उस ‘VIP’ का नाम क्या है? | सबसे बड़ा रहस्य सुलझा?

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वह VIP कौन था?

1. पहाड़ों में दफन एक राज

18 सितंबर 2022 की रात थी। उत्तराखंड के शिकेश के पहाड़ों के बीच बहती चिल्ला नहर उस रात बेहद शांत थी। लेकिन उसके नीचे एक ऐसा राज दफन होने जा रहा था, जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया। यह कहानी सिर्फ हत्या की नहीं, बल्कि उस सियासी ताकत, पैसे और पहुंच की है, जिसने एक मासूम 19 साल की लड़की अंकिता भंडारी की जिंदगी छीन ली।

अंकिता एक साधारण परिवार की बेटी थी। उसके सपने बड़े थे—माँ-बाप का सहारा बनना, गरीबी मिटाना। जब उसे वनंतरा रिसोर्ट में नौकरी मिली, तो लगा कि अब दिन बदलेंगे। लेकिन उसे क्या पता था, यह नौकरी उसकी जिंदगी का आखिरी फैसला साबित होगी।

2. रिसोर्ट का स्याह सच

वनंतरा रिसोर्ट जितना खूबसूरत दिखता था, भीतर उतना ही रहस्यमय। रिसोर्ट का मालिक था पुलकित आर्य—बीजेपी के पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा। बाप का रुतबा और पैसा, दोनों ने पुलकित के दिमाग में यह बात बैठा दी थी कि वह कानून से ऊपर है।

शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन जल्द ही रिसोर्ट के स्टाफ और खुद पुलकित का व्यवहार बदलने लगा। अंकिता को महसूस हुआ कि यहाँ सिर्फ मेहमान नवाजी नहीं होती, बल्कि कुछ ऐसा होता है जो बंद कमरों के पीछे छुपा रहता है।

पुलकित और उसके दोस्त अंकित गुप्ता, सौरभ भास्कर—रिसोर्ट के मैनेजर—ने अंकिता पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। “गेस्ट को खुश रखो”—शुरू में हल्की बातें, लेकिन 17 सितंबर आते-आते यह दबाव खुलकर सामने आ गया। अंकिता को मैसेज आने लगे—”एक VIP आने वाला है, उसे एक्स्ट्रा सर्विस देनी पड़ेगी।”

3. इंकार और साजिश

अंकिता ने साफ इंकार कर दिया। उसने अपने दोस्त को व्हाट्सएप पर लिखा, “मैं यहाँ काम नहीं कर सकती। ये लोग मुझसे गलत काम करवाना चाहते हैं। VIP आने वाला है और मुझे उसे खुश करना होगा।”

यह ‘VIP’ शब्द तीन अक्षरों का था, लेकिन आज तक एक पहेली बना हुआ है। कौन था वो VIP जिसके लिए पुलकित ने एक मासूम लड़की की बलि चढ़ाने की ठान ली थी?

18 सितंबर की शाम, तनाव चरम पर था। अंकिता परेशान थी, वहाँ से निकलना चाहती थी। पुलकित को डर था कि अंकिता अगर बाहर गई और उसने मुंह खोल दिया, तो रिसोर्ट का काला चिट्ठा सामने आ जाएगा।

4. आखिरी सफर

उसी शाम पुलकित, अंकित और सौरभ अंकिता को लेकर बाहर निकले—”ऋषिकेश घूमने चलते हैं, मूड ठीक हो जाएगा।” अंकिता ना चाहते हुए भी उनके साथ चली गई। सीसीटीवी फुटेज में चार लोग रिसोर्ट से निकलते दिखे। रात के अंधेरे में ये लोग नहर के किनारे रुके।

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, वहाँ पुलकित और अंकिता के बीच झगड़ा हुआ। VIP की बात, एक्स्ट्रा सर्विस की बात। अंकिता ने धमकी दी—”सबको बता दूंगी कि यहाँ क्या चल रहा है।” गुस्से में, शराब के नशे में, पुलकित और उसके दोस्तों ने अंकिता को नहर में धक्का दे दिया। एक चीख, और सब शांत।

