“माँ-बाप को ऐसी मौत दी – सनक की हदें पार”
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जाफराबाद अहमदपुर गाँव में दिसंबर की सर्द रात थी। गाँव के बीचोंबीच एक दो मंजिला मकान, जो रेलवे के रिटायर्ड लोको पायलट श्याम बहादुर ने अपनी जिंदगी भर की कमाई से बनवाया था। घर में अब तक खुशियाँ थीं—तीन बेटियाँ, सबकी शादी हो चुकी थी। इकलौता बेटा अंबेश, बीटेक इंजीनियर, कोलकाता में नौकरी करता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से घर पर ही था।
अंबेश की शादी दूसरे धर्म की लड़की से हुई थी, माँ-बाप की मर्जी के खिलाफ। दो बच्चे थे—एक बेटा, एक बेटी। परिवार में तनातनी रहती थी, लेकिन सब कुछ सामान्य दिखता था। कोई नहीं जानता था कि एक रात सब कुछ बदल जाएगा।

1. उस रात का अंधेरा
8 दिसंबर 2025 की रात, घर में झगड़ा हुआ। अंबेश अपनी पत्नी से तलाक लेना चाहता था, लेकिन उसके लिए पैसे चाहिए थे। माँ-बाप ने साफ मना कर दिया—”शादी अपनी मर्जी से की थी, अब खर्चा भी खुद देखो।” अंबेश को शक था कि माँ-बाप उसकी संपत्ति तीनों बहनों में बाँट देंगे। इसी बात को लेकर बहस बढ़ गई।
रात करीब डेढ़ बजे, अंबेश का गुस्सा काबू से बाहर हो गया। उसने घर में रखा सिलबट्टा उठाया और माँ बबीता के सिर पर मार दिया। माँ जमीन पर गिर गई, चीख नहीं निकल पाई। पिता श्याम बहादुर दौड़े, बेटी को फोन करने लगे, लेकिन अंबेश ने फोन काट दिया। फिर उसी सिलबट्टे से पिता के सिर पर वार कर दिया। कुछ ही मिनटों में दोनों की सांसें थम गईं।
2. लाशों का ठिकाना
घर में खून फैल गया था। अंबेश ने बेसमेंट में रखी आरी उठाई और माँ-बाप के शरीर के टुकड़े किए। तीन-तीन टुकड़े, सीमेंट के खाली बोरों में भर दिए। कुछ टुकड़े इतने बड़े थे कि बोरे में नहीं आ रहे थे। उन्हें अलग-अलग बोरों में ठूंसकर अपनी स्विफ्ट डिजायर कार में डाला।
रात के अंधेरे में, वो शवों को गोमती नदी की ओर ले गया। एक-एक कर बोरों को नदी में फेंक दिया। एक बड़ा टुकड़ा वाराणसी तक ले गया, 70 किलोमीटर दूर। वहाँ भी नदी में फेंक दिया। गंगा स्नान किया, ताकि पाप धुल जाए।
3. कहानी का जाल
सुबह होते ही अंबेश ने कहानी गढ़ी—”माँ-बाप गायब हैं, पता नहीं कहाँ गए।” आसपास के लोगों से पूछा, रिश्तेदारों को फोन किया। बहनों को भी यही बताया। लेकिन बहनों को शक हुआ, क्योंकि रोजाना बात होती थी। जब कई दिन तक माँ-बाप का फोन बंद आया, तो बड़ी बेटी वंदना ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस ने तफ्तीश शुरू की, अंबेश से पूछताछ की। उसने कई कहानियाँ सुनाईं—”मैं ढूंढ रहा हूँ, वो कहीं आश्रम में होंगे, मुझे भी पता नहीं।” पुलिस को शक हुआ, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं था।
4. पुलिस की पकड़
पुलिस ने अंबेश की लोकेशन ट्रेस की। वाराणसी के घाटों पर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में शुरू में वो झूठ बोलता रहा—”मैं भगवान से अरदास कर रहा हूँ, माँ-बाप मिल जाएँ।” लेकिन जब पुलिस ने थर्ड डिग्री दी, तो सच सामने आ गया। उसने कबूल किया—”हाँ, मैंने ही मारा है।”
पुलिस ने उससे पूछा—”क्यों?”
उसने बताया—”माँ-बाप खर्चा नहीं दे रहे थे, तलाक के लिए पैसे चाहिए थे। उन्हें शक था कि वो प्रॉपर्टी बहनों को दे देंगे। गुस्से में मार दिया।”
5. गाँव में सनसनी
जाफराबाद गाँव में यह खबर आग की तरह फैल गई। लोग दंग रह गए। दो मंजिला मकान, मेहनत की कमाई, और इकलौते बेटे की हैवानियत। पड़ोसी कहते—”ऐसा बेटा किसी को न मिले।” कुछ लोग बोले—”माँ-बाप ने सब कुछ दिया, लेकिन बेटे की सनक ने सब खत्म कर दिया।”
बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस ने घर की तलाशी ली, बेसमेंट से खून के निशान मिले। नदी से शव के टुकड़े बरामद हुए। गाँव में मातम छा गया।
6. अदालत में सुनवाई
अंबेश को गिरफ्तार कर लिया गया। केस अदालत पहुँचा। वकील ने कहा—”माँ-बाप की हत्या, शवों के टुकड़े, सबूत मिटाने की कोशिश।” जज ने पूछा—”क्या तुम्हें पछतावा है?”
अंबेश बोला—”गुस्से में सब कुछ कर दिया, अब पछता रहा हूँ।”
अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जज ने कहा—”माँ-बाप की हत्या सबसे बड़ा अपराध है। ऐसे अपराधी को समाज में कोई जगह नहीं।”
7. सबक और सवाल
इस कहानी में सबसे बड़ा सबक है—सनक और गुस्सा इंसान को हैवान बना देता है। माँ-बाप ने बेटे को सब कुछ दिया, लेकिन एक रात की बहस ने सब खत्म कर दिया। परिवार में संवाद, समझदारी और धैर्य जरूरी है।
रात के झगड़े खतरनाक होते हैं। गुस्से को काबू करना, बच्चों को सही परवरिश देना, उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है।
आज जौनपुर का वह मकान वीरान है। बहनों ने गाँव छोड़ दिया। समाज सवाल कर रहा है—”क्या ऐसी हैवानियत के लिए कोई माफ़ी है?”
8. अंतिम विचार
इस घटना ने पूरे समाज को हिला दिया। माँ-बाप की हत्या किसी भी हालात में सही नहीं। अगर परिवार में विवाद है, तो संवाद से हल निकालें। गुस्से में कोई फैसला न लें। बच्चों की परवरिश में सिर्फ पढ़ाई, पैसा नहीं, बल्कि भावनाओं की समझ भी जरूरी है।
अगर इस कहानी से किसी का गुस्सा शांत हो जाए, किसी परिवार की जान बच जाए, तो यही सबसे बड़ा मकसद होगा।
धन्यवाद।
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