Arpita सपना था कि पढ़ाई पूरी कर के परिवार का नाम रोशन करें
.
.
सपनों, सन्नाटों और सच की कहानी
अर्पिता का सपना बहुत साधारण था, लेकिन उसी साधारण सपने में उसकी पूरी दुनिया बसती थी।
वह पढ़ना चाहती थी। आगे बढ़ना चाहती थी। अपने पिता के झुके हुए कंधों को सीधा देखना चाहती थी और अपनी माँ की आँखों में वह चमक लौटाना चाहती थी जो बेटी की सफलता से पैदा होती है।
उसका मानना था कि अगर वह पढ़-लिखकर कुछ बन गई, तो परिवार का नाम रोशन होगा, गरीबी पीछे छूट जाएगी और समाज की तिरछी निगाहें सम्मान में बदल जाएँगी।
कर्नाटक के हुबली शहर में रहने वाली अर्पिता एक सामान्य परिवार की लड़की थी। न ज़्यादा सपने देखने वाली, न ज़्यादा विद्रोही। उसकी ज़िंदगी किताबों, कॉलेज, घर और कभी-कभी दोस्तों तक सीमित थी। लेकिन ज़िंदगी अक्सर उन्हीं लोगों को सबसे क्रूर सबक सिखाती है, जो सबसे कम शोर करते हैं।
एक लाश और एक सन्नाटा
3 जून 2015 की सुबह हुबली के बाहरी इलाके में फैले खेतों के बीच सन्नाटा कुछ ज़्यादा ही भारी था।
हाल ही में बारिश हुई थी। कच्ची पगडंडियाँ कीचड़ से भरी थीं और वहाँ इंसानी आवाज़ें बहुत कम सुनाई देती थीं। उसी सन्नाटे के बीच एक किसान खेत से गुज़र रहा था, तभी उसकी नज़र ज़मीन पर पड़ी एक अजीब-सी आकृति पर ठहर गई।
पहले तो उसे लगा कि शायद कोई जानवर मरा पड़ा है।
लेकिन जैसे-जैसे वह पास गया, उसकी रूह काँप उठी।
वह किसी इंसान का शव था।
आधा मिट्टी में दबा हुआ, आधा बाहर निकला हुआ।
शरीर सड़ चुका था, कपड़े गल चुके थे, और पहचान नामुमकिन थी।
लेकिन उस कंकाल के गले में एक सोने की चेन अब भी लटक रही थी, और उसमें जड़ा एक छोटा-सा लॉकेट था, जिस पर दो अक्षर खुदे थे – “AA”।
पुलिस आई, लाश को कब्ज़े में लिया गया, पोस्टमार्टम हुआ।
रिपोर्ट ने बताया – यह 20 से 25 साल की एक युवती की लाश थी।
लेकिन सवाल वही था –
कौन थी वह? और किसने उसे इस हाल में पहुँचाया?
एक साल की चुप्पी

चार महीने बीत गए।
कोई गुमशुदगी की रिपोर्ट नहीं।
कोई परिवार सामने नहीं आया।
लाश एक केस नंबर बनकर फाइलों में दबी रही।
फिर 24 अक्टूबर 2015 को एक अधेड़ उम्र का आदमी थाने में दाख़िल हुआ।
उसका नाम गिरिधर था।
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“मेरी बेटी… मेरी बेटी पिछले साल से लापता है।”
पुलिस चौंकी।
एक साल?
