जब भी लड़की साइकिल से स्कूल कई बूढ़ा देखता था !

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अनंतपुर की मर्यादा: एक विश्वासघात और न्याय की कहानी

प्रस्तावना

यह कहानी गोवा के एक शांत और सुरम्य गाँव ‘अनंतपुर’ की है। 2 मई 2016 की यह घटना आज भी वहां के लोगों के जेहन में ताज़ा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि समाज में छिपे हुए भेड़ियों से सावधान रहना कितना आवश्यक है, और न्याय की जीत अंततः होकर ही रहती है।

सुनैना: सपनों की उड़ान

अनंतपुर गाँव में सुनैना नाम की एक 15 वर्षीय किशोरी अपने माता-पिता के साथ रहती थी। सुनैना न केवल दिखने में बेहद खूबसूरत थी, बल्कि वह पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत कुशाग्र थी। उसके पिता गाँव के ही एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और उसकी माँ एक आदर्श गृहिणी थीं। सुनैना का परिवार गाँव में बहुत सम्मानित माना जाता था।

सुनैना दसवीं कक्षा की छात्रा थी। उसका स्कूल गाँव से थोड़ी दूरी पर था, इसलिए वह प्रतिदिन अपनी साइकिल से स्कूल जाया करती थी। उसकी दिनचर्या बहुत सरल थी—समय पर स्कूल जाना और पढ़ाई खत्म कर सीधे घर लौट आना। लेकिन नियति ने उसके लिए कुछ और ही लिख रखा था।

रामलाल: मुखौटे के पीछे का सच

सुनैना के रास्ते में एक पुरानी पुलिया पड़ती थी, जहाँ अक्सर गाँव का एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठा रहता था। उस व्यक्ति का नाम रामलाल था। रामलाल की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी, लेकिन उसकी मानसिकता अत्यंत वि-कृ-त और र-ंगी-न मि-जा-जी वाली थी। रामलाल का एक बेटा था जो पंजाब की फैक्ट्री में काम करता था और उसकी बहू घर पर ही रहती थी।

गाँव के लोग रामलाल के चरित्र के बारे में जानते थे। उसकी अपनी बहू भी उससे ड-रती थी क्योंकि रामलाल की नजरें हमेशा गाँव की युवा लड़कियों और महिलाओं पर टिकी रहती थीं। वह अक्सर सड़क किनारे बैठकर स्कूल जाने वाली लड़कियों को घूरता रहता था, जिनमें सुनैना भी एक थी।

वह दुर्भाग्यपूर्ण सुबह: सा-जिश का जाल

एक दिन सुबह करीब 10:00 बजे, सुनैना हमेशा की तरह साइकिल से स्कूल जा रही थी। अचानक पुलिया के पास उसकी साइकिल की चैन उतर गई। रास्ता सुनसान था और पास में केवल रामलाल बैठा था। घबराहट में सुनैना ने रामलाल से मदद मांगी।

रामलाल ने इसे एक मौके के रूप में देखा। उसने चैन चढ़ाने के बदले एक अ-जी-ब शर्त रख दी। उसने कहा, “मैं चैन तो चढ़ा दूंगा, लेकिन तुम्हें मेरी एक बात माननी होगी।” मासूम सुनैना ने सोचा कि शायद वह घर का कोई काम या छोटी मदद मांगेगा, इसलिए उसने जल्दबाजी में ‘हां’ कह दिया। रामलाल ने चैन चढ़ा दी और सुनैना स्कूल चली गई।

शर्त का भ-या-नक रूप

उसी दिन शाम को जब सुनैना लौट रही थी, रामलाल ने उसे फिर रोका और अपनी शर्त याद दिलाई। जब सुनैना ने पूछा कि उसे क्या करना है, तब रामलाल ने अपनी ह-वस और ग-न्दी इच्छाओं का इजहार कर दिया। उसने कहा कि वह उसे पसंद करता है और उसके साथ व-क्त गु-जारना चाहता है।

सुनैना सन्न रह गई। उसने रामलाल को उसकी उम्र और समाज की मर्यादा का वास्ता दिया, लेकिन रामलाल पर जैसे भू-त सवार था। उसने सुनैना का रास्ता रोकना शुरू कर दिया। कुछ दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। सुनैना ड-र गई थी कि अगर उसने घर पर बताया तो शायद उसकी पढ़ाई बंद हो जाए या उसके पिता की बदनामी हो।

