महिला और ट्रक ड्राइवर के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/
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लखनऊ के सेमरा गांव में अवैध संबंध और हत्या का सनसनीखेज मामला: पति ने गर्भवती पत्नी का गला दबाकर की हत्या
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सेमरा गांव से एक बेहद चौंकाने वाला और दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद या दांपत्य कलह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अवैध संबंध, लालच, धोखे और अंततः एक निर्मम हत्या तक जा पहुंचा। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिश्तों में अविश्वास और आवेश किस हद तक इंसान को अंधा बना सकता है।
शादी के छह महीने बाद शुरू हुआ तनाव
सेमरा गांव निवासी पृथ्वी सिंह, जो पढ़ा-लिखा और मेहनती युवक बताया जाता है, पिछले कुछ समय से नौकरी की तलाश में था। करीब छह महीने पहले उसकी शादी रेशमा नामक युवती से हुई थी। रेशमा अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थी, लेकिन उसकी सुंदरता की चर्चा पूरे गांव में थी। शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य दिखा, लेकिन जल्द ही दोनों के विचारों में मतभेद उभरने लगे।
परिवार में पृथ्वी सिंह की मां लीला देवी भी रहती थीं। घर सड़क किनारे था और आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। इसी बीच रेशमा ने गांव में चूड़ियों की दुकान खोलने की जिद पकड़ ली। पृथ्वी सिंह के पास पर्याप्त धन नहीं था, लेकिन मां लीला देवी ने अपने सोने के कंगन गिरवी रखकर बहू की दुकान खुलवा दी।

दुकान चल निकली। रेशमा की आमदनी बढ़ने लगी। इसी दौरान 15 अक्टूबर 2025 को पृथ्वी सिंह को दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी का पत्र मिला। घर में खुशी का माहौल बना, लेकिन रेशमा इस खबर से खुश नहीं थी। वह पति के साथ दिल्ली जाना चाहती थी, मगर पृथ्वी ने मां की देखभाल का हवाला देकर उसे गांव में ही रहने को कहा।
20 अक्टूबर 2025 को पृथ्वी सिंह दिल्ली चला गया।
अकेलापन और गलत दिशा
पति के जाने के कुछ ही दिनों बाद रेशमा का व्यवहार बदलने लगा। दिन में दुकान और घर के काम में व्यस्त रहने के बावजूद रात को उसे अकेलापन खलने लगा। इसी मानसिक स्थिति में उसने गलत रास्ते की ओर कदम बढ़ा दिया।
30 अक्टूबर 2025 की रात लगभग 8 बजे एक ट्रक घर के सामने आकर रुका। ट्रक ड्राइवर अजमेर सिंह, जिसकी उम्र लगभग 30 वर्ष बताई जाती है, ने बताया कि उसके ट्रक का टायर पंचर हो गया है और उसे रात बिताने की जगह चाहिए।
लीला देवी ने घर के बाहर बने एक कमरे में उसे रुकने की अनुमति दे दी। उसी रात रेशमा और अजमेर के बीच नजदीकियां बढ़ीं। बताया जाता है कि दोनों की सहमति से अवैध संबंध बने। इसके बाद यह सिलसिला रुकने के बजाय नियमित हो गया।
लालच ने बढ़ाया दायरा
अजमेर सिंह ने रेशमा को लालच दिया कि वह अन्य ट्रक ड्राइवरों के लिए खाना बनाए तो उसे अच्छा पैसा मिल सकता है। लीला देवी भी अतिरिक्त आय के लालच में तैयार हो गईं। धीरे-धीरे अजमेर और उसका साथी कालूराम रेशमा के संपर्क में आने लगे।
