दबंग गायिका नेहा राठौर ने किया भयंकर खुलासा, तेजतर्रार IPS अफसर ने खोले असली राज

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दबंग गायिका नेहा राठौर और तेजतर्रार आईपीएस अमिताभ ठाकुर: सच बोलने की कीमत

यह कहानी है उस दौर की, जब देश में सवाल पूछना सबसे बड़ा अपराध बन गया था। जब संविधान और लोकतंत्र की बातें केवल किताबों और भाषणों तक सीमित रह गई थीं। जब सत्ता की आंखों में आंखें डालकर सच बोलने की हिम्मत करने वालों को जेल, धमकी और समाज की उपेक्षा का सामना करना पड़ता था।

नेहा सिंह राठौर: सवाल पूछने वाली आवाज

नेहा सिंह राठौर, एक दबंग लोक गायिका, अपने गीतों और बोल से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती हैं। उनका गाना “चौकीदार कायर बा” वायरल हुआ और सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी। नेहा ने अपने गीतों में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, सरकारी तंत्र की विफलता, महिला अधिकार, मजदूरों की हालत और किसानों की पीड़ा को उठाया।

नेहा कहती हैं—”मुझे ऐसा लगता है कि आप मेरा एनकाउंटर कर देंगे। सरकार को देश हित में बिना देरी किए मुझे फांसी दे देनी चाहिए।” यह बयान सिर्फ गुस्से या डर का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलता है जिसमें सच बोलना सबसे बड़ा गुनाह है।

उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। सत्ताधारी पार्टी के लोग दबाव बना रहे हैं कि बोलना छोड़ दो, सवाल करना छोड़ दो। धमकियां मिल रही हैं—अगर सरकार से सवाल पूछना बंद नहीं किया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। नेहा अदालतों के चक्कर लगा रही हैं, पुलिस नोटिस भेज रही है, एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

नेहा कहती हैं—”हमारा देश संविधान से चलता है। जब तक अभिव्यक्ति की आजादी है, हम सवाल करते रहेंगे। सरकार मुझे खरीद नहीं सकती, मुझे झुका नहीं सकती। मैं बोलना नहीं छोड़ूंगी।”

कोतवाली का अनुभव और कानून की विडंबना

नेहा पहली बार पुलिस कोतवाली गईं। उन्हें नोटिस भेजा गया, पूछताछ के लिए बुलाया गया। उन्होंने कोई चोरी नहीं की थी, किसी को गाली नहीं दी थी, कोई इलेक्टोरल बॉन्ड नहीं खरीदा था, न ही वोट चुराया था। उनका “अपराध” सिर्फ इतना था कि उन्होंने प्रधानमंत्री से चार सवाल पूछ लिए थे।

नेहा कहती हैं—”एक किसान परिवार की मामूली लड़की की इतनी हिम्मत कि वो प्रधानमंत्री से सवाल पूछ ले। औकात क्या है इसकी?” उन्हें उनकी “औकात” याद दिलाने के लिए थाने बुला लिया गया। कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, लेकिन वे असली गुनहगारों तक नहीं पहुंचते। वे सिर्फ सवाल पूछने वालों तक पहुंचते हैं।

नेहा ने सरकार की पोल खोली—”कानून के ये लंबे हाथ भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों, पेपर लीक कराने वालों, अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने वालों, नकली दवाओं के कारोबारियों, रेल दुर्घटनाओं के जिम्मेदारों, टूटते पुलों के ठेकेदारों, जंगल उजाड़ने वालों, पहाड़ काटने वालों तक नहीं पहुंचते। लेकिन नेहा सिंह राठौर को सजा मिलनी चाहिए क्योंकि वह प्रधानमंत्री से सवाल पूछती है।”

महिलाओं की आवाज और समाज का डर

नेहा कहती हैं—”जिन बेटियों की दुश्मन पूरी भाजपा है, नेहा पर उनके लिए आवाज उठाने की सजा भी मुकर्रर की जानी चाहिए। बेरोजगारी, महंगाई, मजदूरों के हक, महिला अधिकार—इन मुद्दों पर बोलना क्या गुनाह है?” सरकार को जल्दी से कानून बनाकर आलोचना को देशद्रोह घोषित कर देना चाहिए। नेहा खुद कहती हैं—”सरकार को देश हित में मुझे फांसी दे देनी चाहिए।”

