तालाक शुदा पति-पत्नी अचानक ट्रेन में मिलते ही करने लगे.!
.
ट्रेन में मुलाकात: एक अधूरी कहानी का नया मोड़
सर्दियों की एक सुबह थी। गोरखपुर से कानपुर जा रही ट्रेन के स्लीपर कोच में अभिषेक सबसे ऊपर वाले बर्थ पर सोया हुआ था। ट्रेन जैसे ही एक स्टेशन पर रुकी, उसकी नींद खुल गई। नीचे की बर्थ पर बैठी एक महिला को देखकर अभिषेक चौंक गया। वह कोई और नहीं, बल्कि उसकी पूर्व पत्नी रोशनी थी, जिससे उसका छह साल पहले तलाक हो चुका था।
रोशनी साधारण साड़ी में, बदहवास-सी बैठी थी। उसकी आँखों में उदासी थी, मानो जीवन में कुछ बड़ा खो दिया हो। अभिषेक ने उसे पहचान लिया, लेकिन रोशनी ने अनदेखा करने की कोशिश की। वह खिड़की के बाहर देखने लगी, जैसे उसे अभिषेक की उपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता।
कुछ देर बाद अभिषेक ने हिम्मत जुटाई, नीचे उतरकर रोशनी के पास बैठ गया। उसने पूछा, “आप इस हाल में कहाँ जा रही हो? क्या आपने फिर शादी नहीं की?” रोशनी ने सिर हिलाकर कहा, “नहीं, मैंने अब तक शादी नहीं की।” अभिषेक ने भी बताया कि उसने भी दोबारा शादी नहीं की।
दोनों कुछ देर मौन रहे, लेकिन अभिषेक से चुप नहीं रहा गया। उसने रोशनी की हालत पर चिंता जताई, “तुम पहले कितनी खूबसूरत थी, अब ऐसा क्या हो गया?” रोशनी ने बताया कि वह कानपुर जा रही है, जहाँ उसकी माँ बीमार है और बड़े भैया के पास इलाज चल रहा है। “माँ ने बुलाया है, इसलिए जा रही हूँ,” उसने कहा।

अभिषेक ने भी बताया कि वह कानपुर एक काम से जा रहा है। दोनों को संयोग पर आश्चर्य हुआ कि वे एक ही ट्रेन में, एक ही दिशा में जा रहे हैं। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। दोनों ने अपने-अपने परिवार के बारे में बात की, बीते छह सालों की दूरी, दर्द, और अकेलेपन पर चर्चा की।
ट्रेन में आइसक्रीम वाला आया। अभिषेक ने पूछा, “रोशनी, आइसक्रीम खाओगी?” रोशनी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, लेकिन पैसे मैं दूंगी।” दोनों ने आइसक्रीम ली, खाते-खाते अतीत की यादों में खो गए। कभी हँसी, कभी आँसू—बीते समय की कसक दोनों के चेहरे पर साफ झलक रही थी।
रोशनी ने बताया कि वह दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही है और एक स्कूल में चार घंटे पढ़ाती है, जिससे ₹15,000 मिलते हैं। अभिषेक ने अफसोस जताया कि तलाक के समय कोर्ट ने उसे ₹20 लाख देने को कहा था, मगर रोशनी ने पैसे लेने से इंकार कर दिया। “काश तुम पैसे ले लेती, तो आज तुम्हारा खुद का स्कूल होता,” उसने कहा।
रोशनी ने जवाब दिया, “अगर मैं वो पैसे ले लेती, तो मेरे मन में हमेशा यही रहता कि मैं तुम्हारे पैसों पर पल रही हूँ। भगवान ने मुझे भी दो हाथ-पैर दिए हैं, जब तुम कमा सकते हो, तो मैं क्यों नहीं?” दोनों के बीच थोड़ी देर मौन रहा।
अभिषेक ने बताया कि उसने शराब पीना और जुआ खेलना छोड़ दिया है। “तुमसे अलग होने के बाद परिवार और गाँव वाले ताने मारते थे। मैं तंग आ गया था, इसलिए दिल्ली चला गया। वहाँ मोबाइल दुकान में काम किया, गलत संगत छोड़ दी, और अब खुद का बिजनेस है।” रोशनी ने विश्वास नहीं किया, “तुम शराब छोड़ दो, मुझे यकीन नहीं।”
अभिषेक ने माँ की कसम खाकर कहा, “मैंने सच में छोड़ दिया है।” माँ के निधन की बात सुनकर रोशनी की आँखों में आँसू आ गए। अभिषेक ने बताया कि माँ को तलाक के बाद सदमा लगा था, वे हमेशा यही कहती थीं कि बहू को वापस ले आओ। माँ के निधन के बाद अभिषेक पूरी तरह टूट गया। उसने पापा को लेकर दिल्ली चला गया, जहाँ अब वह पूरी तरह उनके लिए समर्पित है।
