शाहरुख़ खान के प्यार में पति को मरवा दिया
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शाहरुख़ के प्यार में पति की हत्या: एक गांव की सच्ची घटना
राजस्थान के ढोलपुर जिले के दोनोरी गांव में दिसंबर की ठंडी रातें कुछ अलग ही कहानियाँ लेकर आई थीं। इसी गांव में रहती थी रजनीश, उम्र 32 साल। उसका पति रविकांत, जो कर्नाटक में मजदूरी करता था, दो दिनों से लापता था। घर में दो छोटे बच्चे और बुजुर्ग सास थी। रविकांत महीने में करीब बीस हजार रुपये कमाता, जिसमें से पंद्रह हजार घर भेजता और बाकी अपने खर्च के लिए रखता।
अकेलापन और अवैध संबंध
पति की गैरमौजूदगी में रजनीश का मन घर में नहीं लगता था। गांव के ही तीन-चार लोगों से उसके अवैध संबंध बन गए। जब भी रविकांत फोन करता, अक्सर रजनीश का फोन बिजी आता। पड़ोसियों से पूछने पर जवाब मिलता, “भाभी बाहर गई हैं।” दूर बैठा रविकांत न तो कुछ कर सकता था, न नौकरी छोड़कर घर आ सकता था। बच्चों के पेट की खातिर सब कुछ चुपचाप सहता रहा।
एक साल बाद जब रविकांत घर लौटा, तो पड़ोसियों ने साफ शब्दों में कहा, “तेरी पत्नी अब बदनाम औरतों में गिनी जाती है।” पति-पत्नी के बीच बहस हुई, रजनीश ने बच्चों की कसम खाकर वादा किया कि आगे से ऐसा कुछ नहीं करेगी। रविकांत कुछ दिन रुका, फिर वापस कर्नाटक चला गया।

ऑटो वाले शाहरुख़ से इश्क़
लेकिन रजनीश की आदतें नहीं बदलीं। एक महीने बाद उसे गांव के ऑटो चालक शाहरुख खान से प्यार हो गया। 22 साल का शाहरुख़ और 32 साल की रजनीश, दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठे। जीने-मरने की कसमें खाई गईं। रजनीश अब बाजार या किसी काम का बहाना बनाकर ऑटो में घूमने लगी। सुनसान जगहों पर, होटलों में, और घर आकर घंटों शाहरुख से फोन पर बातें करती।
जब रविकांत को शाहरुख के बारे में पता चला, तो 2024 में वह घर आया। उसने दोनों को सख्त चेतावनी दी, “या तो यह सब छोड़ दो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा।” लेकिन न शाहरुख पर असर हुआ, न रजनीश पर। दोनों का मिलना-जुलना जारी रहा।
हत्या की साजिश
26 दिसंबर 2025 को रविकांत दस दिन के लिए घर आया। उसका इरादा था कि नया साल परिवार के साथ मनाएगा। लेकिन यह बात रजनीश को पसंद नहीं आई। उसकी आदत थी हर रोज शाहरुख से मिलना, घंटों बातें करना। रजनीश ने शाहरुख से कहा, “अगर मेरे पति को रास्ते से हटा दिया जाए, तो हम हमेशा के लिए एक हो जाएंगे।”
शाहरुख ने बिना देर किए प्लान बना लिया। 27 दिसंबर को उसने रविकांत को बुलाया, कहा, “अब मैं तुम्हारी पत्नी से कोई बात नहीं करता।” फिर उसे शेरगढ़ के सुनसान किले के पास ले गया, यह कहकर कि वह रजनीश से जुड़ी कुछ सच्चाइयाँ बताएगा। साथ में शराब की बोतलें थीं। पहले शराब पी गई, शाहरुख ने चालाकी से रविकांत को ज्यादा पिला दी और खुद कम पी। जब रविकांत पूरी तरह नशे में बेसुध हो गया, तो शाहरुख ने रजनीश के काले दुपट्टे से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। पत्थर से चेहरा कुचल दिया और शव को खाई में फेंक दिया। लेकिन एक बड़ी गलती हो गई—दुपट्टा वहीं छूट गया। पूरी हत्या के दौरान रजनीश फोन पर सब कुछ सुन रही थी—सांसों की आवाज, पति का तड़पना।