नेहा की शख्सियत अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी है। वे सरकार से नहीं डरतीं, पुलिस थानों के चक्कर लगा रही हैं, गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है, लेकिन वे डरने वाली नहीं हैं।

तेजतर्रार आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर का खुलासा

नेहा के साथ-साथ एक और नाम सुर्खियों में है—अमिताभ ठाकुर। पूर्व आईपीएस अफसर, जो सत्ता सरकार से सवाल करते रहे। वे देवरिया जेल में कैद हैं। उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। अमिताभ ठाकुर ने अनशन भी किया, लेकिन जमानत नहीं मिली। कोर्ट में पेशी के दौरान उन्होंने खुलासा किया—”मुझे डर लग रहा है कि मेरा एनकाउंटर कहीं ना कर दिया जाए।”

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पूर्व सांसद धनंजय सिंह और वाराणसी के भाजपा नेताओं के नाम लिए, तब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। अगले ही दिन रात 2 बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें डर था कि रात में उनका एनकाउंटर हो सकता है। अमिताभ कहते हैं—”मुझे इस मामले में पीआईएल करनी थी, लेकिन रास्ते में मेरे सामान छीन लिए गए ताकि मैं सुप्रीम कोर्ट ना जा सकूं।”

उनका मानना है कि असली मुलजिमों को बचाया जा रहा है। शुभम जायसवाल सिर्फ एक प्यादा है, गहरी जड़ें हैं, बड़े-बड़े नाम हैं। धनंजय सिंह के बारे में कोई पूछताछ नहीं हुई। पूर्वांचल के बड़े माफिया के नाम भी सामने आए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सिस्टम की सच्चाई और समाज का सवाल

अमिताभ ठाकुर का बयान देश में तहलका मचा रहा है। वे कहते हैं—”सत्ता के खिलाफ बोलने पर सजा दी जाती है।” आजकल एक ट्रेंड चल रहा है—साइंटिस्ट जेल में हैं, रेपिस्ट और बलात्कारी खुलेआम घूम रहे हैं। राम रहीम, आसाराम जैसे लोग बाहर घूम रहे हैं, जबकि शर्जिल इमाम, उमर खालिद, सोनम बांगजुक जैसे लोग यूएपीए के तहत फंसे हुए हैं। नेहा सिंह, अमिताभ ठाकुर जैसे लोगों को सिर्फ इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने सरकार से सवाल पूछा।

लोकतंत्र, संविधान और सवालों की कीमत

आज सवाल पूछना गुनाह है। सरकारें चाहती हैं कि कोई बोलने, लिखने, गाने का साहस न करे। कोर्ट, पुलिस, प्रशासन सब सत्ता के दबाव में हैं। नेहा सिंह राठौर और अमिताभ ठाकुर जैसे लोग सवाल पूछने की हिम्मत दिखाते हैं, इसलिए उन्हें सजा मिलती है। क्या यही लोकतंत्र है? क्या यही संविधान है?

नेहा सिंह राठौर कहती हैं—”मैं डरूंगी नहीं, बोलना नहीं छोड़ूंगी।” अमिताभ ठाकुर कहते हैं—”सत्ता के खिलाफ बोलने पर जेल में डाल दिया गया।” यह कहानी हर उस व्यक्ति की है, जो सच बोलने की हिम्मत करता है, जो सत्ता से सवाल पूछता है।

सीख और निष्कर्ष

यह कहानी हमें सिखाती है कि लोकतंत्र की असली ताकत सवाल पूछने में है। जब सवाल दबा दिए जाएं, जब सच बोलने वालों को जेल में डाल दिया जाए, जब डर का माहौल बना दिया जाए, तब देश की आत्मा खतरे में होती है। नेहा राठौर और अमिताभ ठाकुर की हिम्मत हमें याद दिलाती है कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

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