अंकिता तैरना नहीं जानती थी। वह तड़पती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। तीनों उसे डूबता हुआ देखते रहे। जब यकीन हो गया कि वह वापस नहीं आएगी, तो वहाँ से भाग निकले।

5. झूठ की कहानी

तीनों वापस रिसोर्ट आए, ऐसे बर्ताव करने लगे जैसे कुछ हुआ ही नहीं। अगली सुबह पुलकित खुद पुलिस थाने गया, “लड़की गायब है”—गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने की कोशिश की। लेकिन अपराधी चाहे कितना भी होशियार हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही देता है। यहाँ सुराग था—सीसीटीवी फुटेज।

पुलिस ने फुटेज चेक किया—जाते वक्त चार लोग, वापस आते वक्त तीन। अंकिता उनके साथ वापस आई ही नहीं थी। सख्ती से पूछताछ हुई, तीनों टूट गए। अपना जुर्म कबूल कर लिया।

6. जनता का गुस्सा

पूरे उत्तराखंड में हाहाकार मच गया। लोग सड़कों पर उतर आए। गुस्सा इस बात का था कि नेता के बेटे ने अपनी ताकत के घमंड में एक बेटी की जान ले ली। छह दिन बाद अंकिता का शव बरामद हुआ। रिपोर्ट ने पुष्टि की—मौत डूबने से हुई, लेकिन पहले हाथापाई हुई थी।

रातोंरात प्रशासन ने रिसोर्ट पर बुलडोजर चला दिया। सरकार ने कहा—अवैध निर्माण तोड़ रहे हैं। लेकिन लोगों का कहना था—सबूत मिटाए जा रहे हैं। वह कमरा, जहाँ अंकिता रहती थी, जहाँ VIP आने वाला था—सब तोड़ दिया गया।

7. अदालत और सवाल

मई 2025 में कोर्ट ने फैसला सुनाया—पुलकित, अंकित, सौरभ को उम्रकैद। देखने में लगा—इंसाफ हो गया। लेकिन असली सवाल अब भी बाकी था—VIP कौन था?

एसआईटी की जांच में उस VIP का नाम कभी सामने नहीं आया। कहा गया—ऐसा कोई VIP था ही नहीं, बस लड़की को डराने के लिए बोला गया था। लेकिन दिसंबर 2025 में एक नया मोड़ आया।

8. उर्मिला सानवर का दावा

एक महिला—उर्मिला सानवर, जो खुद को टीवी एक्ट्रेस और पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताती है—सोशल मीडिया पर आई। उसने एक ऑडियो क्लिप रिलीज की। इसमें दावा किया गया कि VIP कोई और नहीं, बल्कि बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम हैं।

यह आरोप उर्मिला सानवर ने लगाए हैं, लेकिन अभी तक अदालत में साबित नहीं हुए। दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया—”मेरी छवि खराब करने की साजिश है।” उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने निर्देश दिया—बिना सबूत के नाम न जोड़ा जाए।

9. जनता की आवाज़

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी—”जिस नेता का नाम लिया जा रहा है, वह उस वक्त उत्तराखंड में थे ही नहीं।” लेकिन जनता पूछ रही है—अगर VIP नहीं था, तो पुलकित किसके लिए एक्स्ट्रा सर्विस मांग रहा था? रिसोर्ट क्यों तोड़ा गया? पुलकित का फोन क्यों गायब है? सीसीटीवी फुटेज में चौथा आदमी क्यों गायब है?

