घर लौट रही महिला टीचर के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/ऑटो ड्राइवर महिला को खेत में ले गया/

.\
.

घर लौटती महिला टीचर के साथ हादसा: एक साहसिक संघर्ष की कहानी

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की कल्याणपुर शहर के गुप्ता कॉलोनी में रहने वाली सुमित्रा देवी एक स्कूल टीचर थीं। उनके परिवार में एक इकलौता बेटा सोनू था, जो पांचवीं कक्षा में पढ़ता था, और मां कृष्णा देवी, जिनका सहारा सुमित्रा ही थी। पति की तीन साल पहले कार दुर्घटना में मौत हो गई थी, इसलिए घर की सारी जिम्मेदारी सुमित्रा देवी के कंधों पर थी।

रोज़मर्रा की जिंदगी और भरोसा

हर सुबह सुमित्रा देवी ऑटो रिक्शा से स्कूल जाती थीं। एक दिन उनका नियमित ऑटो ड्राइवर नहीं आया, तो उन्होंने पड़ोस के सुनील नामक युवक को बुलाया, जो ऑटो चलाता था। सुनील की ऑटो पुरानी थी, लेकिन सुमित्रा ने उस पर भरोसा किया। सुनील ने सुमित्रा को स्कूल छोड़ा, और धीरे-धीरे वह रोज़ का ड्राइवर बन गया। एक बार सुनील ने अपनी ऑटो ठीक करवाने के लिए सुमित्रा से ₹15,000 मांगे, सुमित्रा ने बिना हिचकिचाए पैसे दे दिए।

सुनील की बदलती नियत

एक महीने तक सब ठीक चलता रहा। लेकिन 8 अक्टूबर 2025 को, सुनील की नियत बदल गई। उसे सुमित्रा देवी आकर्षक लगी और उसने उनके साथ गलत हरकत करने का मन बना लिया। उस दिन सुमित्रा स्कूल जाने के लिए तैयार हुईं, सुनील ने उन्हें स्कूल छोड़ा। शाम को सुमित्रा ने कपड़े खरीदने की बात कही, सुनील ने उन्हें शॉपिंग के लिए शहर ले गया। लेकिन उसके मन में कुछ और ही चल रहा था।

हादसे की शुरुआत

शाम को जब सुमित्रा देवी शॉपिंग करके लौट रही थीं, सुनील उन्हें ऑटो में बैठाकर घर की ओर ले चला। रास्ते में एक सुनसान इलाका आया, वहां उसने ऑटो रोक दी। बहाना बनाया कि ऑटो खराब हो गई है। सुमित्रा उतर गईं, तभी सुनील ने हथियार निकालकर धमकी दी—”अगर चिल्लाई तो जान से मार दूंगा।” डर के मारे सुमित्रा चुप रहीं। सुनील ने उन्हें खेत में घसीट लिया और उनके साथ गलत काम किया।

ब्लैकमेलिंग और दूसरा अपराध

इतना ही नहीं, सुनील ने अपने दोस्त राजीव को फोन किया। राजीव भी ऑटो चालक था। उसने सुमित्रा की आपत्तिजनक वीडियो बनाई और दोनों ने मिलकर सुमित्रा को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। “अगर किसी को बताया, तो वीडियो वायरल कर देंगे।” सुमित्रा डर गईं, किसी को कुछ नहीं बताया। कई दिन तक स्कूल भी नहीं गईं।

होटल में फिर से शोषण

17 अक्टूबर को सुनील और राजीव ने फिर फोन किया, धमकी दी कि होटल में आओ, नहीं तो वीडियो वायरल कर देंगे। मजबूर होकर सुमित्रा ने मां से झूठ बोला कि सहेली के बेटे का जन्मदिन है, और होटल चली गईं। वहां दोनों ने फिर से गलत काम किया और धमकी दी कि जब भी बुलाएंगे, आना पड़ेगा, वरना बेटे और मां की जान भी खतरे में है।

पैसों की मांग और लगातार ब्लैकमेलिंग

फिर दोनों ने पैसों की मांग शुरू कर दी। लाखों रुपए मांगे, और धमकी दी कि वीडियो डिलीट नहीं करेंगे, बार-बार पैसे लेते रहेंगे। सुमित्रा ने डर के मारे बैंक से पैसे निकालकर दोनों को दे दिए, लेकिन वे नहीं रुके। अब सुमित्रा को एहसास हुआ कि ये दोनों उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे।

साहसिक फैसला और अंत

25 अक्टूबर को राजीव ने फिर होटल बुलाया। इस बार सुमित्रा ने ठान लिया कि अब इन दोनों का अंत करना है। रात को रसोई से धारदार चाकू छिपाकर होटल गई। दोनों नशे में थे, सुमित्रा ने मौका देखकर सुनील के पेट में चाकू घोंप दिया, फिर राजीव पर हमला किया। दोनों लहूलुहान हो गए, होटल मालिक ने शोर सुना और पुलिस को बुलाया। पुलिस आई, दोनों युवक मर चुके थे। सुमित्रा देवी को गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ और अदालत का इंतजार

पुलिस ने जब पूछताछ की, सुमित्रा ने पूरी कहानी बता दी। पुलिस भी सुनकर हैरान रह गई। अब अदालत तय करेगी कि सुमित्रा देवी को क्या सजा मिलेगी। सवाल यह है—क्या सुमित्रा का कदम सही था? क्या मजबूरी में उठाया गया यह साहसिक कदम जायज था या कानून को हाथ में लेना गलत है?

निष्कर्ष

यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं की है जो समाज में अकेले संघर्ष करती हैं, कभी-कभी भरोसा गलत जगह कर बैठती हैं, और फिर शोषण का शिकार होती हैं। सुमित्रा देवी ने डर, ब्लैकमेलिंग और अपमान के खिलाफ साहस दिखाया, लेकिन कानून का फैसला भविष्य के गर्भ में है।