घर लौटकर शाहरुख ने कहा, “काम ठीक से हो गया।” रजनीश खुश हुई। उसी रात प्रेमी को घर बुलाया और उसके साथ रात बिताई।
लाश की खोज और पुलिस जांच
अगले दिन रजनीश ने सोचा, क्यों न ऐसा नाटक किया जाए कि पति की लाश भी मिल जाए और किसी को शक भी न हो। वह थाने गई, पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। घर आकर सामान्य दिनचर्या निभाई और आराम से सो गई।
29 दिसंबर की सुबह वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “मैंने सपने में देखा है कि शेरगढ़ के किले के पास मेरे पति पर हमला हुआ है।” पड़ोसी इकट्ठा हो गए। कुछ लोगों ने कहा, चलो जाकर देखते हैं। जब सब वहाँ पहुँचे, रजनीश की हरकतें अजीब थीं—वह सीधी उसी खाई की ओर इशारा करने लगी। लोगों ने नीचे देखा, वाकई में रविकांत की लाश पड़ी थी। मामला हत्या का था। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। एफएसएल टीम बुलाई गई, सबूत इकट्ठा किए गए। लाश के पास काले रंग का दुपट्टा भी मिला।
अब पुलिस के सामने तीन सवाल थे—महिला का दुपट्टा वहाँ कैसे आया? रविकांत की हत्या किसने की? रजनीश को शव की सटीक जगह कैसे पता चली?
पुलिस भूत-प्रेत या सपनों पर भरोसा नहीं करती। जांच तेज हुई, शक सीधा रजनीश पर गया। कॉल डिटेल्स निकाली गईं, पता चला कि पिछले दो सालों से रजनीश रोज ही एक नंबर पर 5-6 घंटे बात करती थी—वह नंबर था शाहरुख खान का।
सच का खुलासा
30 दिसंबर को पुलिस ने रजनीश को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान वह टूट गई और शाहरुख खान का नाम ले डाला। पुलिस ने शाहरुख को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
कानूनी जानकारों का कहना है कि रजनीश को सजा कम मिल सकती है क्योंकि वह सीधे तौर पर हत्या में शामिल नहीं है। लेकिन समाज की नजर में दोनों बराबर दोषी थे। गांव में चर्चा थी—“ऐसी औरत और ऐसे प्रेमी को सजा-ए-मौत मिलनी चाहिए।”
समाज की प्रतिक्रिया
गांव वाले कहते, “पति साल में चार-पांच दिन घर आता था, उसी को ठिकाने लगा दिया। बच्चों का क्या होगा?” कुछ ने कहा, “कानून कमजोर है, न जाने कितनी और बलि चढ़ेगी।” कुछ ने कहा, “सजा है मौत।” कईयों ने लिखा, “कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, चाहे कोई भी धर्म हो।”
अंत में
यह कहानी हमें सिखाती है कि अंधा प्यार और लालच इंसान को किस हद तक गिरा सकता है। जब रिश्तों में विश्वास टूट जाता है, तो जीवन की सारी खुशियाँ बिखर जाती हैं। बच्चों की मासूमियत, पति की मेहनत, सब मिट्टी में मिल गई। रजनीश और शाहरुख के अंजाम ने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया।
अब सवाल यह है—क्या कानून ऐसे अपराधियों को सख्त सजा देगा? क्या समाज कभी ऐसी घटनाओं से सबक लेगा? क्या रिश्तों में विश्वास और ईमानदारी बची रहेगी?
आपका क्या विचार है? क्या रजनीश और शाहरुख को सजा-ए-मौत मिलनी चाहिए?
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