एक काली रात और वि-श्वासघात

रामलाल के बार-बार रास्ता रोकने और ध-मका-ने से तंग आकर सुनैना ने एक ग-लत निर्णय लिया। उसने सोचा कि एक बार उसकी बात मान लेने से वह उसका पीछा छोड़ देगा। उसने रामलाल को रात के समय अपने घर के पीछे बुलाया।

उस रात, रामलाल ने मासूम सुनैना के साथ ग-लत सं-बंध (अ-वै-ध रि-श्ते) बनाए। उसने सुनैना की कोमलता और मासूमियत का जरा भी लिहाज नहीं किया और उसके साथ श-री-रिक शो-षण किया। अपनी प्यास बुझाने के बाद रामलाल वहां से चला गया। उसने वादा किया कि वह अब कभी उसका रास्ता नहीं रोकेगा।

पाप का घड़ा भरा: सच्चाई का खुलासा

इस घटना के करीब तीन महीने बीत गए। सुनैना के शरीर में बदलाव दिखने लगे। वह अक्सर बीमार रहने लगी और उसके चेहरे की रौनक गायब हो गई। जब उसकी माँ ने कड़ाई से पूछताछ की, तो सुनैना फूट-फूट कर रोने लगी। उसने बताया कि कैसे उस ‘दादा’ की उम्र के व्यक्ति ने उसे बहला-फुसलाकर और ड-राकर उसके साथ ग-लत काम किया, जिसके कारण वह अब ग-र्भवती (प्रे-ग्नेंट) हो गई है।

सुनैना के पिता यह सुनकर आ-गबबूला हो गए। उनके लिए यह केवल उनकी बेटी का शो-षण नहीं था, बल्कि उनके विश्वास और सम्मान की ह-त्या थी।

गाँव की पंचायत और न्याय

अगले ही दिन गाँव के मुखिया और सरपंच की मौजूदगी में एक बड़ी पंचायत बुलाई गई। पूरे गाँव के सामने रामलाल के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोला गया। सुनैना के पिता ने दहाड़ते हुए कहा, “रामलाल, तुम अपनी पोती की उम्र की लड़की के साथ ऐसा कैसे कर सकते हो?”

गाँव वाले भी रामलाल की हरकतों से तंग थे। पंचायत ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि रामलाल को तुरंत गाँव छोड़ना होगा, अन्यथा उसे ज-िन्दा ज-ला दिया जाएगा। सामाजिक बहिष्कार और गाँव वालों के गु-स्से से ड-रकर रामलाल रातों-रात गाँव छोड़कर भाग गया।

एक नई शुरुआत

सुनैना के पिता उसे शहर के एक बड़े अस्पताल ले गए। वहाँ डॉक्टरों ने सुनैना की स्थिति पर तरस खाते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका ग-र्भ-पात (अ-बॉ-र्शन) कराया। धीरे-धीरे सुनैना शारीरिक और मानसिक आ-घात से उबरने लगी। उसके माता-पिता ने उसका पूरा साथ दिया और उसे फिर से पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

सुनैना ने अपनी हिम्मत नहीं हारी। उसने अपनी पढ़ाई पूरी की। कुछ वर्षों बाद, उसके पिता ने एक नेक और समझदार युवक से उसकी शादी कर दी, जिसने सुनैना के अतीत को स्वीकार किया और उसे सम्मान दिया।

उपसंहार

आज सुनैना अपने पति और दो बच्चों के साथ एक सुखी जीवन व्यतीत कर रही है। यह कहानी हमें संदेश देती है कि:

    कभी भी अ-प-राध को चुपचाप नहीं सहना चाहिए।

    बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में जागरूक करना अनिवार्य है।

    समाज को अपराधियों को संरक्षण देने के बजाय उनका कड़ा बहिष्कार करना चाहिए।

निष्कर्ष

अनंतपुर गाँव में अब शांति है, लेकिन यह घटना आज भी एक सबक के रूप में याद की जाती है कि सफेद बालों के पीछे हमेशा बुद्धिमत्ता नहीं, कभी-कभी भ-या-नक है-वा-नियत भी छिपी हो सकती है।