दो पुजारियों ने मंदिर में किया कारनामा/पोल खुली तो पुलिस और गांव के लोग दंग रह गए/

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दो पुजारियों का काला कारनामा: राजस्थान के एक गांव की दर्दनाक कहानी

राजस्थान के भरतपुर जिले के अचलपुर गांव की यह कहानी है, जहां दो पुजारियों ने एक ऐसा काला कारनामा किया, जिसने पूरे गांव को हिला कर रख दिया। यह घटना न केवल गांव के लोगों के लिए बल्कि आसपास के इलाकों में भी चर्चा का विषय बनी। इस कहानी में है विश्वासघात, छल, और समाज की पीड़ा, जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि आखिर धार्मिक आस्था के नाम पर कितनी बड़ी नाकामी हो सकती है।

अनुराधा देवी का जीवन और परिवार

अचलपुर गांव में अनुराधा देवी नाम की एक महिला रहती थी, जो चूड़ियां बेचने का काम करती थी। उसकी दुकान गांव की महिलाओं के बीच लोकप्रिय थी क्योंकि वह सस्ते दामों पर अच्छा सामान उपलब्ध कराती थी। इस काम से उसने अपने लिए गांव के बाहर खेत में एक घर भी बना लिया था। अनुराधा की जिंदगी सामान्य थी, उसका एक बेटा बबलू था जो कक्षा छह में पढ़ता था, और उसकी सास रति देवी थी।

सामान्य दिनचर्या में, अनुराधा सुबह दुकान खोलती और रात को अपने घर वापस आ जाती। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि आने वाला वक्त उसके लिए कितना दर्दनाक होगा।

घटना का आरंभ: बबलू और सांप का काटना

2 अक्टूबर 2025 की सुबह बबलू ने अपनी मां से कहा कि स्कूल में छुट्टी है, वह गांव में खेलना चाहता है। वह अपने दोस्त रवि के साथ गांव के मंदिर चला गया। मंदिर के पास एक तालाब था, जहां अचानक एक सांप बाहर निकल आया। रवि ने सांप को देखा और चिल्लाना शुरू कर दिया। बबलू सांप को देखकर डर के मारे बेहोश हो गया।

मंदिर के अंदर किशोरनाथ नाम का पुजारी था, जो गांव वालों के लिए एक रहस्य था। वह लंगोट का ढीला और नाड़े का ढीला था, और गांव की महिलाओं को गलत नजरों से देखता था। रवि ने पुजारी को बताया कि बबलू सांप के काटने से बेहोश हो गया है। किशोरनाथ तुरंत बबलू को लेकर मंदिर के अंदर गया और उसका इलाज शुरू किया।

किशोरनाथ पुजारी की सच्चाई

अनुराधा देवी जब मंदिर पहुंची और पुजारी से मिली, तो उसने धन्यवाद दिया कि उसने उसके बेटे की जान बचाई। लेकिन किशोरनाथ की नियत साफ नहीं थी। उसने अनुराधा की खूबसूरती को देखकर उसे पाने की ठानी। वह किसी भी हद तक जाने को तैयार था।

कुछ दिनों बाद, गांव के सरपंच राजपाल सिंह ने पुजारी से मंदिर में जागरण करवाने के लिए दान इकट्ठा करने को कहा। किशोरनाथ ने गांव वालों के घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा किया। शाम को पुजारी अनुराधा के घर पहुंचा और खाना खाने का आग्रह किया। अनुराधा ने विश्वास कर खाना बनाया और पुजारी ने खाना खाया। इसके बाद पुजारी ने उसे नशीला प्रसाद दिया, जिसे खाकर अनुराधा बेहोश हो गई।

अनुराधा के साथ हुआ अत्याचार

बेहोश अनुराधा को पुजारी ने अपने घर के कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ गलत काम शुरू कर दिया। बाद में उसने अपने दोस्त उदयनाथ पुजारी को बुलाया। दोनों ने मिलकर नशे की हालत में अनुराधा के साथ अत्याचार किया। उन्होंने उसकी आपत्तिजनक वीडियो भी बनाई, जिससे वे उसे ब्लैकमेल करते रहे।

अनुराधा के हाथ-पैर बंधे हुए थे और उसका मुंह भी बंद था। दोनों पुजारी रात-दिन उसके घर आते-जाते रहते थे। उन्होंने उससे जेवरात और पैसे भी छीन लिए। इस दौरान उन्होंने गांव की आठ अन्य महिलाओं के साथ भी इसी तरह का कुकृत्य किया।

अलका देवी का शोषण

13 अक्टूबर की सुबह, सरपंच राजपाल की पत्नी अलका देवी मंदिर पूजा करने आई। उदयनाथ पुजारी ने उसे भी नशीला प्रसाद दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। उसे मंदिर के तहखाने में बंद कर दिया गया और दोनों पुजारियों ने उसके साथ भी अत्याचार किया।

जब राजपाल को अपनी पत्नी की अनुपस्थिति का पता चला, तो वह मंदिर पहुंचा, लेकिन पुजारी ने उसे धोखा दिया और उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी। राजपाल ने पूरे गांव में अपनी पत्नी की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिली।

राहुल की बहादुरी

गांव की एक महिला रजनी देवी का 12 साल का बेटा राहुल मंदिर में गया और तहखाने में बंधी हुई महिला को देखा। भयभीत राहुल ने अपनी मां को बताया। रजनी देवी तहखाने पहुंची, रस्सियां खोलकर अलका देवी को बाहर निकाला। राजपाल को भी इस बात की सूचना दी गई।

पुलिस की कार्रवाई और सच्चाई का खुलासा

राजपाल ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पुजारियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे असली पुजारी नहीं थे, बल्कि धोखाधड़ी कर गांव में आकर महिलाओं के साथ अत्याचार करते थे और चोरी करते थे।

पुलिस ने खेत में अनुराधा को भी रस्सियों से बंधा पाया और उसे मुक्त कराया। दोनों पुजारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें न्याय के सामने पेश किया गया।

समाज के लिए संदेश

यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चेतावनी है। धार्मिक आस्था के नाम पर कुछ लोग किस हद तक गिर सकते हैं, यह इस कहानी से स्पष्ट होता है। हमें सतर्क रहना होगा कि हमारे समाज में ऐसे लोग न पनपें जो विश्वास का दुरुपयोग करें।

यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए हमें मजबूत कदम उठाने होंगे। सामाजिक जागरूकता, पुलिस की तत्परता और समुदाय की एकजुटता ही ऐसे अपराधों को रोक सकती है।

निष्कर्ष

अचलपुर गांव की यह दर्दनाक कहानी हमें याद दिलाती है कि अंधविश्वास और धार्मिक आस्था का गलत इस्तेमाल कितना विनाशकारी हो सकता है। हमें अपने समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा। साथ ही, ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी ताकि कोई और महिला इस तरह की पीड़ा से न गुजरे।

इस घटना से सीख लेकर हमें अपने समाज को बेहतर, सुरक्षित और न्यायपूर्ण बनाना होगा। तभी हम एक स्वस्थ और उन्नत समाज की कल्पना कर सकते हैं।