एक अफ्रीकन व्यक्ति जब मसाज कराने आया तो महिला ने उसके साथ जो किया।
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एक अफ्रीकी ग्राहक और मसाज पार्लर की महिला – एक अनकही कहानी
भूमिका
मुंबई की मायानगरी, जहां सपनों की भीड़ में हर कोई अपनी पहचान तलाशता है, वहीं एक शानदार मसाज पार्लर में रागिनी नाम की एक युवती काम करती थी। उम्र उसकी लगभग 25 साल, सुंदरता ऐसी कि हर कोई उसकी ओर आकर्षित हो जाए। मगर उसकी जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार थी, अंदर से उतनी ही खाली और तन्हा।
रागिनी की शादी को तीन साल हो चुके थे। उसका पति विक्रम एक मल्टीनेशनल कंपनी में ऊँचे पद पर था, लेकिन काम के सिलसिले में महीनों तक विदेश में रहता। बच्चे नहीं थे, और घर की खामोशी उसे काट खाने को दौड़ती थी। विक्रम को उसने बताया था कि वह एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करती है, जबकि सच यह था कि वह एक हाई-प्रोफाइल मसाज पार्लर में काम करती थी, जहाँ सिर्फ मसाज नहीं, बल्कि कई बार ग्राहकों की खास डिमांड भी पूरी की जाती थी।
अकेलापन और मजबूरी
रागिनी को यह काम पसंद नहीं था, लेकिन मुंबई जैसे महंगे शहर में सिर्फ पति के पैसों पर निर्भर रहना उसे मंजूर नहीं था। उसे अपनी पहचान और ढेर सारा पैसा चाहिए था। वह खुद को तसल्ली देती थी कि बस कुछ वक्त की बात है, जब बैंक बैलेंस अच्छा हो जाएगा तो सब छोड़ देगी। लेकिन धीरे-धीरे वह दलदल में फंसती चली गई।
हर रोज़ अलग-अलग पुरुषों के साथ समय बिताना, उनकी गंदी नजरें और बातें सहना, रागिनी को अंदर से खोखला करता जा रहा था। वह खुद से ही सवाल करती थी – क्या यही जिंदगी है?

एक खास दिन
उस दिन भी शाम के छह बजे थे। मुंबई की हवा में हल्की नमी थी। रागिनी अपने पार्लर के केबिन में बैठी थी, तभी दरवाजे पर एक लंबा-चौड़ा विदेशी व्यक्ति आया। नाम था जोसेफ – दक्षिण अफ्रीका का रहने वाला, उम्र लगभग 40 साल, चेहरे पर थकान और आँखों में एक अजीब सी शराफत।
जोसेफ भारत घूमने आया था और दिनभर की थकान के बाद बॉडी मसाज कराने पार्लर पहुंचा। मैनेजर सोनिया ने उसे पैकेज समझाए और केबिन नंबर तीन में भेजा, जहाँ रागिनी क्लाइंट का इंतजार कर रही थी।
रागिनी ने दरवाजा खोला, उसके गोरे बदन और लाल साड़ी में जोसेफ की नजरें बस उस पर ही टिक गईं। रागिनी ने मुस्कराकर कहा, “सर, आप लेट जाइए।”
स्पर्श और भावनाएँ
रागिनी ने खुशबूदार तेल हाथों में लिया और जोसेफ की पीठ पर डाल दिया। उसके मुलायम हाथों के स्पर्श से जोसेफ के पूरे शरीर में एक कसक सी दौड़ गई। धीरे-धीरे उसकी सारी थकान गायब होने लगी, मगर एक अजीब सी बेचैनी भी महसूस होने लगी – शारीरिक ही नहीं, भावनात्मक भी।
रागिनी के लिए यह रोज़ का काम था, लेकिन आज उसे कुछ अलग महसूस हो रहा था। जोसेफ की नजरों में वासना नहीं, अपनापन था। मसाज के दौरान दोनों की आँखें मिलीं, तो जैसे वक्त थम गया।
बढ़ती नजदीकियाँ
मसाज खत्म होने के बाद रागिनी ने पूछा, “सर, मुझे लग रहा है कि आपको किसी और चीज़ की भी जरूरत है?”
