दोस्त असरानी की मौत पर फूट-फूट कर रोए धर्मेंद्र! Govardhan Asrani News ! Dharmendra ! Bollywood News
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बॉलीवुड के महान कॉमेडियन असरानी को धर्मेंद्र ने भावुक अलविदा कहा: एक युग का अंत
20 अक्टूबर 2025 का दिन भारतीय सिनेमा के लिए बेहद दुखद था, क्योंकि इस दिन बॉलीवुड के मशहूर और बेहतरीन कॉमेडियन गोवर्धन असरानी, जिन्हें हम सब प्यार से ‘आसरानी’ कहते थे, ने अंतिम सांस ली। उनका जाना न केवल एक कलाकार का जाना था, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के लिए एक युग का अंत था। इस खबर ने पूरे फिल्म जगत को स्तब्ध कर दिया। खासकर उनके करीबी दोस्त और बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र, जिन्होंने सोशल मीडिया पर असरानी को भावुक अलविदा कहा और भावुक होकर रो भी पड़े।
धर्मेंद्र का भावुक संदेश
धर्मेंद्र ने सोशल मीडिया पर लिखा, “असरानी, तुम्हारे जाने की खबर ने मेरा दिल तोड़ दिया। तुम सिर्फ एक शानदार कलाकार नहीं थे, बल्कि एक सच्चे इंसान और मेरे प्यारे साथी थे। तुम्हारे जैसे लोग जिंदगी में एक बार मिलते हैं।” धर्मेंद्र ने बताया कि वे कुछ महीने पहले एक फिल्म इवेंट में असरानी से मिले थे, जहां वे अपनी पुरानी मुस्कान और हंसी के साथ मौजूद थे। उन्होंने कहा, “धर्म जी, आप हंसते रहिए, यही जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा है।” यह बात आज धर्मेंद्र के दिल में गूंज रही है।
धर्मेंद्र ने आगे लिखा कि असरानी हमारे द्वार की खुशियों की पहचान थे। उनकी कॉमेडी टाइमिंग, मासूम चेहरा और नेक दिल स्वभाव हमेशा याद रहेगा। वह हर सीन में जान डाल देते थे। धर्मेंद्र ने प्रार्थना की कि भगवान असरानी को अपनी शरण में जगह दें। उन्होंने कहा, “तुम्हें कभी नहीं भूल पाऊंगा मेरे भाई। तुम्हारी हंसी और तुम्हारी दोस्ती हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेगी।”

असरानी का निधन और अंतिम समय
असरानी पिछले कुछ दिनों से मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनका इलाज चल रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी क्योंकि उनके फेफड़ों में पानी भर गया था। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर उनका शरीर जवाब दे गया।
धर्मेंद्र उस वक्त शूटिंग पर थे जब उन्हें यह दुखद खबर मिली। उन्होंने बताया कि वे कुछ पल के लिए पूरी तरह चुप हो गए और उनकी मुस्कान गायब हो गई। उन्होंने अपने दोस्तों से संपर्क किया और असरानी के परिवार से बात करने की कोशिश की।
असरानी का जीवन और फिल्मी सफर
गोवर्धन असरानी का जन्म राजस्थान के जयपुर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें नाटक और थिएटर में गहरी रुचि थी। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से एक्टिंग की पढ़ाई की और मुंबई आकर फिल्मों में काम करना शुरू किया।
उनका फिल्मी सफर 1960 के दशक में शुरू हुआ, जब वे छोटे-छोटे रोल करते थे। उनकी पहली पहचान 1967 में रिलीज हुई फिल्म ‘हरे कांच की चूड़ियां’ से बनी। धीरे-धीरे उन्होंने 1970 के दशक में अपनी कॉमेडी के दम पर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई।
1972 में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘बावर्ची’ में राजेश खन्ना के साथ उनका सहायक किरदार लोगों को बहुत पसंद आया। उसी साल आई फिल्म ‘चुपके-चुपके’ में उनका छोटा लेकिन प्रभावशाली रोल था, जिसने उनकी कॉमेडी प्रतिभा को साबित किया।
