बस ड्राइवर महिला से बनाया संब@न्ध || फिर काट कर फेक दिया Preeti Yadav Case

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प्रीति यादव केस: प्यार, धोखा और एक दर्दनाक अंत

6 नवंबर 2025 की सुबह, नोएडा सेक्टर 82 की सड़क पर एक व्यक्ति टहल रहा था। अचानक उसकी नजर नाले पर पड़ी, जहां एक डरावना दृश्य उसका इंतजार कर रहा था—नाले में एक महिला की नग्न, सिर और अंग-विहीन लाश तैर रही थी। उसने तुरंत पुलिस को फोन किया। कुछ ही देर में पुलिस, सर्च टीम और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई।
लाश को बाहर निकाला गया, लेकिन पहचानना मुश्किल था—महिला का सिर, हाथ और पैर गायब थे। पुलिस ने घंटों सर्च किया, पर बाकी अंग नहीं मिले। अब सबसे बड़ा सवाल था—यह महिला कौन है? और उसकी हत्या किसने की?

पहचान की कोशिश और जांच का जाल

पुलिस ने आसपास के थानों में पिछले 48 घंटे की मिसिंग रिपोर्ट खंगाली, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पोस्टमार्टम में पता चला कि महिला की उम्र 34-35 साल के करीब थी। लेकिन उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट किसी ने दर्ज नहीं कराई थी।
अब पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था। एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन हुआ। पुलिस ने इलाके के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। 5000 से ज्यादा फुटेज देखे गए। पुलिस का मानना था कि हत्या कहीं और हुई है और बॉडी को यहां लाकर फेंका गया है।

सीसीटीवी से मिला पहला सुराग

सीसीटीवी में एक नीली-सफेद बस दिखी, जो घटनास्थल पर देर तक रुकी थी। यह बस राधास्वामी ट्रस्ट फाउंडेशन की थी, और ड्राइवर का नाम मोनू सोलंकी था। पुलिस ने मोनू के बारे में जानकारी जुटाई—वह एटा का रहने वाला था, लेकिन पिछले कुछ सालों से नोएडा के पास बरोड़ा गांव में रह रहा था।
पुलिस ने मोनू के घर जाकर पूछताछ की। उसकी पत्नी घर पर ही थी, लेकिन मोनू गायब था। घर में उसकी दो बेटियां और पड़ोस की महिला प्रीति यादव के दो बच्चे भी मौजूद थे। मोनू की पत्नी ने बताया कि प्रीति यादव तीन दिन से गायब है, और उसी दिन मोनू भी घर छोड़कर फरार हो गया।

प्रीति यादव की पहचान और डीएनए टेस्ट

पुलिस ने प्रीति यादव के बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया, जो नाले में मिली महिला की लाश से 100% मैच हो गया। अब यह साफ हो गया कि मारी गई महिला प्रीति यादव थी।
पुलिस ने मोनू सोलंकी की तलाश शुरू की। दो-तीन दिन की मेहनत के बाद मोनू को गिरफ्तार कर लिया गया।

संबंध, विवाद और हत्या का राज

पुलिस की पूछताछ में मोनू ने पूरी कहानी बताई—
प्रीति यादव की शादी पहले एक उम्रदराज व्यक्ति से हुई थी, जिससे दो बच्चे हुए। पति से विवाद के बाद वह नोएडा आ गई और काम करने लगी। प्रीति, मोनू की मां की सहेली बन गई थी और अक्सर मोनू के घर आती थी। धीरे-धीरे मोनू और प्रीति के बीच नजदीकियां बढ़ीं। दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए, जो डेढ़ साल तक चले।

प्रीति जानती थी कि मोनू शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। लेकिन वह मोनू से शादी का दबाव बनाने लगी। मोनू ने शादी से इंकार किया। प्रीति ने धमकी दी कि अगर मोनू ने शादी नहीं की तो उसे ₹5 लाख देने होंगे, नहीं तो वह उसकी पत्नी को सब बता देगी और रेप का केस भी दर्ज करवाएगी।
मोन्ू परेशान रहने लगा। प्रीति बार-बार धमकी देती रही—”अगर पैसा नहीं दिया तो तुम्हारी बेटियों को गलत धंधे में डाल दूंगी।”

हत्या की रात

5 नवंबर 2025 की रात, मोनू ने प्रीति को मिलने बुलाया। दोनों बस में घूमने निकले, एक ढाबे पर मैगी खाई। इसी दौरान दोनों में झगड़ा हुआ। मोनू ने पहले से बस में कुल्हाड़ी रखी थी। झगड़े में गुस्से में आकर मोनू ने प्रीति का गला काट दिया, फिर उसके हाथ-पैर भी काट दिए।
मोन्ू जानता था कि अंगों से पहचान हो सकती है, इसलिए उसने कपड़े, मोबाइल और आईडी सब अपने पास रख लिए। सिर और पैर को 25 किलोमीटर दूर ले जाकर अलग-अलग नाले में फेंक दिया। हाथों को बस के टायर से कुचलकर ठिकाने लगाया।
प्रीति के दोनों बच्चों को अपने घर छोड़ आया, ताकि शक न हो।

पुलिस की मेहनत और केस का खुलासा

पुलिस ने 60 हजार वाहनों की लिस्ट बनाई, 1100 गाड़ियों को ट्रैक किया, 46 संदिग्ध वाहनों की जांच की। अंततः सीसीटीवी, डीएनए और पूछताछ से केस सॉल्व हो गया।
मोनू सोलंकी ने कबूल किया कि उसने प्रीति यादव की हत्या की। वजह थी—शादी और पैसों के लिए ब्लैकमेलिंग, और बच्चों को गलत रास्ते पर डालने की धमकी।

अंत और समाज के लिए संदेश

पुलिस ने मोनू को जेल भेज दिया। प्रीति के बच्चे अनाथ हो गए।
यह कहानी समाज को चेतावनी देती है—झूठ, लालच और ब्लैकमेलिंग का अंत हमेशा दुखद होता है। रिश्तों में ईमानदारी और संवाद जरूरी है। अपराध का रास्ता कभी सुकून नहीं देता।