विश्वासघात और विनाश की खौफनाक दास्तान: बलरामपुर में मां-बेटी की हत्या और रिश्तों का कत्ल

बलरामपुर, उत्तर प्रदेश।

उत्तर प्रदेश के शांत माने जाने वाले बलरामपुर जिले के तुलसीपुर गांव से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने न केवल समाज को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि रिश्तों की पवित्रता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पुलिस कांस्टेबल द्वारा अपनी ही पत्नी और जवान बेटी की गोली मारकर हत्या करने के इस मामले के पीछे जो वजहें निकलकर सामने आई हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से भी ज्यादा पेचीदा और डरावनी हैं। यह कहानी है लालच, धोखे, अनैतिक संबंधों और अंततः एक भयावह अंत की।

एक खुशहाल परिवार के पीछे का कड़वा सच

तुलसीपुर गांव के निवासी दुष्यंत सिंह स्थानीय पुलिस स्टेशन में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। समाज की नजर में दुष्यंत एक रसूखदार व्यक्ति थे, जिनके पास छह एकड़ जमीन और एक अच्छा बैंक बैलेंस था। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे भ्रष्टाचार और लालच की एक काली दुनिया थी। दुष्यंत के बारे में कहा जाता है कि वे रिश्वतखोरी के आदी थे और बिना पैसे लिए किसी का काम नहीं करते थे। धन संचय की इसी अंधी दौड़ ने उन्हें अपने परिवार से दूर कर दिया था।

उनके परिवार में उनकी पत्नी माला देवी और 19 वर्षीय बेटी पिंकी देवी थी। माला देवी, जो अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती थी, अपने पति के लालची स्वभाव और काम के प्रति अत्यधिक व्यस्तता के कारण अक्सर अकेलापन महसूस करती थी। वहीं उनकी बेटी पिंकी, जिसने हाल ही में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी, भविष्य को लेकर दिशाहीन थी और घर के कामों में हाथ बंटाती थी।

नौकर की एंट्री और धोखे का जाल

दिसंबर 2025 की शुरुआत में घर के छोटे-मोटे कामों और खराब पड़े बिजली के उपकरणों को ठीक करवाने को लेकर दुष्यंत और माला के बीच अनबन हुई। दुष्यंत ने झुंझलाहट में एक नौकर रखने का सुझाव दिया। यहीं से इस त्रासदी की नींव पड़ी। माला देवी ने गांव के ही एक सब्जी बेचने वाले युवक, मनोज को नौकर के तौर पर रखने का प्रस्ताव दिया।

मनोज, जो एक साधारण पृष्ठभूमि से आता था, ₹13,000 की कुल पगार (जिसमें ₹5,000 माला देवी अपनी तरफ से ‘अतिरिक्त सेवा’ के बदले देने वाली थी) पर काम करने को राजी हो गया। लेकिन यह ‘अतिरिक्त सेवा’ घर के काम नहीं, बल्कि माला देवी की अनैतिक जरूरतों को पूरा करना था। जल्द ही, पुलिस की गैर-मौजूदगी में घर के अंदर अवैध संबंधों का खेल शुरू हो गया।

जब बेटी भी उसी राह पर चल पड़ी

कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब दुष्यंत की बेटी पिंकी की नजर भी मनोज पर पड़ी। 15 दिसंबर 2025 को जब माला देवी घर पर नहीं थी, पिंकी ने मनोज को अपने जाल में फंसा लिया। विडंबना यह थी कि माला देवी जिस मनोज को अपना प्रेमी समझ रही थी, उसी मनोज को उसकी बेटी ‘भैया’ कहकर बुलाने लगी ताकि समाज और अपनी मां की नजरों में वह सुरक्षित रहे।

पिंकी ने मनोज को शहर के एक होटल में ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए। अब स्थिति यह थी कि एक ही घर की मां और बेटी, एक ही नौकर के साथ गुप्त रूप से संबंध बना रही थीं और एक-दूसरे से अनजान थीं। मनोज दोनों से पैसे भी वसूल रहा था और उनके शारीरिक शोषण का हिस्सा भी बना हुआ था।

पाप का घड़ा और समाज की नजरें

कहते हैं कि पाप चाहे कितनी भी सावधानी से किया जाए, वह छिपता नहीं है। मनोज के पड़ोस में रहने वाली राधा देवी ने माला देवी और पिंकी को अलग-अलग समय पर मनोज के घर आते-जाते देख लिया था। धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई कि दरोगा जी की पत्नी और बेटी का चाल-चलन संदिग्ध है। गांव की गलियों में होने वाली कानाफूसी ने दुष्यंत के कानों तक पहुंचने में देर नहीं लगाई।

अस्पताल का खुलासा और खूनी अंत

24 जनवरी 2026 को इस घटना ने अंतिम रूप लेना शुरू किया। पिंकी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर माला देवी उसे अस्पताल ले गई। वहां जो खुलासा हुआ उसने माला के पैरों तले जमीन खिसका दी—पिंकी गर्भवती थी। चौंकाने वाली बात यह थी कि जब माला ने अपना चेकअप कराया, तो वह भी गर्भवती पाई गई।

घर लौटते ही मां-बेटी के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने एक-दूसरे पर “मुंह काला करने” का आरोप लगाया। उसी शाम, जब दुष्यंत घर लौटे, तो उनका सामना उस कड़वी सच्चाई से हुआ जिसने उनके सम्मान को मिट्टी में मिला दिया था। गांव वालों के तानों और पत्नी-बेटी के कुकर्मों के खुलासे ने दुष्यंत के भीतर के संयम को तोड़ दिया।

आवेश में आकर दुष्यंत ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर निकाली और अपनी पत्नी माला और बेटी पिंकी पर गोलियां चला दीं। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

कानून और समाज के समक्ष प्रश्न

पुलिस ने मौके से दुष्यंत को गिरफ्तार कर लिया है। राज किशोर नामक पड़ोसी की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। दुष्यंत ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, लेकिन अब समाज के सामने कई सवाल खड़े हैं:

नैतिकता का पतन: क्या एक नौकर के लिए मां और बेटी का अपनी गरिमा बेचना समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा नहीं है?

भ्रष्टाचार का असर: क्या दुष्यंत का केवल पैसे के पीछे भागना और परिवार को समय न देना इस त्रासदी की एक वजह था?

कानून अपने हाथ में लेना: क्या एक पुलिस अधिकारी होने के नाते दुष्यंत को कानून हाथ में लेकर हत्या करने का अधिकार था?


निष्कर्ष: यह घटना हमें चेतावनी देती है कि रिश्तों में संवाद की कमी और अनैतिकता केवल विनाश की ओर ले जाती है। जहां एक ओर माला और पिंकी के चरित्र ने समाज को शर्मसार किया, वहीं दुष्यंत के हिंसक कृत्य ने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया। फिलहाल मामला अदालत में है, जहां दुष्यंत के भाग्य का फैसला होगा।