शोले का जेलर सीन और अमर पहचान
1975 में आई फिल्म ‘शोले’ में असरानी का जेलर का रोल आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक यादगार पल माना जाता है। उनका डायलॉग “हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं” आज भी लोगों के जुबान पर है। धर्मेंद्र ने बताया कि उस सीन की शूटिंग के दौरान पूरा सेट हंसते-हंसते लोटपोट हो गया था और शूटिंग को रोकना पड़ा था।
यह सीन न केवल उनकी कॉमेडी की प्रतिभा का परिचायक था, बल्कि उन्हें एक स्टार के रूप में स्थापित कर गया। इसके बाद वे 70 और 80 के दशक में लगभग हर दूसरी फिल्म में नजर आने लगे।
कॉमेडी की दुनिया में असरानी का योगदान
असरानी ने अपनी कॉमेडी से हर उम्र के दर्शकों का दिल जीता। वे कभी स्कूल टीचर बने, कभी पुलिसवाले, तो कभी बेवकूफ नौकर, लेकिन हर किरदार में जान डाल देते थे। उनकी कॉमेडी में न तो गंदगी थी और न ही ओवरएक्टिंग। उनका अंदाज इतना सादगीपूर्ण और स्वाभाविक था कि सभी उन्हें पसंद करते थे।
80 और 90 के दशक में जब कॉमेडी फिल्मों का दौर चला, तो असरानी ने जगदीप और केस्तो मुखर्जी के साथ जोड़ी बनाकर फिल्म इंडस्ट्री में नया फ्लेवर लाया।
टीवी और नए दौर में भी कायम रहा जलवा
जब 2000 का दशक आया, तब कई पुराने कलाकार पीछे हट गए, लेकिन असरानी ने खुद को बदल लिया। उन्होंने टीवी सीरियल्स में काम किया और फिल्मों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने ‘हेराफेरी’, ‘धमाल’, ‘मलामाल’, ‘वीकली’, ‘भागमभाग’ जैसी फिल्मों में अपनी कॉमेडी का जलवा दिखाया।
धर्मेंद्र ने कहा कि असरानी का चेहरा उम्र से बड़ा था, लेकिन दिल अब भी बच्चा था। उनका कहना था कि कॉमेडी सिर्फ हंसाने के लिए नहीं होती, बल्कि लोगों के दिल से दर्द निकालने के लिए होती है।
असरानी की विनम्रता और इंसानियत
असरानी कभी खुद को स्टार नहीं मानते थे। वे हमेशा कहते थे कि कलाकार वही होता है जो सबको खुश कर सके। उनकी विनम्रता और दोस्ताना स्वभाव ने उन्हें इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिकाए रखा।
धर्मेंद्र ने एक बार बताया कि शूटिंग के दौरान वे गुस्सा हो गए थे, तो असरानी ने उन्हें समझाया, “धर्म जी, गुस्सा कम करो। यह दुनिया छोटी है, पता ही नहीं चलता कौन कब चला जाए।”
सम्मान और विरासत
2020 में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। उस वक्त उन्होंने कहा था, “मैं तो बस लोगों को हंसाना चाहता था, पता ही नहीं चला जिंदगी कब निकल गई।”
उनके बाद की पीढ़ी के कई कॉमेडियन जैसे राजपाल यादव, जॉनी लीवर, अर्शद वारसी ने कहा कि उन्होंने कॉमेडी की कला असरानी से सीखी है।
अंतिम विदाई
असरानी का अंतिम संस्कार मुंबई के सांता क्रूज श्मशान घाट में सादगी से किया गया। परिवार और करीबी दोस्त ही मौजूद थे। कोई बैंड बाजा या मीडिया का तामझाम नहीं था।
धर्मेंद्र ने कहा, “आसरानी का जाना एक युग का अंत है। उनकी हंसी और दोस्ती हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।”
निष्कर्ष
गोवर्धन असरानी का जाना बॉलीवुड के लिए अपूरणीय क्षति है। वे सिर्फ एक कलाकार नहीं थे, बल्कि एक युग थे जिन्होंने हर घर में खुशियां पहुंचाईं। उनकी कॉमेडी ने लोगों को न केवल हंसाया, बल्कि जीना भी सिखाया।
उनका संदेश था कि जिंदगी छोटी है, इसलिए हमेशा हंसते रहो। उनकी हंसी और कॉमेडी आज भी लोगों के दिलों में गूंजती है और हमेशा गूंजती रहेगी।
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