जब SP मैडम थाने का निरीक्षण करने गई तो इंस्पेक्टर ने उनके साथ कर दिया कांड….

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एसपी और इंस्पेक्टर के बीच का टकराव”

रामपुर थाना जिले का एक जाना-माना थाना था, जहाँ की हवा में एक खास तरह का डर था। बाहर से देखने पर तो यह एक सामान्य थाना लग रहा था, लेकिन यहाँ की दीवारों के पीछे का सच कुछ और ही था। इस थाने में इंस्पेक्टर देवकांत का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता था। उसका कद इस सिस्टम में इतना ऊँचा था कि कई लोग उसकी हिम्मत को देखकर डरते थे। लेकिन एक दिन ऐसा मोड़ आया कि उसका अभिमान और शक्ति दोनों एक झटके में धराशायी हो गए।

भाग 1: देवकांत का अहंकार

रामपुर थाना की इमारत के अंदर जहाँ एक ओर कामकाजी माहौल था, वहीं दूसरी ओर एक खौ़फ भी था। देवकांत की कुर्सी थाने के बीचों-बीच थी, और वहीं से वह अपना राज चलाता था। इस थाने में भ्रष्टाचार का आलम था और इसका मुख्य कारण था देवकांत का रिश्वत लेने का तरीका। वह न केवल आम जनता से रिश्वत लेता था, बल्कि बड़े-बड़े बिल्डरों और स्थानीय नेताओं से भी हफ्ता वसूल करता था। उसकी कुर्सी पर हमेशा एक अदृश्य तख्त था, जिस पर उसकी हुकूमत चलती थी।

एक दिन देवकांत अपने केबिन में बैठकर समोसा खा रहा था, जब कांस्टेबल मिश्रा एक समोसा लेकर उसके पास आया। देवकांत ने समोसा खाया, लेकिन वह अपनी चटनी के लिए लल्लू हलवाई की चटनी को बुरा मानता था। उसने मिश्रा को डांटा, “तुझे कितनी बार कहा है कि लल्लू की चटनी नहीं लानी।”

मिश्रा थोड़ा घबराया और उसे सही चटनी लाने की बात कही, लेकिन देवकांत ने उसे फिर से अपने तरीके से समझाया कि सिस्टम को कैसे चलाना चाहिए।

भाग 2: दरोगा से टकराव

एक दिन रामपुर थाना में एक केस आया जिसमें एक गरीब आदमी रामदीन और एक रसूखदार बिल्डर सेठी आपस में लड़ पड़े थे। रामदीन ने सेठी पर आरोप लगाया था कि उसकी गाड़ी ने उसकी बकरी को टक्कर मार दी थी, जबकि सेठी ने कहा था कि रामदीन की बकरी ने उसकी गाड़ी पर पत्थर फेंका था। दोनों के बीच तनाव बढ़ गया था, और मामला थाने में आ गया था।

देवकांत ने दोनों को अपनी मेज पर बुलाया और मामले को सुलझाने की कोशिश की। लेकिन, देवकांत के मन में पहले से ही तय था कि वह किसे बचाएगा। सेठी की गाड़ी में नुकसान था, और वह एक बड़ा बिल्डर था, जबकि रामदीन गरीब था। देवकांत ने रामदीन को घेरते हुए कहा, “तुमने सरकारी सड़क पर अपनी बकरी चलाई और अब गाड़ी को नुकसान पहुंचाया।”

सेठी ने अपनी घड़ी और सोने की चेन दिखाकर देवकांत को रिश्वत देने का इशारा किया, और देवकांत ने बिना किसी हिचकिचाहट के लिफाफा ले लिया। फिर उसने रामदीन को धमकाया और कहा, “अगर दोबारा सड़क पर दिखे तो अंदर कर दूंगा।”