जोसेफ ने मुस्कराकर जवाब दिया, “हां, पर मुझे नहीं लगता कि यह सब यहां मुमकिन है।”
रागिनी ने साहस करके कहा, “मेरे पति एक हफ्ते के लिए शहर से बाहर हैं। मैं घर पर अकेली हूं। अगर आप चाहें तो मेरे घर आ सकते हैं। मुझे भी कुछ नया महसूस करना है, जो सिर्फ फिल्मों में देखा है।”
जोसेफ ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। रागिनी ने अपना नंबर दिया और कहा, “मैं आठ बजे छुट्टी लेकर घर पहुंच जाऊंगी, आप 8:30 पर आ जाइए।”
पहली रात
रात 8:30 बजे जोसेफ रागिनी के फ्लैट के पास पहुंचा। रागिनी ने काली सैटिन की ड्रेस पहनी थी, हल्का मेकअप और खुले बालों में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। घर की सजावट, हल्की खुशबू, और उसकी मुस्कान – सब कुछ परफेक्ट था।
दोनों ने साथ में व्हिस्की पी, बातें की, अपने-अपने देश और परिवार के बारे में बताया। धीरे-धीरे दोनों के बीच की झिझक खत्म हो गई। जोसेफ ने रागिनी का हाथ पकड़ा, फिर उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और कहा, “तुम्हारी आँखों में बहुत दर्द है।”
रागिनी की आँखें भर आईं। आज तक किसी ने उसकी खूबसूरती के पीछे का दर्द नहीं देखा था। वह जोसेफ के गले लगकर रो पड़ी। जोसेफ ने उसे सांत्वना दी, और फिर दोनों के बीच वह हुआ, जो दोनों चाहते थे। रातभर वे एक-दूसरे में खोए रहे, हर पल को जीते रहे।
तीन दिन का प्यार
अगले तीन दिन दोनों ने साथ बिताए। कभी बालकनी में चाय पीते, कभी समंदर की लहरें देखते, कभी एक-दूसरे की बाहों में खो जाते। रागिनी को लगा कि जोसेफ के साथ उसे सच्चा प्यार मिल गया है। जोसेफ ने भी कहा, “ये तीन दिन मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन हैं।”
रागिनी ने दिल से चाहा कि जोसेफ उसे अपने साथ ले जाए, पर जोसेफ ने कहा, “हमारे अपने-अपने परिवार हैं। मैं नहीं चाहता कि दो घर टूट जाएं। हमारा रिश्ता एक खूबसूरत सपना था, हकीकत नहीं बन सकता।”
रागिनी फूट-फूटकर रो पड़ी, लेकिन उसने जोसेफ की बात समझी। जोसेफ ने वादा किया, “मैं जब भी इंडिया आऊंगा, तुमसे जरूर मिलूंगा।”
अधूरी कहानी
जोसेफ के जाने के बाद रागिनी का फ्लैट उसे जेल जैसा लगने लगा। हर कोना, हर चीज़ उसे जोसेफ की याद दिलाती थी। वह फिर से पार्लर जाने लगी, लेकिन अब किसी और पुरुष का स्पर्श उसे अच्छा नहीं लगता था। वह बस जिंदा लाश बनकर रह गई थी।
एक दिन उसके फोन पर जोसेफ का मैसेज आया – “I miss you, Ragini.”
रागिनी की आंखों में आंसू आ गए। उसे जीने की एक नई वजह मिल गई थी।
सच सामने
कुछ महीनों बाद विक्रम वापस आया। उसने रागिनी में बदलाव महसूस किया – वह पहले से ज्यादा चुप और खोई-खोई रहती थी। एक दिन जोसेफ फिर मुंबई आया। रागिनी ने ऑफिस ट्रिप का बहाना बनाकर होटल में उससे मुलाकात की। दोनों ने फिर दो दिन साथ बिताए।
लेकिन इस बार विक्रम को शक हो गया। उसने होटल में जाकर दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। गुस्से में विक्रम ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने दोनों से पूछताछ की। जोसेफ ने पुलिस के सामने कहा, “मैं रागिनी से शादी करना चाहता हूं।”
नया मोड़
विक्रम ने रागिनी को अपनाने से मना कर दिया। पुलिस की मौजूदगी में ही जोसेफ और रागिनी ने शादी कर ली। अब रागिनी की जिंदगी में एक नया मोड़ आ गया था।
समाप्त
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