खाकी भी असुरक्षित: ड्यूटी से घर लौट रही महिला सब-इंस्पेक्टर के साथ खौफनाक वारदात, जांबाज अफसर की हालत देख फफक पड़े कप्तान।
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बरेली, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसने न केवल पुलिस विभाग को शर्मसार किया है, बल्कि समाज में सुरक्षा के दावों पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला दरोगा, जो दिन भर अपराधियों से लोहा लेती है, वह खुद एक शातिर ऑटो ड्राइवर की साजिश का शिकार हो गई। इस घटना ने न केवल पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है, बल्कि एक जांबाज महिला अधिकारी के जीवन को भी अंधकार में धकेल दिया है।
1. पृष्ठभूमि: कर्तव्य और संघर्ष की कहानी
बरेली के पीलीभीत शहर की ‘चित्रा कॉलोनी’ के मकान नंबर ५६/१८५ में रहने वाली काजल देवी (३६ वर्ष) की पहचान एक कड़क और ईमानदार महिला दरोगा के रूप में थी। काजल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। तीन साल पहले एक सड़क हादसे में अपने पति को खोने के बाद, काजल पूरी तरह टूट गई थीं। लेकिन अपने १२ साल के बेटे ‘टिंकू’ के भविष्य के लिए उन्होंने खुद को संभाला।
काजल की दिनचर्या बेहद अनुशासित थी—सुबह ८ बजे स्कूटी से थाने जाना और शाम को देर से घर लौटना। हालांकि, पति की मृत्यु के गम ने उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर दिया था, जिसके चलते वह कभी-कभी शराब का सहारा लेने लगी थीं। यही कमजोरी आगे चलकर उनके लिए काल बन गई।

2. अपराधी का प्रवेश: अनूप सिंह और उसकी गंदी नीयत
चित्रा कॉलोनी में ही करीब तीन महीने पहले एक ऑटो ड्राइवर ‘अनूप सिंह’ किराए पर रहने आया था। अनूप के बारे में कॉलोनी के लोग अधिक नहीं जानते थे, लेकिन उसकी हरकतें संदिग्ध थीं। वह दिन भर ऑटो चलाकर जो कमाता, उसे शराब और अय्याशी में उड़ा देता था।
१२ दिसंबर २०२५ को एक घटना घटी जिसने काजल और अनूप को आमने-सामने ला खड़ा किया। अनूप एक ‘विमला’ नाम की महिला को अपने कमरे पर लेकर आया था। जब पड़ोसन करुणा देवी ने इसकी शिकायत दरोगा काजल देवी से की, तो काजल ने मौके पर पहुँचकर अनूप को जमकर फटकार लगाई और विमला को वहां से भगा दिया। उस समय अनूप काजल के पैरों में गिरकर गिरगिड़ाया, लेकिन उसके मन में बदले की आग सुलग चुकी थी। काजल ने निगरानी के लिए उसका मोबाइल नंबर ले लिया, जो उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
3. साजिश का दिन: २२ दिसंबर २०२५
२२ दिसंबर की सुबह काजल की स्कूटी खराब हो गई। बेटे को स्कूल छोड़ने और खुद थाने पहुँचने की जल्दी में उन्होंने अनूप सिंह को फोन किया। अनूप के लिए यह सुनहरा मौका था। उसने बड़ी ही ‘मिठास’ से बात करते हुए काजल का विश्वास जीता। उसने पहले बेटे टिंकू को स्कूल छोड़ा और फिर काजल को थाने। अनूप की इस मदद ने काजल के मन में उसके प्रति संदेह को खत्म कर दिया।
4. वो काली रात: शराब, नशा और दरिंदगी
शाम ७:३० बजे, काजल अपनी ड्यूटी खत्म कर थाने से बाहर निकलीं। पूर्व योजना के अनुसार अनूप अपना ऑटो लेकर बाहर खड़ा था। उस दिन काजल मानसिक रूप से काफी परेशान थीं। उन्होंने रास्ते में अनूप से शराब मंगवाई।
एक सुनसान इलाके में ऑटो रोककर काजल शराब पीने लगीं। शातिर अनूप ने मौके का फायदा उठाकर उन्हें जरूरत से ज्यादा शराब पिला दी, जिससे वह सुध-बुध खो बैठीं। जब काजल पूरी तरह नशे में धुत हो गईं, तो अनूप का असली चेहरा सामने आया। उसने शराब की बोतल तोड़कर कांच के टुकड़े से काजल को डराया और उन्हें झाड़ियों के पीछे ले जाकर उनके साथ दुष्कर्म किया।
5. दरिंदगी का बढ़ता दायरा: अंकित और विक्रम का प्रवेश
अनूप की हैवानियत यहीं नहीं रुकी। उसने अपने एक और ऑटो ड्राइवर दोस्त अंकित को फोन कर वहां बुला लिया। अंकित ने जब देखा कि शिकार एक पुलिस वाली है, तो वह पहले डरा, लेकिन अनूप ने उसे उकसाया। दोनों ने मिलकर उस बेसुध महिला अधिकारी के साथ बारी-बारी से दरिंदगी की।
हद तो तब हो गई जब वे काजल को उठाकर अनूप के कमरे पर ले आए ताकि पूरी रात उसका शोषण कर सकें। वहां उन्होंने अपने एक तीसरे दोस्त विक्रम को भी “बहती गंगा में हाथ धोने” के लिए बुलाया।
6. मोड़: जब एक अपराधी के भीतर का इंसान जागा
जैसे ही विक्रम कमरे के अंदर पहुँचा और उसने काजल देवी को आपत्तिजनक स्थिति में देखा, वह सन्न रह गया। उसने पहचान लिया कि यह कोई साधारण महिला नहीं बल्कि एक पुलिस अधिकारी है। विक्रम ने अपने दोस्तों को समझाने की कोशिश की, लेकिन नशे में चूर अनूप और अंकित नहीं माने।
विक्रम वहां से बहाना बनाकर निकला, लेकिन उसका जमीर जाग चुका था। उसने तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को फोन किया और पूरी घटना की जानकारी दी।
7. पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी
विक्रम की सूचना पर पुलिस ने तुरंत अनूप के कमरे पर छापा मारा। अंदर का नजारा देखकर पुलिसकर्मियों की आँखों में भी आँसू आ गए। उनकी अपनी सहयोगी, एक जांबाज दरोगा, वहां बेसुध और अपमानित अवस्था में पड़ी थी। पुलिस ने मौके से अनूप सिंह और अंकित को गिरफ्तार कर लिया।
8. जाँच और वर्तमान स्थिति
पूछताछ के दौरान अनूप और अंकित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने उनके खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस घटना ने बरेली पुलिस प्रशासन को हिला दिया है। विभाग के उच्च अधिकारियों (S.P. साहब) ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया है।
निष्कर्ष और सामाजिक संदेश
यह घटना एक चेतावनी है। एक रक्षक का भक्षक बन जाना और एक रक्षक का अपनी ही कमजोरी (नशा) के कारण शिकार हो जाना, दोनों ही चिंताजनक हैं। हालांकि, इस अंधेरी कहानी में विक्रम जैसे नागरिक की सजगता एक उम्मीद की किरण है, जिसने एक महिला की जान और सम्मान को और अधिक आहत होने से बचा लिया।
कानूनी चेतावनी: यह रिपोर्ट एक घटना के वृत्तांत पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति की पहचान और सम्मान की रक्षा करना समाज का सामूहिक दायित्व है।
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