भाग 3: नई एसपी का आगमन

रामपुर थाने में कई दिन ऐसे ही चलते रहे। देवकांत की ताकत और घमंड पूरे थाने में फैला था। लेकिन एक दिन, जिले में एक नई एसपी का आगमन हुआ। उनका नाम था श्रेया पांडे। वह एक सख्त, ईमानदार और सीधे मिजाज वाली अधिकारी थीं। उनका अंदाज और कार्यशैली अलग थी, और यही चीज देवकांत के लिए खतरे की घंटी साबित हुई।

श्रेया पांडे ने अपने पहले तीन दिन थाने का निरीक्षण करने में बिताए। वह पुराने केस और फाइलें चेक कर रही थीं और उनके दिमाग में यह सवाल था कि रामपुर थाने में इतने सारे अपराधी कैसे बच जाते हैं। उन्होंने देवकांत के खिलाफ भी शिकायतें सुनी थीं, लेकिन वह चुपचाप जांच करना चाहती थीं।

भाग 4: देवकांत की घबराहट

एक दिन, देवकांत को एक फोन आया और खबर मिली कि एसपी मैम थाने का निरीक्षण करने आ रही हैं। देवकांत के हाथों में पसीना आ गया। उसे लगने लगा कि इस बार उसकी सारी करतूतें सामने आ सकती हैं। वह जल्दी-जल्दी अपने सारे काम निपटाने लगा। उसने अपने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि सभी फाइलें ठीक से रखी जाएं, और थाने में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न दिखे।

उसने मिश्रा और यादव से कहा, “आज कुछ भी नहीं दिखना चाहिए, सबकुछ एकदम साफ-सुथरा होना चाहिए।” लेकिन श्रेया पांडे के दिमाग में एक अलग ही योजना चल रही थी। वह जानती थीं कि देवकांत जैसे अधिकारी सिस्टम को अपनी तरह से चला रहे थे।

भाग 5: निरीक्षण का दिन

अगले दिन, एसपी श्रेया पांडे ने बिना किसी सायरन के थाने का निरीक्षण किया। देवकांत ने अपनी पूरी कोशिश की कि वह उन्हें बेवकूफ बना सके, लेकिन श्रेया ने हर एक जगह पर ध्यान से देखा। जब वह लॉकअप में पहुंची, तो देखा कि लॉकअप पूरी तरह से खाली था।

उन्होंने पूछा, “कहाँ हैं सब अपराधी?” देवकांत ने जवाब दिया, “मैडम, सब मामले हम सुलझा लेते हैं, और किसी को अंदर रखने की जरूरत नहीं पड़ती।” लेकिन श्रेया ने कहा, “यह क्या है? क्यों नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट्स भर कर केस दबा दिए जाते हैं?” देवकांत के चेहरे पर पसीना था, क्योंकि वह जानता था कि अब उसकी चालें सामने आ सकती हैं।

भाग 6: देवकांत की गलती का खुलासा

अंत में, श्रेया पांडे ने देवकांत को पकड़ लिया। उन्होंने एक गुप्त योजना बनाई थी, जिसमें रवि नामक एक कॉलेज छात्र को थाने में भेजा गया था। रवि ने देवकांत से रिश्वत मांगी थी, और देवकांत ने उसे पैसे दिए थे। श्रेया ने इस सारी प्रक्रिया को रिकॉर्ड कर लिया था।

जब देवकांत के खिलाफ सबूत जुट गए, तो एसपी श्रेया ने उसे सस्पेंड कर दिया। देवकांत की वर्दी उतर गई, और उसकी सारी करतूतें सामने आ गईं। थाने में अब एक नई हवा चल रही थी। लोग अब थाने में डर के नहीं, बल्कि उम्मीद के साथ आते थे।

निष्कर्ष

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि चाहे कोई भी सिस्टम हो, अगर उसमें भ्रष्टाचार हो तो उसे समय रहते उजागर कर दिया जाना चाहिए। एसपी श्रेया पांडे ने साबित कर दिया कि न्याय और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और किसी भी भ्रष्ट अधिकारी को अपने किए की सजा मिलनी चाहिए।