गाजियाबाद लोनी में रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर के कत्ल में मास्टरमाइंड निकला यूपी पुलिस का सिपाही!
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गाजियाबाद लोनी में रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर के कत्ल का रहस्य: यूपी पुलिस का सिपाही निकला मास्टरमाइंड
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद थाना क्षेत्र के बरारी गांव में 28-29 जुलाई 2008 की रात एक भयानक घटना घटी। उस रात एक परिवार के बाप और बेटे ने मिलकर अपने ही परिवार के एक सदस्य, उनके चाचा, को धारदार हथियार से बेरहमी से मार डाला। वह चाचा ट्यूबवेल के पास सो रहा था। उसने अपनी जान बचाने के लिए बार-बार अपील की, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। बाप-बेटे ने उसे तब तक मारा जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।
उसके बाद वे दोनों गांव पहुंचे और वहां अपने ही परिवार की अन्य महिलाओं और बच्चो की हत्या कर डाली। इसमें एक गर्भवती भाभी भी शामिल थी, जिसे गोली लगी। एक अन्य भाभी के साथ उसका चार-पाँच साल का बच्चा था जो अपनी मां की गोद में दूध पी रहा था, लेकिन गोली उसी को भी छू गई। ये तस्वीरें अगले दिन अखबारों में छप गईं और पूरे देश में चर्चा का विषय बन गईं।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। पिता को जेल भेजा गया, जबकि नाबालिग बेटे को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। साल 2016 में पिता को फांसी की सजा सुनाई गई, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया। यह मामला वर्षों तक चर्चा में रहा।
साल 2025 में 17 साल बाद वही नाबालिग अब बड़ा हो चुका था और एक और हत्या करता है। इस हत्या ने फिर से उसके पुराने कुकृत्यों को उजागर कर दिया।
हत्या की घटना और जांच
26 दिसंबर 2025 को गाजियाबाद के लोनी थाना क्षेत्र के अशोक विहार इलाके में एक बुजुर्ग व्यक्ति की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। मृतक योगेश कुमार थे, जो इंडियन एयरफोर्स से रिटायर्ड वारंट ऑफिसर थे। उनकी उम्र लगभग 58 साल थी। घटना के वक्त वे फोन पर बात कर रहे थे, तभी दो बाइक सवार आए और उन पर हमला कर दिया। हमला इतना बेरहम था कि वे मौके पर ही दम तोड़ बैठे।
पुलिस को सूचना मिली और तुरंत फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वाड और सर्विलांस टीम मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि योगेश कुमार की हत्या की साजिश उनके अपने परिवार के सदस्यों और कुछ बाहरी लोगों ने मिलकर की थी।
योगेश कुमार की पत्नी लता, बेटा नितीश (जो दिल्ली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था), दूसरा बेटा गुड्डू (प्राइवेट कंपनी में कस्टमर रिव्यू मैनेजर), और बेटी प्रीति (शादीशुदा) थे। परिवार ने पुलिस को बताया कि उनकी किसी से दुश्मनी नहीं थी और परिवार में कोई विवाद नहीं था।
हत्या के पीछे की साजिश
पुलिस ने जांच शुरू की और 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। बाइक के नंबर से पता चला कि बाइक सलमान नाम के व्यक्ति की थी, जिसने इसे अपने दोस्त अरविंद कुमार को उधार दी थी। अरविंद कुमार बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद थाना क्षेत्र के बरारी गांव का निवासी था।
पुलिस ने अरविंद को पकड़ा। पूछताछ में उसने बताया कि योगेश कुमार अपने परिवार के सदस्यों को प्रताड़ित करता था। वह अपनी पत्नी लता को मारता-पीटता था और बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार करता था। इसके अलावा वह रंगीन मिजाज का था और कई महिलाओं के साथ संबंध रखता था। उसने अपने रिटायरमेंट फंड का कोई हिस्सा परिवार को नहीं दिया था और अपने ऐशो आराम की जिंदगी में मग्न था।
अरविंद कुमार ने बताया कि योगेश कुमार कुत्तों को मारता था, जबकि अरविंद उन्हें खाना खिलाता था। इसी वजह से अरविंद को योगेश से गहरा गुस्सा था। दोनों बेटों ने मिलकर पिता को हटाने का फैसला किया था क्योंकि वे उसके व्यवहार से परेशान थे और उसे जमीन-जायदाद बेचने से रोकना चाहते थे।
हत्या की योजना बनाने में नवीन नाम का एक पुलिस सिपाही शामिल था, जो उत्तर प्रदेश पुलिस के मीडिया सेल में तैनात था। नवीन अरविंद का साला था। नवीन की पत्नी भी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल थी। नवीन ने ही हत्या की योजना बनाई, हथियारों की व्यवस्था की और पूरा घटनाक्रम अंजाम दिया गया।
पुरानी वारदात का खुलासा
अरविंद कुमार की पुरानी हिस्ट्री भी पुलिस के सामने आई। 2008 में उसने अपने पिता के साथ मिलकर अपने ही चाचा, चाची, दो चचेरे भाइयों, दो चचेरी भाभियों और उनके बच्चों की हत्या कर दी थी। उस समय वह नाबालिग था, इसलिए उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया था।
मीडिया में यह खबर खूब छपी और चर्चा का विषय बनी। अब 17 साल बाद उसी व्यक्ति पर फिर से हत्या का आरोप लगा था। पुलिस ने उसे पकड़ लिया लेकिन उसके दोनों बेटे और नवीन फरार थे।
जांच की वर्तमान स्थिति
पुलिस ने कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही चार्जशीट अदालत में पेश की जाएगी। पुलिस इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है।
कहानी से सीख
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि पाप का घड़ा एक दिन भर जाता है। अरविंद कुमार को जिंदगी ने मौका दिया था कि वह एक सामान्य जीवन जी सके, लेकिन उसने गलत रास्ता चुना। उसके कारण न केवल उसकी खुद की जिंदगी बर्बाद हुई, बल्कि परिवार के कई सदस्यों की जिंदगी भी तबाह हो गई।
अंत में
इस कहानी का उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं, बल्कि जागरूक करना और सचेत करना है। अपराध चाहे कितना भी बड़ा हो, कानून और न्याय के हाथ लंबा होते हैं। हमें समाज में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सजग रहना चाहिए।
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