एक ऐसी हंसी… जिसकी कीमत जान से चुकानी पड़ी |

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हंसी की कीमत

अध्याय 1: एक खुशहाल परिवार

विशाला गणिका एक हंसमुख, बातूनी और बेहद मिलनसार महिला थी। वह कर्नाटक के उडुपी जिले के मिलन अपार्टमेंट में अपने पति रामकृष्ण और सात साल की बेटी आरवी के साथ रहती थी। रामकृष्ण दुबई में एक कंपनी में नौकरी करता था, लेकिन जब भी भारत आता, परिवार के साथ समय बिताता। विशाला का मायका भी इसी जिले में था, इसलिए भारत आना-जाना लगा रहता था।
उनका जीवन सामान्य था—दोनों की शादी अरेंज थी, रिश्ता प्यार और भरोसे से भरा था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

अध्याय 2: एक मुस्कान की शुरुआत

29 जून 2021 को विशाला अपनी बेटी के साथ भारत आई। कुछ दिनों बाद उसके मायके वाले उससे मिलने आए। 12 जुलाई की सुबह विशाला ने अपने पिता को बेटी सौंप दी और कहा कि बैंक से पैसे निकालने जा रही है। वह ऑटो में बैठकर निकल गई।
परिवार उसका इंतजार करता रहा, लेकिन कई घंटे बीतने के बाद भी वह नहीं लौटी। चिंता बढ़ी, फोन किया गया, लेकिन विशाला ने जवाब नहीं दिया। पिता ने सोचा कि वह फ्लैट में होगी और वहां जाकर देखा। दरवाजा खुला था, सामान बिखरा पड़ा था, और फर्श पर विशाला बेहोश पड़ी थी।

अध्याय 3: मौत का सन्नाटा

पिता ने देखा, विशाला की सांसें थम चुकी थीं। बहन रोने लगी। पुलिस को बुलाया गया। घर में लूटपाट के निशान थे, गहने गायब थे। फॉरेंसिक टीम आई, जांच हुई। विशाला के गले पर चार्जर के तार के निशान थे—पुलिस ने समझ लिया कि गला घोंटकर हत्या की गई है।
पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा गया। पुलिस ने अनजान लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। अखबारों में खबर छपी—एक एनआरआई महिला की बेरहमी से हत्या।
विशाला के पति रामकृष्ण को दुबई में खबर मिली, वह सदमे में भारत लौट आया।

अध्याय 4: जांच की उलझन

पुलिस ने जांच शुरू की। सबसे पहले परिवार से पूछताछ हुई—क्या किसी से दुश्मनी थी? क्या शादी से पहले कोई प्रेम संबंध था? पिता ने सब से इंकार किया।
बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि विशाला उस दिन बैंक गई ही नहीं थी। फिर वह फ्लैट क्यों लौटी?
पुलिस ने कॉल डिटेल्स खंगाली। आखिरी कॉल उसके पति रामकृष्ण ने किया था। बातचीत सामान्य थी। मगर रामकृष्ण की कॉल हिस्ट्री में एक अनजान नंबर पर व्हाट्सएप कॉल मिला, जिससे पुलिस को शक हुआ।

अध्याय 5: साजिश की परतें

रामकृष्ण से सख्ती से पूछताछ की गई। पहले वह टालता रहा, फिर टूट गया। उसने कबूल किया कि उसने ही अपनी पत्नी की हत्या की सुपारी दी थी।
दरअसल, रामकृष्ण को विशाला का हंसना, बातूनी होना और दूसरों से मिलना-जुलना पसंद नहीं था। उसे शक था कि उसकी पत्नी का अफेयर चल रहा है। वह अपनी पत्नी को छोड़ना नहीं चाहता था, लेकिन शक उसके मन में जहर बन गया।
उसने अपने दोस्त धर्मेंद्र से बात की, जिसने भारत में सुपारी किलर स्वामीनाथन निषाद और उसके साथी रोहित राणा से संपर्क कराया। ₹5 लाख में हत्या की डील हुई—₹2 लाख एडवांस और बाकी काम के बाद।

अध्याय 6: मौत का दिन

12 जुलाई की सुबह रामकृष्ण ने विशाला को फोन किया कि बैंक से पैसे निकालने हैं। रास्ते में उसने कहा कि उसके दोस्त फ्लैट के बाहर पार्सल के साथ खड़े हैं। विशाला फ्लैट पहुंची, दोनों को घर बुलाया, चाय बनाई। पार्सल में मेकअप और बेटी के लिए गिफ्ट्स थे।
चाय खत्म होने के बाद, रोहित ने चार्जर मांगकर विशाला के गले में तार लपेटा और स्वामीनाथन ने हाथ-पैर पकड़ लिए। कुछ ही पलों में विशाला की सांसें थम गईं। गहने उतार लिए, घर का सामान बिखेर दिया और दोनों फरार हो गए।

अध्याय 7: कानून का शिकंजा

पुलिस ने जांच की, सीसीटीवी न होने की वजह से दिक्कत आई, लेकिन कॉल डिटेल्स, बैंक रिकॉर्ड और फ्लैट के सबूतों से साजिश का पर्दाफाश हुआ।
गोरखपुर पुलिस की मदद से स्वामीनाथन को नेपाल बॉर्डर के पास और रोहित को मुंबई से गिरफ्तार किया गया। धर्मेंद्र को भी बाद में लखनऊ एयरपोर्ट से पकड़ा गया।
रामकृष्ण, स्वामीनाथन और रोहित जेल में बंद हैं। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, मुकदमा चल रहा है।

अध्याय 8: सवाल और सबक

विशाला का परिवार टूट चुका है। सात साल की बेटी मां के बिना रह गई।
पूरे समाज में चर्चा है—क्या किसी की हंसी उसकी मौत की वजह बन सकती है?
पुलिस ने कॉल डिटेल्स देखी, उसमें कोई अफेयर या गलत संबंध नहीं मिला। विशाला बस हसमुख थी, बातूनी थी, सबका दिल जीतने वाली थी।
रामकृष्ण का शक बेबुनियाद था, लेकिन उसने शक के दम पर अपनी पत्नी की जिंदगी छीन ली।

अंतिम संदेश

यह कहानी एक हंसी की कीमत है।
एक महिला की आज़ादी, उसकी बातूनी फितरत, उसकी मुस्कान—इन सबको उसका पति समझ नहीं सका।
शक ने रिश्ते को मार डाला, एक मासूम बच्ची को मां से जुदा कर दिया।
आज सभी आरोपी जेल में हैं, कानून अपना काम कर रहा है।
लेकिन सवाल अब भी जिंदा है—क्या भरोसे की हत्या सबसे पहले रिश्तों को मारती है?

जय हिंद।