भाग 2: टूटे हुए सपनों की नई लड़ाई
सौम्या शेखर साहू और उनकी दादी की मृत्यु के बाद, रीमा की जिंदगी एक अंधकारमय सुरंग में बदल गई थी। अस्पताल की बेड पर पड़ी, उसके शरीर के 40% हिस्से जल चुके थे, और मन में अनगिनत सवालों के घेरे थे। क्या वह फिर कभी पहले जैसी खुशहाल जिंदगी जी पाएगी? क्या उसके परिवार का उजड़ा हुआ आंगन कभी हरा-भरा होगा?
रीमा की वापसी: दर्द और उम्मीद के बीच
रीमा को अस्पताल से छुट्टी मिली, लेकिन घर लौटना आसान नहीं था। घर, जो कभी खुशियों से गूंजता था, अब खामोशी और डर का घर बन चुका था। हर कोना उस दिन की याद दिलाता था जब उनका जीवन एक धमाके में बिखर गया था। रीमा के लिए सबसे बड़ा संघर्ष था उस दर्द को सहना, जो न केवल उसके शरीर में था, बल्कि उसके दिल में भी गहरा था।
वह अक्सर अपने कमरे की खिड़की से बाहर देखती, सोचती कि क्या सौम्या की आत्मा उसे देख रही होगी? क्या वह उसके लिए लड़ाई जारी रख पाएगी? रीमा ने ठाना कि वह सौम्या और दादी के लिए जीएगी, और सच को सामने लाएगी।
पुलिस की जांच और नया मोड़
पुलिस की जांच लगातार जारी थी, लेकिन केस में ठोस सबूतों की कमी बड़ी बाधा थी। क्राइम ब्रांच ने सौम्या के परिवार और करीबी लोगों से पूछताछ की, लेकिन कोई ऐसा सुराग नहीं मिला जो सीधे अपराधी तक पहुंचा सके।
इसी बीच, रीमा ने अपने अंदर की ताकत जुटाई और धीरे-धीरे पुलिस के साथ सहयोग करना शुरू किया। उसने कई बार अपने दर्दनाक अनुभव साझा किए, और बताया कि कैसे उसने विस्फोट के कुछ सेकंड पहले एक संदिग्ध व्यक्ति को घर के बाहर देखा था। उसने कहा, “उसने मुझे देखा, और मैं महसूस कर सकती थी कि वह कुछ गलत करने वाला है।”

पुलिस ने रीमा के बयान को गंभीरता से लिया और इलाके के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। जांच के दौरान एक फुटेज मिली जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति पैकेज लेकर आते दिख रहा था, लेकिन चेहरे को साफ तौर पर नहीं दिखाया गया था।
संदिग्ध की तलाश
जांच के दायरे में एक नया नाम आया—सुनील मिश्रा। सुनील एक स्थानीय व्यापारी था, जिसका सौम्या के परिवार से कोई पुराना झगड़ा नहीं था, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति खराब थी। कुछ लोगों ने बताया कि सुनील ने हाल ही में बड़े पैमाने पर कर्ज लिया था और वह दबाव में था।
पुलिस ने सुनील को हिरासत में लिया और उससे कड़ी पूछताछ की। सुनील ने शुरुआत में इनकार किया, लेकिन जब पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड्स बरामद किए, तो उसकी कहानी टूटने लगी।
सुनील ने स्वीकार किया कि उसने किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर उस दिन पैकेज भेजा था, लेकिन वह नहीं जानता था कि पैकेज में बम है। उसने बताया कि उसे पैसे की जरूरत थी और वह मजबूर था।
रहस्यमय तीसरा व्यक्ति
जांच में एक और मोड़ तब आया जब पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि इस पूरे षड़यंत्र के पीछे कोई तीसरा व्यक्ति है, जो अभी तक छुपा हुआ है। इस व्यक्ति का नाम था राजीव वर्मा, जो एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से था।
राजीव का सौम्या के परिवार के साथ पुराना दुश्मनी का इतिहास था। कुछ साल पहले राजीव की कंपनी और सौम्या के परिवार की कंपनी के बीच एक बड़ा विवाद हुआ था, जिसमें राजीव को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। माना जाता था कि राजीव ने बदला लेने के लिए यह साजिश रची थी।
पुलिस ने राजीव के खिलाफ गुप्त जांच शुरू की, लेकिन उसकी राजनीतिक ताकत के कारण मामला जटिल था।
परिवार की मजबूती और न्याय की उम्मीद
रीमा और उसके परिवार ने हार नहीं मानी। उन्होंने मीडिया की मदद ली और पूरे देश में अपने केस को उजागर किया। लोगों ने उनके पक्ष में आवाज उठाई। सोशल मीडिया पर #JusticeForSaahuFamily ट्रेंड करने लगा।
इस दबाव के चलते, सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया, जिसमें देश के बेहतरीन अधिकारी शामिल थे। SIT ने राजीव वर्मा के खिलाफ गुप्त रूप से जांच तेज कर दी।
कोर्ट की लड़ाई
अदालत में केस की सुनवाई शुरू हुई। रीमा ने अपनी बहादुरी और सच्चाई से सभी को प्रभावित किया। उसने कोर्ट में बताया कि कैसे एक खुशहाल परिवार को एक पल में तबाह कर दिया गया।
राजीव के वकीलों ने कई तरह के हथकंडे अपनाए, लेकिन रीमा और पुलिस के सबूत इतने मजबूत थे कि कोई शक की गुंजाइश नहीं बची।
आखिरकार, 26 मई 2025 को पटनागढ़ जिला अदालत ने फैसला सुनाया कि राजीव वर्मा, पूंजीलाल मेहर और सुनील मिश्रा तीनों दोषी हैं। राजीव को भी उम्रकैद की सजा मिली, जिससे यह साबित हो गया कि कोई भी अपराधी अपनी ताकत या पद के बल पर बच नहीं सकता।
रीमा का नया जीवन
सजा के बाद, रीमा ने अपने जीवन को नए सिरे से शुरू किया। उसने एक गैर-सरकारी संगठन की स्थापना की, जो घरेलू हिंसा और घरेलू आतंकवाद के खिलाफ काम करता है। उसका मकसद था कि कोई भी महिला या परिवार उसके जैसे दर्द से ना गुजरे।
रीमा ने कहा, “मेरी कहानी सिर्फ मेरा दर्द नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए है जो न्याय के लिए लड़ रहे हैं। हमें हार नहीं माननी चाहिए।”
कहानी से सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि ज़िंदगी में चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति आए, इंसान की हिम्मत और सच्चाई की जीत हमेशा होती है। न्याय की राह कठिन होती है, लेकिन अगर हम एकजुट हों, तो कोई भी अंधेरा हमारे रास्ते को नहीं रोक सकता।
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