10. आंदोलन और दबाव

इसी बीच एक और घटना घटी—सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी, जो अंकिता के लिए इंसाफ मांग रही थी, उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोप—उसने भाषण में क्षेत्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाई। लोग कहने लगे—यह आंदोलन की आवाज़ दबाने का तरीका है।

जनता सड़कों पर उतर आई। 11 जनवरी 2026 को बंद का ऐलान हुआ। दुकानें बंद, सड़कें सुनसान, हर तरफ एक ही नारा—सीबीआई जांच करो।

11. दर्द का पत्र

ऑल्मोड़ा की दो बहनों कुसुम और संजना ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा—”जब सबूत मिटाए जा रहे हों, गवाहों को डराया जा रहा हो, ताकतवर लोगों को बचाया जा रहा हो, तो हम बेटियाँ कहाँ जाएँ?” उनका पत्र सिस्टम को हिलाकर रख गया।

अंकिता के पिता अब भी न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। “तीन लोगों की सजा से संतुष्टि नहीं है। उस चौथे शख्स का चेहरा सामने आना चाहिए। जब तक VIP का नाम नहीं आएगा, बेटी की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।”

12. सियासत में बगावत

बीजेपी के अंदर भी बगावत के सुर उठने लगे। कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। शिकेश के युवा मोर्चा महामंत्री अंकित बहुंडी ने लिखा—”अंकिता मेरी भी बहन जैसी थी। पार्टी की चुप्पी देखकर शर्म आ रही है।”

सरकार का रवैया वही है—सब पॉलिटिकल है। पुलिस ने उर्मिला सानवर से पूछताछ की। उर्मिला नारको टेस्ट के लिए तैयार है—”मेरे पास और भी सबूत हैं।”

13. दो रास्ते

कहानी अब एक ऐसे मोड़ पर है, जहाँ से दो रास्ते जाते हैं। एक सच्चाई का—जो कठिन है, जिसमें बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। दूसरा वही पुराना—लीपा-पोती का, जहाँ सबूतों के अभाव में किसी को क्लीन चिट दे दी जाएगी।

लेकिन इस बार जनता चुप नहीं है। “VIP कौन है?” यह सवाल अब सिर्फ सवाल नहीं, चिंगारी बन चुका है।

14. सवालों की बौछार

क्या 3 साल बाद अंकिता को पूरा इंसाफ मिलेगा? क्या उसके बूढ़े माँ-बाप VIP को जेल जाते देख पाएंगे? या फिर ताकत और पैसे के आगे इंसाफ फिर हार जाएगा?

हाई कोर्ट का आदेश, सड़कों पर जन सैलाब, सीएम की सफाई, उर्मिला सानवर का वायरल ऑडियो—सच क्या है? क्या वाकई कोई VIP था? या यह सिर्फ अफवाह है?

अगर अफवाह है, तो रिसोर्ट क्यों तोड़ा गया? पुलकित का फोन क्यों नहीं मिला? सीसीटीवी फुटेज में चौथा आदमी क्यों गायब है?

15. जन जागरण

इस कहानी को सुनाने का मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सच्चाई दिखाना है। अंकिता भंडारी हमारी-आपकी बहन जैसी थी। उसके साथ जो हुआ, वो किसी के साथ हो सकता है। जरूरी है कि हम जागरूक रहें, सही सवाल पूछें।

अगर आपको लगता है कि अंकिता के केस में सीबीआई जांच होनी चाहिए, तो आवाज़ उठाइए। जस्टिस फॉर अंकिता लिखिए। ऐसी कहानियाँ शेयर कीजिए, ताकि आवाज़ उन बंद कानों तक पहुंचे जो सुनना नहीं चाहते।

16. अंतिम मोड़

कहानी का अंत अभी नहीं हुआ। VIP का नाम अब भी एक रहस्य है। लेकिन जनता का सवाल अब सिर्फ सवाल नहीं, आंदोलन बन चुका है। अंकिता की आत्मा, उसके माता-पिता, हजारों बेटियाँ और बेटे—सब इंतज़ार कर रहे हैं उस दिन का जब सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी।

शायद एक दिन वह VIP का नाम भी सामने आए। शायद एक दिन उत्तराखंड की बेटियों को पूरी सुरक्षा मिले। शायद एक दिन इंसाफ ताकत और पैसे से ऊपर हो जाए।

समाप्त