28 नवंबर 2025 को शराब के नशे में अजमेर ने अपने मित्र कालूराम को भी रेशमा के बारे में बताया। कालूराम ने भी रेशमा के साथ समय बिताने की इच्छा जताई और पैसे देने की बात कही। रेशमा ने लालच में हामी भर दी।
आरोप है कि 28 नवंबर की रात रेशमा ने अपनी सास को खाने में नींद की दवा मिलाकर सुला दिया और दोनों ट्रक ड्राइवरों को घर बुलाया। इसके बाद कई बार यह घटनाएं दोहराई गईं। रेशमा को पैसे मिलते रहे और उसने दुकान पर ध्यान देना भी कम कर दिया।
गर्भावस्था ने खोला राज
20 दिसंबर 2025 की सुबह रेशमा को अचानक उल्टियां होने लगीं। लीला देवी उसे डॉक्टर के पास ले गईं। जांच में डॉक्टर ने बताया कि रेशमा लगभग एक महीने की गर्भवती है।
यह सुनकर लीला देवी के होश उड़ गए। उन्हें समझते देर नहीं लगी कि दो महीने से दिल्ली में रह रहे बेटे की पत्नी गर्भवती कैसे हो सकती है। उसी शाम उन्होंने बेटे पृथ्वी सिंह को फोन कर सारी बात बताई।
पति का लौटना और भयावह अंजाम
21 दिसंबर 2025 की रात पृथ्वी सिंह घर पहुंचा। उसने सामान्य व्यवहार करते हुए रात का भोजन परिवार के साथ किया। इसके बाद वह रेशमा को कमरे में ले गया और उससे सच्चाई जानने की कोशिश की।
रेशमा ने पहले चुप्पी साधी, लेकिन परिस्थितियां बिगड़ती गईं। पुलिस के अनुसार, गुस्से और अपमान की भावना में आकर पृथ्वी सिंह ने दुपट्टे से रेशमा का गला दबा दिया। देर रात तक वह पत्नी के शव के पास बैठा रहा।
अगली सुबह दरवाजा न खुलने पर लीला देवी ने पड़ोसियों को बुलाया। दरवाजा तोड़ा गया तो रेशमा मृत पाई गई और पृथ्वी सिंह वहीं बैठा था।
पुलिस कार्रवाई
पड़ोसी सुरेश कुमार मिश्रा ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पृथ्वी सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में पृथ्वी सिंह ने अपराध स्वीकारते हुए कहा कि पत्नी के अवैध संबंध और गर्भावस्था की खबर सुनकर उसने यह कदम उठाया।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट तैयार कर ली है। अदालत में मुकदमा विचाराधीन है।
सामाजिक सवाल
यह घटना कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है—
क्या आर्थिक लालच रिश्तों को इतनी जल्दी तोड़ देता है?
क्या पति को कानून हाथ में लेने का अधिकार था?
क्या संवाद और कानूनी प्रक्रिया की जगह हत्या उचित प्रतिक्रिया हो सकती है?
कानून स्पष्ट है—किसी भी परिस्थिति में हत्या का कोई औचित्य नहीं हो सकता। अवैध संबंध नैतिक अपराध हो सकते हैं, लेकिन उनका समाधान हिंसा नहीं है।
निष्कर्ष
सेमरा गांव की यह घटना एक परिवार के टूटने की कहानी है, जहां अविश्वास, लालच और आवेश ने मिलकर त्रासदी को जन्म दिया। एक मां ने अपने गहने गिरवी रखकर बहू की दुकान खुलवाई, एक पति ने भविष्य संवारने के लिए शहर का रुख किया, लेकिन पीछे रिश्तों की नींव दरक चुकी थी।
आज रेशमा इस दुनिया में नहीं है, पृथ्वी सिंह जेल में है, और एक बुजुर्ग मां दोनों ओर से टूट चुकी है।
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है—रिश्तों में संवाद, संयम और कानून का सम्मान अत्यंत आवश्यक है।
मामला फिलहाल न्यायालय में है। अदालत का फैसला आने वाला है। लेकिन इस घटना ने यह जरूर साबित कर दिया कि गुस्से में लिया गया एक फैसला कई जिंदगियां बर्बाद कर सकता है।
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