दो औरतों ने मजदूर के साथ किया करनामा/पोल खुली तो पुलिस के भी होश उड़ गए/
.
शिवराजपुर का काला सच: जब वासना ने एक निर्दोष की जान ले ली
उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में स्थित एक छोटा-सा गांव था — शिवराजपुर। बाहर से देखने पर यह गांव बिल्कुल साधारण लगता था। चारों तरफ़ हरे-भरे खेत, कच्ची पगडंडियाँ, सुबह-शाम बैलों की घंटियाँ और लोगों की सीधी-सादी ज़िंदगी। लेकिन इसी गांव की मिट्टी में एक ऐसा काला सच दबा था, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया।
गांव में रहने वाले रविंद्र सिंह एक प्रतिष्ठित किसान थे। उनके पास करीब 14 एकड़ उपजाऊ ज़मीन थी। खेती-किसानी से उन्होंने अच्छी-खासी कमाई की थी। गांव में उनकी इज्ज़त थी, लोग उन्हें मेहनती, ईमानदार और सीधे स्वभाव का आदमी मानते थे।
रविंद्र सिंह का परिवार छोटा था। उनका इकलौता बेटा पवन सिंह, जिसकी शादी चार साल पहले अलका देवी से हुई थी। शादी के बाद सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन छह महीने पहले पवन रोज़गार के सिलसिले में विदेश चला गया। यही वह मोड़ था, जहाँ से इस कहानी की दिशा बदलनी शुरू हुई।

अकेलापन और गलत सोच
पति के विदेश जाने के बाद अलका देवी अपने ससुर के साथ उसी बड़े घर में रहने लगी। बाहर से देखने पर वह एक संस्कारी बहू लगती थी, लेकिन भीतर ही भीतर उसका मन बदलने लगा था।
दिन बीतते गए, रातें लंबी लगने लगीं। अकेलापन उसे काटने लगा। वह खुद से लड़ने के बजाय अपनी इच्छाओं को बहाने देने लगी। कई बार उसके मन में ऐसे ख्याल आने लगे, जिन पर उसे खुद भी शर्म आनी चाहिए थी।
गांव में ही रहने वाला राहुल, जो पास के कारखाने में मजदूरी करता था, अलका की नजरों में आ गया। राहुल सीधा-सादा, मेहनती और गरीब परिवार से था। अलका ने सोचा कि अगर किसी तरह उसे घर के करीब लाया जाए, तो उसकी ज़िंदगी “सहज” हो सकती है।
उसने ससुर रविंद्र से खेतों के लिए मजदूर रखने की बात कही, लेकिन रविंद्र ने साफ मना कर दिया।
“मैं खुद खेती संभाल लेता हूँ, मुझे किसी मजदूर की ज़रूरत नहीं,”
यह जवाब अलका को पसंद नहीं आया।
यहीं से उसके मन में एक और बड़ा षड्यंत्र जन्म लेने लगा।
फ्रिज की खराबी और मिस्त्री की एंट्री
5 दिसंबर 2025 की सुबह, रविंद्र सिंह खेतों में काम करने चले गए। घर में अलका अकेली थी। उसी समय उसने ससुर को फोन किया और कहा कि फ्रिज खराब हो गया है।
रविंद्र ने गांव के ही एक मिस्त्री बृजपाल को बुला लिया। बृजपाल जवान, मजबूत कद-काठी वाला और औरतों में खास रुचि रखने वाला व्यक्ति था।
जब वह घर पहुँचा, तो अलका की नजरें उसी पर टिक गईं। फ्रिज ठीक हुआ, मजदूरी मांगी गई। मजदूरी 700 रुपये थी, लेकिन अलका ने जानबूझकर 2000 रुपये दिए।
“फ्रिज तो ठीक हो गया, लेकिन मुझे भी ठीक करना है,”
यह वाक्य बृजपाल को चौंका गया।
अलका ने बिना झिझक अपनी स्थिति बता दी — पति विदेश में है, ससुर बाहर रहते हैं, घर में अकेलापन है। बृजपाल लालची भी था और कमजोर चरित्र का भी। वह जाल में फँस गया।
रात को आने का न्योता मिला — और उसी रात यह रिश्ता पाप की राह पर उतर गया।
गुनाह की आदत
इसके बाद यह सिलसिला चल पड़ा। बृजपाल रात के अंधेरे में आता, पैसे लेता और चला जाता। अलका को लगने लगा कि उसने अपनी दुनिया बना ली है।
लेकिन यह राज ज्यादा दिन छिप नहीं सकता था।
इसी दौरान अलका ने अपनी पड़ोसन निर्मला देवी को सब कुछ बता दिया। निर्मला एक विधवा थी, भीतर से टूटी हुई, और सहारे की तलाश में थी।
अलका ने उसे भी उसी दलदल में खींच लिया।
15 दिसंबर 2025 की रात, बृजपाल को बुलाया गया। इस बार कमरे में अलका अकेली नहीं थी। निर्मला भी मौजूद थी। लालच और वासना ने बृजपाल की बची-खुची समझदारी भी खत्म कर दी।
