कब्र से बाहर निकाला गया शबनम का शव, अब लाश खुद खोलेगी अपनी मौ’त का राज
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बुलंदशहर: दहेज की बलि चढ़ी एक और बेटी? 16 महीने पुरानी दुल्हन की संदिग्ध मौत, 10 दिन बाद कब्र खोदकर निकाला गया शव
बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवीय संवेदनाओं और कानून-व्यवस्था, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक घर जहाँ महज 16 महीने पहले शहनाइयां गूंजी थीं और एक बेटी दुल्हन बनकर आई थी, वहां अचानक मातम छा गया। लेकिन यह मातम स्वाभाविक नहीं, बल्कि साजिशों के घेरे में है। विवाहिता की मौत के बाद बिना किसी को सूचना दिए और बिना पोस्टमार्टम कराए उसे आनन-फानन में दफना दिया गया। अब 10 दिन बाद प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्र खुदवाकर शव को बाहर निकाला है ताकि सच का पता चल सके।
घटना का विवरण: खुशियों का दुखद अंत
यह पूरा मामला बुलंदशहर के कस्बा सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र की ‘नई बस्ती’ का है। जानकारी के अनुसार, यहाँ के रहने वाले सलमान खान का निकाह लगभग 16 महीने पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली की रहने वाली शबनम के साथ बड़ी धूमधाम से हुआ था। निकाह के समय परिवार ने अपनी हैसियत के अनुसार दान-दहेज भी दिया था, लेकिन ससुराल वालों की भूख कम नहीं हुई।
परिजनों का आरोप है कि निकाह के कुछ समय बाद से ही शबनम को अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का दौर चलता रहा, जिसका अंत 10 दिन पहले एक खौफनाक वारदात के साथ हुआ।
गुपचुप तरीके से दफनाया गया शव
लगभग 10 दिन पहले संदिग्ध परिस्थितियों में शबनम की मौत हो गई। कायदे से इस मामले में मायके वालों को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए था और पुलिस की मौजूदगी में कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी। लेकिन ससुराल पक्ष ने इसके उलट काम किया। उन्होंने न तो शबनम के पिता को जानकारी दी और न ही पुलिस को भनक लगने दी। सबूतों को मिटाने और मामले को रफा-दफा करने के उद्देश्य से उन्होंने जल्दबाजी में शबनम के शव को सुपुर्दे-खाक (दफन) कर दिया।
जब शबनम के पिता को पड़ोसियों या अन्य माध्यमों से बेटी की मौत की खबर मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत सिकंदराबाद पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पिता की गुहार और पुलिस की कार्रवाई
10 मार्च को मृतिका शबनम के पिता ने हिम्मत जुटाई और सिकंदराबाद कोतवाली में तहरीर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की गला दबाकर हत्या की गई है। पिता ने अपनी शिकायत में शबनम के पति सलमान, सास-ससुर और देवर सहित कुल पांच लोगों को नामजद किया है।
पिता ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) को एक भावुक पत्र लिखकर मांग की कि उनकी बेटी की मौत का सच जानने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया जाए। मामले की गंभीरता और दहेज हत्या के गंभीर आरोपों को देखते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत आदेश जारी किए।
मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में खोदी गई कब्र
प्रशासन के आदेश के बाद, भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कब्रिस्तान में शबनम की कब्र को दोबारा खुदवाया गया। इस दौरान सीओ सिकंदराबाद भास्कर कुमार मिश्रा और अन्य आला अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। 10 दिन पुराने शव को बाहर निकाला गया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
वहां मौजूद लोगों की आंखें उस वक्त नम हो गईं जब एक पिता अपनी बेटी के इंसाफ के लिए उसकी कब्र के पास खड़ा होकर बिलख रहा था।
[Image description: A police-cordoned area in a graveyard in Uttar Pradesh with officials and a small crowd gathered under medical supervision.]
दहेज हत्या या कुछ और? पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला दहेज उत्पीड़न और हत्या का प्रतीत होता है, लेकिन मौत की असली वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
पुलिस का बयान: सीओ भास्कर कुमार मिश्रा ने बताया, “मृतिका के परिजनों की शिकायत पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट में अगर गला दबाने या चोट के निशान मिलते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
आरोपियों की स्थिति: फिलहाल आरोपी पक्ष के सदस्य पुलिस की रडार पर हैं। शव दफनाने के बाद से ही इलाके में तनाव और चर्चा का माहौल है।
समाज के लिए एक बड़ा सवाल
बुलंदशहर की यह घटना एक बार फिर समाज में गहराई तक फैली ‘दहेज’ जैसी कुप्रथा की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। 16 महीने के छोटे से वैवाहिक जीवन का इस तरह अंत होना न केवल एक परिवार की तबाही है, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे की विफलता भी है। क्या एक बेटी की जान की कीमत चंद रुपयों और सामान से कम है?
निष्कर्ष और आगे की राह
फिलहाल पूरे इलाके की नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं। शबनम के पिता और उसके मायके वाले केवल एक ही चीज की मांग कर रहे हैं—इंसाफ। यदि शबनम की हत्या हुई है, तो उन पांचों नामजद आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
यह मामला उन सभी परिवारों के लिए एक सबक है जो बेटियों को बोझ समझते हैं या जो दहेज के लोभ में आकर किसी की जान लेने से भी नहीं हिचकिचाते।
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