की बात थी, जब अनुराग एक समृद्ध परिवार से था। उसका परिवार शहर के प्रतिष्ठित व्यापारियों में से था और उसकी हार्डवेयर की दुकान बहुत ही मशहूर थी। वह एक ईमानदार और मेहनती लड़का था, लेकिन किस्मत ने उसे एक मोड़ पर ला खड़ा किया।

उसी समय लावण्या का प्रवेश हुआ था। एक गरीब लड़की, जो किसी तरह अपनी मां के साथ अपनी दुनिया चला रही थी। उसकी माता-पिता का संघर्ष देख लावण्या का दिल बहुत ही कोमल था, और वह हमेशा किसी की मदद करने के लिए तत्पर रहती थी। उसकी सादगी और संस्कार ने अनुराग का दिल जीत लिया था। दोनों की शादी हो गई, लेकिन शादी के बाद अनुराग की जिंदगी में एक नई चुनौती आई।

ससुराल में बुरे व्यवहार और तानों का सामना करते हुए लावण्या ने भी कई बार महसूस किया कि उसकी स्थिति कमजोर हो रही है। लेकिन अनुराग हमेशा उसकी मदद करता और उसे समझाता। एक दिन श्रेया नाम की लड़की ने अनुराग के जीवन में प्रवेश किया, और इसने सब कुछ बदल दिया। वह लड़की धीरे-धीरे अनुराग की जिंदगी में घुलती गई और दोनों के बीच संबंध बन गए। जब लावण्या को यह पता चला, तो उसका दिल टूट गया और उसने घर छोड़ने का फैसला किया।


लावण्या की मेहनत और संघर्ष

लावण्या ने हार नहीं मानी और अपने खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए काम करना शुरू कर दिया। उसने एक निर्माण स्थल पर मजदूरी की और धीरे-धीरे अपनी मेहनत से एक नई शुरुआत की। राजेंद्र वर्मा नाम के एक व्यक्ति ने उसे अकाउंट और डीलिंग मैनेजमेंट सिखाया और उसे अपनी कंपनी में एक अधिकारी बना लिया। यही वह समय था जब लावण्या ने अपनी मेहनत से खुद को साबित किया और एक बड़ी बिल्डर बन गई।

अनुराग की स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत थी। उसने श्रेया से शादी की, लेकिन उसका जीवन पूरी तरह से बर्बाद हो गया। नशे की आदत और धोखाधड़ी के कारण वह सड़क पर आ गया और फिर से मजदूरी करने लगा।


दोनों का मिलना

आज, लावण्या का सामना अनुराग से हुआ था। उसे यह देखकर सुकून मिल रहा था कि वह फिर से उठ सकता है। अनुराग के लिए यह एक कठिन समय था, लेकिन लावण्या ने उसे संभाला और उसे फिर से खड़ा करने का वादा किया। अनुराग ने खुद को साबित किया और लावण्या की कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर बन गया।

जब श्रेया की चाल सामने आई और उसकी साजिश का पर्दाफाश हुआ, तो लावण्या और अनुराग दोनों ने मिलकर उसे परास्त किया। लावण्या ने अनुराग को एक अवसर दिया, और अनुराग ने अपनी कड़ी मेहनत से इसे सही साबित किया।


नवीन शुरुआत

किसी भी रिश्ते में विश्वास और माफी की अहमियत होती है। लावण्या और अनुराग के बीच अब वही प्रेम और सम्मान था, लेकिन अब यह एक नई शुरुआत थी। जहां एक मजदूर फिर से राजा बनता है, लेकिन अब बिना घमंड के, सिर्फ इंसान बनकर।

आज वह सड़क, जिसे कभी अनुराग ने मजदूरी की थी, अब दोनों की जिंदगी का प्रतीक बन चुकी थी। लावण्या ने फीता काटा और कहा, “यह सड़क हमारी जिंदगी बदलने वाली थी। आज हम यहां खड़े हैं, क्योंकि हमने एक-दूसरे को माफ किया और आगे बढ़ने का रास्ता चुना।”

समाप्त