महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/डॉक्टर और गांव के लोगों के उड़े होश/

कच्चे केले की कीमत
प्रस्तावना
राजस्थान के भरतपुर जिले के कुलमीपुरा गांव में रहने वाले युवराज सिंह की कहानी है, जो मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन की चाह में दिन-रात संघर्ष करता है। उसकी पत्नी रजनी देवी का चाल-चलन शुरू से ही ठीक नहीं था, लेकिन युवराज उसकी सच्चाई से अनजान था। इस कहानी में रिश्तों की उलझन, लालच, धोखा और अंत में एक महिला की दुखद मौत का चित्रण है, जो समाज को सोचने पर मजबूर कर देता है।
भाग 1: संघर्ष की शुरुआत
भरतपुर जिले के कुलमीपुरा गांव में युवराज सिंह अपने माता-पिता के साथ रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन युवराज ने हार मानना नहीं सीखा था। वह गांव से 10 किलोमीटर दूर एक फैक्ट्री में काम करता था। दिन-रात मेहनत करके उसने तीन साल में इतना पैसा जोड़ लिया कि गांव के बाहर खेत में एक छोटा सा प्लॉट खरीद सके।
युवराज का सपना था कि वह उस प्लॉट पर अपना नया घर बनवाए, ताकि परिवार को बेहतर जिंदगी दे सके। लेकिन प्लॉट खरीदने के बाद उसके पास पैसे नहीं बचे थे कि वह घर बना सके। उसने ठान लिया कि अगले दो-तीन साल में पैसे जोड़कर घर जरूर बनाएगा।
युवराज की पत्नी रजनी देवी, चालाक और झगड़ालू स्वभाव की थी। वह अक्सर पड़ोसियों से लड़ती रहती थी। युवराज अपनी पत्नी के चरित्र के बारे में ज्यादा नहीं जानता था, लेकिन गांव में उसकी चर्चा आम थी।
भाग 2: केले वाला और झगड़े की जड़
एक दिन सुबह 8 बजे युवराज फैक्ट्री चला गया। करीब 10 बजे गांव में एक केला बेचने वाला लड़का आया। वह अच्छे-अच्छे केले और दूसरे फल बेचता था। रजनी को आवाज सुनाई दी तो उसने सोचा कि घर के लिए केले खरीद लेती हूं। वह बाहर गई और केले वाले से एक दर्जन कच्चे, लंबे केले चुनने लगी।
वहीं पास में रीटा देवी नाम की दूसरी महिला खड़ी थी, जो रजनी को गौर से देख रही थी। रीटा ने रजनी से कहा, “तुम हर दूसरे-तीसरे दिन कच्चे केले क्यों खरीदती हो? मुझे सब पता है, मैंने एक दिन तुम्हें हाथ पकड़ भी लिया था।”
रजनी को गुस्सा आ गया। उसने रीटा से कहा, “मैं जिस काम के लिए केले खरीदती हूं, तुम भी खरीद सकती हो, मुझसे झगड़ने की कोशिश मत करो।” दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया, लेकिन पड़ोस की महिलाएं बीच-बचाव करके मामला शांत करा देती हैं।
रजनी अपने घर लौटती है, बाथरूम में दो केले लेकर जाती है, 10 मिनट बाद बाहर आ जाती है और घर के काम में लग जाती है। उसे नहीं पता था कि यही कच्चे केले भविष्य में उसकी जान ले लेंगे।
भाग 3: नया घर, नया कर्ज और बलविंदर जमींदार
रात 9 बजे युवराज फैक्ट्री से थककर घर आया। रजनी ने कहा, “पड़ोस में रोज झगड़े होते हैं, महिलाएं लड़ती हैं, पुराना घर बेच देते हैं और खेत वाले प्लॉट में नया घर बना लेते हैं।”
युवराज बोला, “इतने पैसे तो मेरे पास नहीं हैं।” रजनी ने सुझाव दिया, “पुराना घर बेचने के पैसे और ऊपर से गांव के जमींदार बलविंदर सिंह से कर्ज ले लेते हैं।”
अगली सुबह युवराज बलविंदर के घर गया, लेकिन बलविंदर ने तुरंत पैसे देने से मना कर दिया। रजनी ने युवराज को काम पर भेजा और खुद बलविंदर से मिलने गई। बलविंदर खेत में था, रजनी वहां पहुंची। बलविंदर ने रजनी की खूबसूरती देखी और मन में लालच आ गया।
रजनी ने बलविंदर से घर खरीदने और कर्ज देने की बात की। बलविंदर ने शर्त रखी, “तुम्हें मेरी सेवा करनी पड़ेगी।” रजनी ने समझौता कर लिया। दोनों ने खेत में गलत संबंध बनाए। शाम को बलविंदर ने घर खरीद लिया, पैसे दे दिए और कर्ज भी दे दिया।
