बहु ने परेशान होकर उठाया बहुत बड़ा कदम जिसको देख कर पुलिस के भी होश उड़ गए/

“जमालपुर की रात: धर्म और अपराध की दास्तान”

आज मैं आपको एक ऐसी घटना सुनाने जा रहा हूँ जो उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के जमालपुर माजरा गांव में घटी थी। यह कहानी है धर्मपाल सिंह, उसके बेटे नीरज, बहू कुसुम और गांव की विधवा अर्चना देवी की। इस कहानी में रिश्तों, लालच, धोखे और अपराध की गहरी छाया है। कृपया पूरी कहानी पढ़ें और अंत में अपनी राय जरूर दें।

शुरुआत: धर्मपाल सिंह की जिंदगी

धर्मपाल सिंह जमालपुर माजरा गांव का एक जाना-पहचाना किसान था। उसके पास आठ एकड़ जमीन थी, जिस पर वह मेहनत-मजदूरी करके अच्छा-खासा पैसा जोड़ चुका था। धर्मपाल अपने पैसों का खुद ही हिसाब-किताब रखता था। उसकी पत्नी की चार साल पहले मृत्यु हो गई थी, जिससे वह बिल्कुल अकेला पड़ गया था।
अकेलेपन के चलते धर्मपाल का स्वभाव और चाल-चलन बदलने लगा। अब वह गांव की महिलाओं से गलत व्यवहार करने लगा था।

धर्मपाल का एक ही बेटा था – नीरज कुमार। नीरज की पत्नी का नाम कुसुम था, जो बेहद खूबसूरत और संस्कारी महिला थी। वह घर-परिवार का ख्याल रखती थी, अपने ससुर धर्मपाल और पति नीरज की सेवा करती थी।

नीरज की दुकान खोलने की जिद

नीरज ने महसूस किया कि खेती-किसानी का काम उसके बस का नहीं है। उसने अपने पिता से कपड़े की दुकान खोलने की इच्छा जताई।
धर्मपाल ने मना करते हुए कहा, “बेटा, दुकानदारी तुम्हारे बस की बात नहीं है। गांव के लोग सारा कपड़ा उधार में खरीद लेंगे और पैसा नहीं लौटाएंगे।”

नीरज और धर्मपाल के विचार अक्सर टकराने लगे। हर तीसरे-चौथे दिन घर में झगड़े होने लगे। आखिरकार नीरज ने घर के बंटवारे की बात की।
धर्मपाल ने साफ कहा, “जमीन-जायदाद में से कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन कपड़े की दुकान खोलने के लिए लाख रुपए दे देता हूँ।”

नीरज और कुसुम नए घर में रहने लगे, जबकि धर्मपाल पुराने घर में अकेला रह गया।

धर्मपाल का अकेलापन और अर्चना देवी की एंट्री

पुराने घर में धर्मपाल को खाना बनाना, कपड़े धोना मुश्किल लगने लगा। उसने नौकरानी रखने की सोची, लेकिन गांव में कोई नौकरानी नहीं मिली।
एक दिन खेतों की ओर जाते हुए उसकी मुलाकात अर्चना देवी से हुई। अर्चना विधवा थी, उसका चरित्र गांव में ठीक नहीं माना जाता था।
धर्मपाल ने अर्चना को नौकरानी बनने का प्रस्ताव दिया – 12-13 हजार रुपए महीने की तनख्वाह। अर्चना ने सोचा, “अगर मैं इस बुड्ढे को अपने जाल में फंसा लूं तो भविष्य में मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी।”

अगले दिन अर्चना ने धर्मपाल के घर काम शुरू कर दिया – खाना बनाना, कपड़े धोना, सफाई करना।

पैसों और लालच का खेल

15 दिन बाद एक सुबह धर्मपाल शराब के नशे में घर लौटा। अर्चना ने मौके का फायदा उठाया और 10,000 रुपए की मांग की।
धर्मपाल ने कहा, “तुम्हें मेरी कुछ और जरूरतें भी पूरी करनी होंगी।”
अर्चना ने पैसे लिए और दोनों ने अपनी रजामंदी से गलत संबंध बना लिए।
अब अर्चना की जरूरतें भी पूरी होने लगीं और धर्मपाल भी खुश रहने लगा।

नीरज की दुकान में मुश्किलें

उधर नीरज की दुकान ठीक से नहीं चल रही थी। लोग उधार में कपड़ा ले जाते और पैसे नहीं लौटाते। कुसुम ने समझाया, “धीरे-धीरे अपनी उधारी वसूल करो।”

नीरज ने सोचा, “पिता को नए घर में बुला लूं।”
अंकुर नामक दोस्त ने बताया, “तुम्हारे पिता का चाल-चलन ठीक नहीं, अर्चना के साथ गलत संबंध हैं।”
नीरज ने आंखों से सब देखने का फैसला किया।

रिश्तों में दरार और अपराध की शुरुआत

नीरज ने पिता को नए घर आने की बात कही। धर्मपाल ने मना किया, लेकिन आखिरकार मान गया।
धर्मपाल ने अर्चना से मोबाइल नंबर ले लिया, ताकि बीच-बीच में बुला सके।

एक दिन नीरज दिल्ली कपड़ा खरीदने चला गया।
शाम को धर्मपाल ने बहू कुसुम से खाना बनवाया और बाहर वाले कमरे में सोने की बात कही।
रात में धर्मपाल ने बहू कुसुम के साथ जबरदस्ती की। धमकी दी, “अगर किसी को बताया तो जान से मार दूंगा।”

कुसुम चुप रही, डर के मारे रातभर सो नहीं पाई।

अपराध का सिलसिला और सजा

अगले दिन धर्मपाल ने फिर वही हरकत दोहराई।
कुसुम ने रोते-रोते पति नीरज को फोन पर सारी बात बता दी।
नीरज गुस्से में आग-बबूला हो गया। उसने पत्नी कुसुम के साथ मिलकर धर्मपाल को खत्म करने का फैसला किया।

रात को दोनों ने नींद की दवा मिलाकर धर्मपाल को खाना खिलाया।
गहरी नींद में सोते धर्मपाल के सिर पर कुसुम ने हथौड़ा मारा और नीरज ने कुल्हाड़ी से गर्दन काट दी।
लाश को रस्सी से बांधकर आंगन के पेड़ पर लटका दिया।

पड़ोसियों की जागरूकता और पुलिस की कार्रवाई

पड़ोसी संजीव कुमार ने शोर मचाया, पुलिस को बुलाया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव बरामद किया और नीरज-कुसुम को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में कुसुम ने पूरी सच्चाई बता दी।
पुलिस भी हैरान रह गई – “एक ससुर अपनी बहू के साथ ऐसा कैसे कर सकता है?”

चार्जशीट दाखिल हुई, अब देखना है कि अदालत क्या फैसला सुनाती है।

समाप्ति और सवाल

क्या नीरज और कुसुम ने जो किया, वह सही था या गलत?
क्या धर्मपाल का अपराध उसकी मौत का कारण बना?
आपकी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

मिलते हैं दोस्तों, अगली घटना के साथ।
तब तक के लिए जय हिंद।

नोट:
यह कहानी फेसबुक की कम्युनिटी गाइडलाइन के अनुसार लिखी गई है। इसमें किसी भी आपत्तिजनक या भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सभी पात्र काल्पनिक हैं और समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से कहानी प्रस्तुत की गई है।
अगर आपको कहानी पसंद आई हो, तो लाइक और शेयर जरूर करें।
अपनी राय कमेंट में लिखना न भूलें।