कॉलेज में पढ़ाई करने गई लड़की के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/S.P साहब के भी रोंगटे खड़े हो गए/
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शिक्षा के मंदिर से हवस की अंधेरी कोठरी तक: इंदौर की रचना के साथ हुआ भयावह हादसा
इंदौर, मध्य प्रदेश: इंदौर के हथलेवा गाँव से ताल्लुक रखने वाली 19 वर्षीय रचना (बदला हुआ नाम) का सपना एक डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना था। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस ऊंचे मुकाम को पाने के लिए वह अपने गाँव से 60 किलोमीटर दूर पढ़ने जा रही है, वही सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। यह घटना उन सभी मां-बाप के लिए एक चेतावनी है, जो अपनी बेटियों को बाहर पढ़ने भेजते हैं, और उन मकान मालिकों के चेहरे से नकाब उतारती है जो रक्षक के भेष में भक्षक बने बैठे हैं।
सपनों की उड़ान और पिता का संघर्ष
हथलेवा गाँव के निवासी जिले सिंह एक साधारण मिठाई विक्रेता थे। उनकी ईमानदारी और मेहनत की मिसाल पूरा गाँव देता था। उनकी इकलौती बेटी रचना पढ़ाई में अत्यंत मेधावी थी। जब उसने 12वीं कक्षा की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की, तो गाँव के हर शख्स की जुबान पर एक ही बात थी—”बेटी हो तो रचना जैसी।”
रचना का सपना डॉक्टर बनने का था। जिले सिंह ने अपनी आर्थिक तंगी को बेटी की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी जमा-पूंजी लगाकर शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में उसका दाखिला कराया। शुरुआत में रचना हर रोज बस से 120 किलोमीटर (आना-जाना) का सफर तय करती थी, लेकिन इस भागदौड़ में उसकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा था। अपनी पढ़ाई को बेहतर समय देने के लिए उसने कॉलेज के पास ही कमरा लेने का फैसला किया।

किराए का कमरा या मौत का जाल?
10 दिसंबर 2025 को रचना ने अपने पिता की अनुमति से कॉलेज के पास एक गाँव में कमरा किराए पर लिया। वहाँ उसकी सहेली ‘अनु’ पहले से ही रहती थी। जिस मकान में वे रुकी थीं, उसका मालिक राजेंद्र नाम का एक व्यक्ति था। राजेंद्र शारीरिक रूप से एक आंख से अक्षम था, लेकिन उसका मानसिक चरित्र कहीं अधिक विकृत था।
राजेंद्र ने अपने घर के कमरों, बाथरूम और यहाँ तक कि टॉयलेट में भी हिडन कैमरे (Hidden Cameras) लगा रखे थे। रचना इस बात से पूरी तरह अनजान थी। राजेंद्र ने पहले ही अनु की कुछ आपत्तिजनक वीडियो बना रखी थीं और उन्हीं के दम पर वह पिछले कई महीनों से अनु का शारीरिक शोषण कर रहा था।
ब्लैकमेलिंग और शोषण का सिलसिला
जैसे ही रचना उस कमरे में रहने आई, राजेंद्र की भूखी निगाहें उस पर टिक गईं। उसने हिडन कैमरों के जरिए रचना की भी आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड कर लीं। 17 दिसंबर 2025 की रात, राजेंद्र ने रचना को अपने कमरे में बुलाया। जब रचना ने इनकार किया, तो उसने उसे वे वीडियो दिखाए और धमकी दी कि यदि उसने उसकी बात नहीं मानी, तो वह इन्हें इंटरनेट पर वायरल कर देगा।
अपनी इज्जत और पिता की पगड़ी की लाज बचाने के लिए रचना मजबूर हो गई। राजेंद्र ने न केवल उसका शोषण किया, बल्कि उसे डरा-धमकाकर खामोश कर दिया। वह हर रात रचना और अनु दोनों को बारी-बारी से अपने कमरे में बुलाने लगा।
24 दिसंबर की वह काली रात: दरिंदगी की पराकाष्ठा
24 दिसंबर को जिले सिंह अपनी बेटी से मिलने आए थे। उन्होंने महसूस किया कि रचना उदास है, लेकिन रचना ने अपनी गरिमा और डर के कारण कुछ नहीं बताया। जिले सिंह के जाने के बाद, राजेंद्र ने अपने दो दोस्तों—अमर और विवेक—को बुलाया। वह इतना गिर चुका था कि उसने ₹5000 के लिए अपनी किराएदार लड़कियों का सौदा अपने दोस्तों से कर दिया।
रात करीब 9:30 बजे, राजेंद्र ने शक्तिवर्धक दवाइयां और शराब का सेवन करने के बाद रचना को जबरन अपने कमरे में बुलाया। वहाँ अमर और विवेक भी मौजूद थे। नशे में धुत उन तीनों दरिंदों ने रचना के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया।
जब उन दरिंदों की हैवानियत हद से बढ़ गई, तो रचना ने विरोध करते हुए राजेंद्र को धक्का दिया। गुस्से में पागल राजेंद्र ने पास ही रखा एक भारी फूलदान (Vase) उठाकर रचना के सिर पर दे मारा। सिर पर गहरी चोट लगने के कारण रचना ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
रूह कंपा देने वाला कृत्य: लाश के साथ दुष्कर्म
रचना की मृत्यु के बाद भी उन दरिंदों का मन नहीं भरा। उन्होंने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। नशे और हवस के जुनून में अमर, विवेक और राजेंद्र ने रचना की लाश के साथ भी दुष्कर्म (Necrophilia) किया। यह खुलासा होने के बाद खुद एस.पी. (S.P.) साहब के भी रोंगटे खड़े हो गए।
खुलासा और गिरफ्तारी
रात करीब 11:30 बजे, राजेंद्र ने अनु को फोन किया और उसे यह कहकर बुलाया कि “तुम्हारी सहेली बेहोश हो गई है।” जैसे ही अनु ने कमरे में प्रवेश किया, उसने खून से लथपथ रचना की लाश देखी। अनु की चीखें सुनकर पड़ोसी जाग गए और उन्होंने भागने की कोशिश कर रहे तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रचना का शव बरामद किया और तीनों दरिंदों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में राजेंद्र ने कबूल किया कि वह अब तक 16 लड़कियों के साथ इस तरह के घिनौने काम कर चुका था और उन्हें हिडन कैमरों के जरिए ब्लैकमेल करता था।
निष्कर्ष और सीख
रचना आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी मौत समाज और प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
सुरक्षा की जांच: क्या हम अपनी बेटियों को कहीं भी कमरा दिलाते समय मकान मालिक की पृष्ठभूमि की जांच करते हैं?
तकनीक का दुरुपयोग: हिडन कैमरों का बढ़ता चलन एकांत को असुरक्षित बना रहा है।
चुप्पी का परिणाम: यदि अनु या रचना ने शुरुआत में ही पुलिस या परिवार को बताया होता, तो शायद आज रचना जीवित होती।
हमारी सलाह: जब भी बाहर कमरा लें, तो ‘हिडन कैमरा डिटेक्टर’ ऐप या साधारण तरीके से कमरे के हर कोने की जांच जरूर करें। किसी भी प्रकार की ब्लैकमेलिंग होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
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