जिस लड़की को लोग मासूम समझ रहे थे वही सबसे बड़ी गुनहगार निकली
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मासूमियत के पीछे छिपा गुनाह: मेहनाज की कहानी
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के सैफनी थाना क्षेत्र में 10 सितंबर 2024 की सुबह कुछ लोग जंगल से गुजर रहे थे। अचानक उनकी नजर एक सिर कटी नग्न लाश पर पड़ी। यह दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप गई। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और एसएचओ महेंद्रपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शव की पहचान कराने की कोशिश की गई, लेकिन सिर गायब था। आसपास के सभी थानों में सूचना भेजी गई। जंगल में सिर कटी लाश मिलने की खबर आग की तरह फैल गई और सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए।
भीड़ में सेफनी गांव के एक व्यक्ति ने शव को अंगूठे से पहचान लिया। उसने बताया कि यह सोनू है, जो बिलारी के रुस्तम नगर साहसपुर गांव का रहने वाला था। सोनू के पिता साबिर ने भी अपने बेटे की पहचान की। उन्होंने बताया कि सोनू 9 सितंबर की शाम से लापता था। पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।

प्रेम कहानी की शुरुआत
सोनू का अपने ही समाज की एक लड़की मेहनाज से प्रेम संबंध था। दोनों की मुलाकात एक शादी समारोह में हुई थी। मेहनाज सुंदर, पढ़ाई में अव्वल, और अपने परिवार की इज्जत का ख्याल रखने वाली लड़की थी। सोनू उसकी मासूमियत और खूबसूरती पर फिदा हो गया। दोनों के बीच धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई, फिर फोन नंबर का आदान-प्रदान हुआ। सोनू ने मेहनाज को आईटीआई स्कूल में पढ़ते हुए देखा था, और अक्सर उससे मिलने की कोशिश करता था।
शुरुआत में मेहनाज भी सोनू की ओर आकर्षित थी। दोनों के बीच दोस्ती, फिर प्यार, और फिर मुलाकातों का सिलसिला चल पड़ा। सोनू ने मेहनाज की कुछ तस्वीरें भी खींच ली थीं, जिसे लेकर मेहनाज ने उसे चेतावनी दी थी कि सोशल मीडिया पर शेयर न करे। लेकिन सोनू ने अपनी ननिहाल वालों को वह तस्वीरें दिखा दीं और कहा कि वह मेहनाज से शादी करना चाहता है।
परिवार की चिंता और तनाव
जब मेहनाज के भाई सद्दाम को दोनों के प्रेम संबंधों की भनक लगी, तो वह परेशान हो गया। उसे अपनी बहन की इज्जत और परिवार की प्रतिष्ठा की चिंता सताने लगी। उसने मेहनाज से बात की, समझाया कि समाज में बदनामी होगी, करियर खराब होगा, और परिवार का नाम खराब होगा। मेहनाज ने वादा किया कि वह सोनू से रिश्ता खत्म कर देगी, लेकिन उसने यह भी बताया कि सोनू बहुत जिद्दी है और पीछा नहीं छोड़ता।
सद्दाम ने अपने दोस्तों से सलाह ली, और आखिरकार तय किया कि सोनू को समझाने के बाद भी अगर वह नहीं मानता, तो उसे हमेशा के लिए अलग करना जरूरी है। मेहनाज और सद्दाम ने मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई।
गुनाह की रात
9 सितंबर की शाम मेहनाज ने सोनू को फोन किया और भेरुआ पुल पर मिलने के लिए बुलाया। सोनू बहुत खुश था, उसे लगा मेहनाज उससे मिलने के लिए तैयार हो गई है। तय समय पर सोनू पुल पर पहुंचा, जहां मेहनाज अकेली उसका इंतजार कर रही थी। दोनों पुल के पास से गन्ने के खेत की ओर बढ़ गए। वहीं पास में सद्दाम अपने दोस्त रिजवान के साथ छिपा हुआ था।
गन्ने के खेत में पहुंचते ही सद्दाम और रिजवान ने सोनू को पीछे से पकड़ लिया। मेहनाज ने सोनू के पैर रस्सी से बांध दिए। सोनू गिड़गिड़ाता रहा, माफी मांगता रहा, लेकिन मेहनाज ने उसकी एक न सुनी। सद्दाम ने उसकी गर्दन पर चाकू चला दिया, और रिजवान ने मदद की। देखते ही देखते सोनू की गर्दन धड़ से अलग कर दी गई। सोनू की मौत हो गई, और मेहनाज खामोशी से अपने प्रेमी की मौत देखती रही।
सबूत मिटाने की कोशिश
सद्दाम, मेहनाज और रिजवान ने सोनू की लाश के कपड़े उतार दिए, ताकि पहचान न हो सके। उसकी चप्पलें और मोबाइल तोड़कर जंगल में फेंक दिए। सिर को प्लास्टिक के थैले में डालकर डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया। खून से सने कपड़ों को पेट्रोल डालकर जला दिया। तीनों ने पूरी वारदात को अंजाम देने के बाद अपने-अपने घर लौट गए।
पुलिस जांच और सच्चाई का खुलासा
पुलिस ने जांच तेज की। सद्दाम को गिरफ्तार किया गया। सख्त पूछताछ में सद्दाम ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पूरी कहानी बता दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू, सोनू की चप्पल, मोबाइल और सिर बरामद कर लिया। पूछताछ में मेहनाज और रिजवान का नाम भी सामने आया। महिला पुलिस ने मेहनाज से पूछताछ की, तो वह फूट-फूट कर रोने लगी। उसने बताया कि उसने पुलिस भर्ती की परीक्षा दी थी, लेकिन अब उसका करियर खत्म हो गया है।
मेहनाज ने बताया कि वह सोनू से प्यार करती थी, लेकिन जब परिवार और समाज की बदनामी का डर सताया, तो उसने अपने भाई के साथ मिलकर सोनू को खत्म करने की साजिश रची। रिजवान ने भी अपना जुर्म कबूल किया। तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
मासूमियत के पीछे छिपा गुनाह
जिस मेहनाज को गांववाले मासूम समझते थे, वही इस पूरे हत्याकांड की सबसे बड़ी गुनहगार निकली। उसकी मासूमियत के पीछे छिपी साजिश ने एक युवक की जान ले ली, तीन परिवारों को बर्बाद कर दिया, और पूरे इलाके को दहला दिया।
यह कहानी समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हर चेहरा जो मासूम दिखता है, जरूरी नहीं कि वह सच में मासूम हो। कभी-कभी हालात, दबाव और डर इंसान को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देते हैं, जिनका अंजाम बेहद खौफनाक होता है।
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