जब उससे पूछा गया कि इतनी देर क्यों की, तो जो जवाब मिला, वह सिर्फ एक पिता का नहीं, बल्कि पूरे समाज का आईना था।
“लड़की जवान थी साहब…
डर था कि लोग क्या कहेंगे…
इज़्ज़त चली जाएगी…”
डीएनए टेस्ट हुआ।
और सच्चाई सामने आई।
खेत में मिली लाश अर्पिता की थी।
मोबाइल की खामोशी
अर्पिता का मोबाइल नहीं मिला।
लेकिन कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकाले गए।
पुलिस ने दोस्तों, रिश्तेदारों, कॉलेज के साथियों से पूछताछ की।
हर रास्ता एक नाम पर आकर ठहरता था – अरुण।
अरुण, अर्पिता का पुराना दोस्त।
बेहद होशियार।
गोल्ड मेडलिस्ट।
बेंगलुरु में पीएचडी कर रहा था।
चार बार पूछताछ हुई।
चारों बार वही जवाब।
बिना हिचक, बिना गलती।
सबूत भी उसके पक्ष में थे।
मोबाइल लोकेशन, कॉलेज अटेंडेंस – सब कुछ।
लेकिन तभी एक नए अफ़सर ने केस संभाला।
उसने कॉल रिकॉर्ड को नए सिरे से देखा।
और एक बात ने उसे बेचैन कर दिया।
अर्पिता के गायब होने से ठीक दो दिन पहले,
उसने अरुण को कई कॉल किए थे।
कई मैसेज भेजे थे।
लेकिन अरुण ने एक भी जवाब नहीं दिया।
पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था।
परफेक्ट झूठ
चार पूछताछ।
चार एक-जैसे बयान।
न कोई तारीख़ की गलती।
न कोई याददाश्त की चूक।
अफ़सर समझ गया –
यह याददाश्त नहीं, तैयारी थी।
बिना बताए पुलिस बेंगलुरु पहुँची।
अरुण के कमरे की तलाशी ली गई।
किताबें।
नोट्स।
और एक छोटी-सी डायरी।
जैसे ही पुलिस ने डायरी उठाई, अरुण का चेहरा बदल गया।
उस डायरी में कत्ल का इक़बाल नहीं था।
वह एक स्क्रिप्ट थी।
पुलिस क्या सोचेगी।
कौन-सा सवाल पूछेगी।
कैसे जवाब देना है।
चेहरा कैसा रखना है।
वह डायरी किसी अपराधी की नहीं,
एक ऐसे इंसान की थी जो ख़ुद को कानून से ज़्यादा समझदार मानता था।
प्यार से अपराध तक
अरुण और अर्पिता की कहानी स्कूल से शुरू हुई थी।
दोस्ती।
फिर प्यार।
लेकिन जहाँ अरुण का सपना करियर था,
वहीं अर्पिता को रिश्ता चाहिए था।
जब उसने शादी की बात की,
अरुण पीछे हट गया।
उसे डर था।
परिवार से।
समाज से।
अपनी बनाई हुई छवि के टूटने से।
और उसी डर ने उसे हत्यारा बना दिया।
30 मई 2015 को
वह पीसीओ से कॉल करता है।
मोबाइल बेंगलुरु में छोड़ देता है।
हुबली में मिलता है।
शाम ढलती है।
सुनसान रास्ता।
और फिर
एक दुपट्टा
एक गला
और एक सपना हमेशा के लिए ख़ामोश।
अंत नहीं, सवाल
आज अरुण ज़मानत पर बाहर है।
मामला अदालत में है।
लेकिन सवाल अदालत से बड़ा है।
क्या पढ़ाई इंसानियत से बड़ी हो सकती है?
क्या समाज की इज़्ज़त, बेटी की जान से ऊपर है?
और अगर समय पर आवाज़ उठती,
तो क्या अर्पिता आज ज़िंदा होती?
यह कहानी सिर्फ एक मर्डर नहीं है।
यह एक चेतावनी है।
ताकि अगली अर्पिता को
चुप्पी की भेंट न चढ़ाया जाए।
News
‼️TRENDING CASE ‼️ 100 SABUNGERO T!NAPON SA TAAL LAKE,BILYONARYO TODO TANGGI
‼️TRENDING CASE ‼️ 100 SABUNGERO T!NAPON SA TAAL LAKE,BILYONARYO TODO TANGGI . . PART 1 – ANG MGA LALAKING HINDI…
NAKAKAGALIT ANG GINAWA NG MAGKALAGUYO
NAKAKAGALIT ANG GINAWA NG MAGKALAGUYO . . PART 1 – ANG AKSIDENTE SA ULAN Noong isang hapon ng Agosto, sa…
HINDI NIYA MALUNOK ANG NADISKUBRE NIYANG SIKRETO
HINDI NIYA MALUNOK ANG NADISKUBRE NIYANG SIKRETO . . Noong taong 2016, naninirahan si Josephine Navarro, isang tatlumpu’t isang taong…
‼️GRABE ANG GINAWA‼️sa ISANG ARCHITECT ng mga KALALAKEHAN at TRICYCLE DIRVERS
‼️GRABE ANG GINAWA‼️sa ISANG ARCHITECT ng mga KALALAKEHAN at TRICYCLE DIRVERS . . PART 1 Tahimik ang Davao City sa…
ANG NAKAKALUNGKOT NA STORYA NG BUHAY NI CONNIE
ANG NAKAKALUNGKOT NA STORYA NG BUHAY NI CONNIE . . PART 1 Ang Dalagang Nalunod sa Labis na Pagmamahal “Sabi…
BUONG PAMILYA NAUBOS DAHIL HINDI PINAUTANG ANG AMPON
BUONG PAMILYA NAUBOS DAHIL HINDI PINAUTANG ANG AMPON . . PART 1 Ang Pamilyang Nagtiwala Tahimik ang umaga sa isang…
End of content
No more pages to load