तीनों ने मिलकर जो किया, वह सिर्फ समाज के खिलाफ नहीं था, बल्कि एक बड़े विनाश की नींव थी।
गांव में चर्चा और चेतावनी
धीरे-धीरे गांव में बातें फैलने लगीं। कानाफूसी होती रही। आखिरकार यह बात रविंद्र सिंह तक भी पहुँच गई।
एक शाम रविंद्र सीधे बृजपाल के घर पहुँचा और उसे सख्त चेतावनी दी —
“आज के बाद मेरे घर की तरफ देखा भी तो जान से मार दूँगा।”
डर के मारे बृजपाल ने संपर्क तोड़ लिया। फोन उठाने बंद कर दिए।
अब अलका और निर्मला बेचैन हो गईं। उन्हें लगने लगा कि उनका “सहारा” उनसे छिन गया है।
नई चाल: मजदूर राहुल
2 जनवरी 2026 को दोनों औरतों ने नया प्लान बनाया। निर्मला ने राहुल को अपने खेतों में ज्यादा पैसे देकर काम पर रख लिया। राहुल को क्या पता था कि यह नौकरी उसकी मौत की शुरुआत है।
दिन बीतते गए। राहुल ईमानदारी से काम करता रहा। करीब दो हफ्ते बाद, 15 जनवरी की रात, निर्मला ने उसे बहाने से घर बुलाया।
घर के अंदर जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार कर देने वाला था। डर, धमकी और झूठे इल्ज़ाम के सहारे एक निर्दोष मजदूर को मजबूर किया गया।
उसी रात अलका भी वहाँ पहुँची।
वह रात, जिसने सब खत्म कर दिया
इत्तेफाक से उस रात रविंद्र सिंह जाग गए थे। उन्होंने अपनी बहू को देर रात जाते देखा। शक हुआ।
गंडासी हाथ में लेकर जब वह निर्मला के घर पहुँचे और दरवाज़ा तोड़ा, तो सामने जो दृश्य था — उसने एक पिता, एक किसान, एक बुज़ुर्ग इंसान को हैवान बना दिया।
गुस्से में आकर उन्होंने राहुल पर वार कर दिया।
राहुल वहीं मर गया।
पुलिस और सच का खुलासा
शोर सुनकर गांव इकट्ठा हुआ। पुलिस आई। राहुल की लाश, खून, और टूटे हुए रिश्ते — सब सामने थे।
पूछताछ में पूरी कहानी खुल गई।
दो औरतों की वासना, एक मजदूर की मजबूरी, और एक बुज़ुर्ग का गुस्सा — तीनों ने मिलकर एक निर्दोष की जान ले ली थी।
अंत नहीं, सबक
राहुल निर्दोष था। उसकी कोई गलती नहीं थी। फिर भी उसकी जान चली गई।
यह कहानी सिर्फ एक अपराध नहीं है।
यह चेतावनी है —
जब नैतिकता मर जाती है, तो सबसे पहले निर्दोष मरते हैं।
News
(FINAL: PART 3) Sa Kasal ng Aking Anak, sa Kusina Ako Itinabi ng Kanyang Asawa. Ngumiti Lang Ako at Nanahimik…
KABANATA 8: Ang Pagguho ng Toreng Garing Anim na buwan matapos ang gabi ng kasal na naging mitsa ng lahat,…
Sa Kasal ng Aking Anak, sa Kusina Ako Itinabi ng Kanyang Asawa. Ngumiti Lang Ako at Nanahimik…
Sa Kasal ng Aking Anak, sa Kusina Ako Itinabi ng Kanyang Asawa. Ngumiti Lang Ako at Nanahimik… . . KABANATA…
(FINAL: PART 3) BINUNTIS NG SARILI NIYANG TATAY ANG KANIYANG ASAWA
(FINAL: PART 3) BINUNTIS NG SARILI NIYANG TATAY ANG KANIYANG ASAWA . . PART 3 — “ANG HULING HABILIN NG…
BINUNTIS NG SARILI NIYANG TATAY ANG KANIYANG ASAWA
BINUNTIS NG SARILI NIYANG TATAY ANG KANIYANG ASAWA .. . PART 1 — “ANG TAWAG MULA NUEVA ECIJA” Taong 2016,…
(FINAL: PART 3) 5 Anak Nagtrabaho sa Ibang Bansa, Kumita ng Bilyon—Pagbalik, Natagpuan ang Ina sa Barung-barong
PART 3 — “ANG HULING SULAT NI INAY ROSA” Kabanata 1: Ang Bahay na Walang Tawa Pagkatapos ng libing ni…
5 Anak Nagtrabaho sa Ibang Bansa, Kumita ng Bilyon—Pagbalik, Natagpuan ang Ina sa Barung-barong
5 Anak Nagtrabaho sa Ibang Bansa, Kumita ng Bilyon—Pagbalik, Natagpuan ang Ina sa Barung-barong PART 1 — “ANG LIMANG PANGAKO,…
End of content
No more pages to load