रोशनी ने भी अपना दर्द साझा किया, “मैंने बहुत कोशिश की थी तुम्हें सुधारने की, लेकिन तुम्हारे व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। मजबूरी में मुझे अलग होना पड़ा। माँ ने हमेशा मुझे बेटी की तरह प्यार दिया, और अफसोस है कि अंतिम समय में मैं उनके पास नहीं थी।”
दोनों के बीच भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अभिषेक ने पछतावे में कहा, “मैं ही तुम्हारा और माँ का गुनहगार हूँ। अगर मैं सुधर जाता, तो सब कुछ ठीक होता।” रोशनी ने भी स्वीकार किया कि नियति को कोई नहीं बदल सकता।
कानपुर स्टेशन आ गया। दोनों उतर गए। अभिषेक ने पूछा, “दो दिन बाद कब वापस आओगी?” रोशनी ने बताया कि दो दिन बाद सुबह आठ बजे स्टेशन पर होगी। दोनों ने तय किया कि दिल्ली साथ जाएंगे। अभिषेक ने टिकट की पेशकश की, लेकिन रोशनी ने कहा, “मैं स्लीपर में ही ठीक हूँ।”
दो दिन बाद अभिषेक स्टेशन पर पहुँचा, रोशनी का इंतजार करने लगा। जब रोशनी आई तो अभिषेक ने खुशी जाहिर की। दोनों ट्रेन में बैठे, रास्ते में फिर आइसक्रीम ली। दिल्ली पहुँचने पर दोनों बस स्टॉप पर गए। रोशनी की बस आई, वह बस में बैठ गई, लेकिन मन में बेचैनी थी। बस में बैठते ही उसने ड्राइवर से उतारने की गुजारिश की, ऑटो लिया और वापस बस स्टॉप पहुँची।
वहाँ उसने देखा कि अभिषेक अकेला बैठा रो रहा था। रोशनी उसके पास गई, उसके कंधे पर हाथ रखा। अभिषेक ने पीछे मुड़कर देखा, रोशनी को गले लगा लिया। दोनों रोते-रोते एक दूसरे के सीने से लग गए। रोशनी ने कहा, “अभिषेक, अब छोड़ो भी, यह पब्लिक प्लेस है।” अभिषेक मुस्कुराया, “मैं ही तुम्हारा गुनहगार हूँ।” रोशनी ने कहा, “कोई किसी का गुनहगार नहीं, जो विधि में लिखा है वही होता है।”
अंततः दोनों महिपालपुर के लिए बस पकड़ते हैं, अभिषेक के घर जाते हैं और अपने रिश्ते को फिर से एक नया मौका देते हैं। जहाँ से कहानी छूटी थी, वहीं से दोबारा शुरू हो जाती है।
सीख:
रिश्तों में समय और समझ जरूरी है। एक छोटी सी गलती या लापरवाही जीवन भर का पछतावा बन सकती है। यदि आप किसी से सच में प्यार करते हैं, तो उसे समय दें, समझें और उसकी भावनाओं का सम्मान करें। जीवन में दूसरा मौका हमेशा मिलता है, बशर्ते आप दिल से बदलाव लाना चाहें।
News
Assam Election कौन जीत गया? जो किसी ने नहीं सोचा था.. बंगाल में भी यही होगा?
Assam Election कौन जीत गया? जो किसी ने नहीं सोचा था.. बंगाल में भी यही होगा? . भारत में बदलती…
9 Policemen को फांसी की सजा | Sathankulam Custodial Death Case Full Story 2026
9 Policemen को फांसी की सजा | Sathankulam Custodial Death Case Full Story 2026 . . खाकी का काला सच:…
🇨🇦 6 ਸਾਲ ਬਾਅਦ ਕੈਨੇਡਾ ਤੋਂ ਡਿਪੋਰਟ ਹੋਈ ਕੁੜੀ 😱 ਅਸਲ ਕਾਰਨ ਜਾਣਕੇ ਹੋ ਜਾਵੋਗੇ ਹੈਰਾਨ!
🇨🇦 6 ਸਾਲ ਬਾਅਦ ਕੈਨੇਡਾ ਤੋਂ ਡਿਪੋਰਟ ਹੋਈ ਕੁੜੀ 😱 ਅਸਲ ਕਾਰਨ ਜਾਣਕੇ ਹੋ ਜਾਵੋਗੇ ਹੈਰਾਨ! . . विदेश का…
“एक छोटी सी नेकी”
“एक छोटी सी नेकी” . . “एक छोटी सी नेकी” दिल्ली शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान अपने-अपने…
बहु और ससुर दोनों ने मिलकर कर दिया बड़ा कां*ड/पति दोनों का सि*र लेकर थाने पहुंचा/
बहु और ससुर दोनों ने मिलकर कर दिया बड़ा कां*ड/पति दोनों का सि*र लेकर थाने पहुंचा/ . . अधूरी ख्वाहिशें…
बेटा चुप रहा, बहू मारती रही… SDM बेटी आई… फिर जो हुआ… इंसानियत रो पड़ी! |
बेटा चुप रहा, बहू मारती रही… SDM बेटी आई… फिर जो हुआ… इंसानियत रो पड़ी! | . . वो आखिरी…
End of content
No more pages to load