रजनी ने चालाकी से कहा, “जब तक नया घर बनता है, मैं पुराने घर में रहूंगी।” बलविंदर मान गया। रजनी पैसे लेकर खुश थी, उसे लगा कि आगे भी बलविंदर से पैसे मिल सकते हैं।
भाग 4: कदम सिंह और रिश्तों की उलझन
कुछ दिन बाद नए प्लॉट पर मकान बनना शुरू हो गया। युवराज दिन-रात फैक्ट्री में काम करता था, कर्ज चुकाने के लिए। इसी फैक्ट्री में उसकी दोस्ती ट्रक ड्राइवर कदम सिंह से हो गई। कदम सिंह अच्छा पैसा कमाता था, दोनों की दोस्ती गहरी हो गई। कदम सिंह युवराज के घर आने-जाने लगा।
रजनी कदम सिंह की तरफ आकर्षित हो गई। कदम सिंह भी रजनी पर फिदा था। दोनों के बीच बातचीत होने लगी। एक दिन रात 9 बजे युवराज फैक्ट्री गया, कदम सिंह ने बहाना बनाकर फैक्ट्री से निकल गया और युवराज के घर पहुंच गया। रजनी ने दरवाजा खोला, दोनों ने कमरे में गलत संबंध बनाए। रजनी ने कदम सिंह से 5000 रुपये मांगे, कदम सिंह ने दे दिए।
अब रजनी दोनों तरफ से पैसे ऐंठने लगी। कभी बलविंदर से, कभी कदम सिंह से। गांव का लड़का रिंकू यह सब देख रहा था। एक दिन उसने युवराज को बताया, “तेरी पीठ पीछे दो आदमी तेरे घर आते हैं।”
युवराज को शक हुआ, लेकिन पत्नी से पूछा तो रजनी ने कहा, “गांव वाले जलते हैं, झूठ बोलते हैं।” युवराज ने मान लिया, लेकिन मन में शक बना रहा।
भाग 5: सच का सामना और दुखद अंत
युवराज ने पत्नी पर नजर रखना शुरू किया। एक दिन रात को फैक्ट्री में कदम सिंह ने फिर ट्रक का ध्यान रखने को कहा और खुद रजनी के घर चला गया। युवराज ने पीछा किया, देखा कि कदम सिंह उसके घर गया है। थोड़ी देर बाद युवराज घर पहुंचा, दरवाजा पीटा। रजनी और कदम सिंह डर गए। रजनी ने दरवाजा खोला, युवराज ने कदम सिंह को पकड़ लिया, पीटा लेकिन वह भाग गया।
युवराज ने रजनी को मारना-पीटना शुरू कर दिया, “तुम मुझे धोखा देती हो, गांव वाले सच कहते थे।” रजनी ने रोते हुए माफी मांगी, वादा किया कि अब किसी गैर मर्द से नहीं मिलेगी। युवराज ने एक महीने का वक्त दिया, सुधरने को कहा।
रजनी ने सोचा, अब तो मुझे कच्चे केलों का ही सहारा लेना पड़ेगा। युवराज फिर फैक्ट्री में काम करने लगा, पत्नी को वक्त नहीं दे पाया। रजनी अकेलापन महसूस करती थी, फिर से केले खरीदने लगी।
एक दिन सुबह 9 बजे युवराज फैक्ट्री गया, केला वाला आया, रजनी ने एक दर्जन कच्चे केले खरीदे। रीटा देवी पास खड़ी थी, मुस्कुरा रही थी। रजनी गुस्सा हुई, लेकिन चुप रही।
रजनी दो केले लेकर बाथरूम गई। आधा घंटा बीत गया, बाहर नहीं आई। युवराज ने दरवाजा खटखटाया, जवाब नहीं मिला। दरवाजा तोड़ा, देखा रजनी बेहोश पड़ी थी, हाथ में केला था, शरीर से खून बह रहा था।
युवराज ने तुरंत किराए की गाड़ी मंगवाई, रजनी को अस्पताल ले गया। डॉक्टरों ने बताया, “तुम्हारी पत्नी गलत काम करती थी, शरीर का सारा खून बह चुका है।” इलाज के दौरान रजनी की मौत हो गई।
भाग 6: समाज की सोच और निष्कर्ष
युवराज को पत्नी की मौत का गहरा सदमा लगा। उसने डॉक्टरों से पूरी कहानी पूछी, डॉक्टरों ने सच बता दिया। युवराज सोचने लगा, “अगर मैंने पत्नी को समय दिया होता, तो शायद उसकी मौत न होती।”
यह खबर सोशल मीडिया पर फैल गई। लोग सोचने लगे, “एक औरत ऐसा कैसे कर सकती है?” गांव में चर्चा आम हो गई।
उपसंहार
इस कहानी का उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करना है। रिश्तों में संवाद, विश्वास और समय देना जरूरी है। अकेलापन और अवसाद किसी को गलत रास्ते पर ले जा सकता है। हमें अपने परिवार और समाज में सकारात्मकता फैलानी चाहिए।
दोस्तों, ऐसी घटनाएं हमें सिखाती हैं कि जीवन में रिश्तों की अहमियत को समझें, अपनों को वक्त दें, और समाज की बुराइयों से बचें।
जय हिंद।
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