नया साल पर पोती के साथ दादा किया बड़ा कांड/जंगल गई थी पिकनिक मनाने/पुलिस भी हैरान/ !
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नया साल, जंगल की पिकनिक और पोती की हिम्मत: एक सच्ची कहानी
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में नए साल के जश्न की सुबह एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यह कहानी है 15 साल की अंजलि की, उसके दादा और उस हिम्मत की जिसने एक लड़की को अपनी इज्जत बचाने के लिए समाज के सामने मिसाल बना दिया।
परिवार की पृष्ठभूमि
मुंशी सिंह का परिवार साधारण था—पत्नी मंजू देवी, एक बेटी और बेटी की बेटी अंजलि। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। अंजलि के पिता राम सिंह ऑटो चलाते थे और दिन-रात मेहनत करके घर चलाते थे। त्योहारों पर भी उनके घर में खुशियां कम ही आती थीं, क्योंकि पैसे की तंगी हमेशा बनी रहती थी।

राम सिंह ने अपनी बेटी अंजलि से वादा किया था कि अगले नए साल पर वे जरूर पिकनिक मनाएंगे, अच्छा खाना खाएंगे, खुशियां मनाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। अचानक एक बीमारी के चलते राम सिंह की मौत हो गई। घर की जिम्मेदारी दादा के कंधों पर आ गई। दादा ने वादा किया कि इस बार नया साल जरूर खास होगा।
नया साल का दिन
1 जनवरी 2026, सुबह 11 बजे। अंजलि ने अपने दादा से जिद की, “दादा जी, इस बार हमें जंगल में पिकनिक मनानी है। पापा का सपना था, आप पूरा करेंगे?” दादा राजी हो गए। दोनों जंगल की ओर निकल पड़े। अंजलि ने खाने-पीने का सामान, पिकनिक के लिए कुछ आइटम्स और सुरक्षा के लिए एक छोटा हथियार भी रख लिया था।
जंगल में पहुंचकर दोनों ने मिलकर खाना बनाया, बातें कीं, पिकनिक मनाने लगे। लेकिन दादा के व्यवहार में कुछ अजीब था। अंजलि को याद आया कि दादा अक्सर नशा करते थे, रात को ऑटो चलाकर लौटते हुए शराब पीते थे। उस दिन भी दादा ने चुपके से नशा किया और उनका व्यवहार बदल गया।
हादसे की शुरुआत
नशे में दादा का ध्यान बदल गया। वे अपने रिश्ते को भूल गए, अंजलि को हवस की नजर से देखने लगे। अंजलि सुंदर थी, मासूम थी और दादा की नजरों में अब सिर्फ वासना थी। दादा उसके करीब आने लगे, अंजलि को छूने की कोशिश करने लगे। अंजलि घबरा गई, पूछा “दादा जी, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?” लेकिन दादा ने उसे धमकाया, “अगर कुछ स्पेशल मनाना है तो मेरा एक काम करो।”
अंजलि ने साहस दिखाया, दादा को थप्पड़ मार दिया। दादा गुस्से में आ गए, अंजलि के कपड़े उतारने की कोशिश करने लगे। अंजलि जोर से चीखी, लेकिन जंगल में कोई नहीं था। दादा ने अंजलि को झाड़ियों में ले जाकर दबोचने की कोशिश की।
हिम्मत और बचाव
अंजलि को याद आया कि उसके पास छोटा हथियार है। उसने दादा से कहा, “थोड़ा रुकिए, मुझे पांच मिनट दीजिए।” दादा ने सोचा कि अब उसकी इच्छा पूरी होगी। जैसे ही दादा ने फिर से हमला किया, अंजलि ने हथियार निकालकर दादा के प्राइवेट पार्ट पर वार कर दिया। दादा चीखते हुए गिर पड़े, दर्द से तड़पने लगे। अंजलि दौड़कर सड़क पर पहुंची, वहां लोगों को आवाज दी।
लोग इकट्ठे हुए, अंजलि ने सबको जंगल ले जाकर दादा की हालत दिखाई। दादा की मौके पर ही मौत हो गई। अंजलि बेहोश हो गई। लोगों ने पुलिस को बुलाया। पुलिस आई, अंजलि को होश में लाया गया, पूछताछ की गई।
पुलिस की जांच और समाज की प्रतिक्रिया
पुलिस ने पूछताछ की, अंजलि ने पूरी कहानी बताई। पुलिस वाले भी हैरान रह गए—इतनी छोटी लड़की ने इतनी बड़ी हिम्मत कैसे दिखा दी? पुलिस ने जांच की, गवाहों के बयान लिए। अंजलि ने बताया कि अगर वह ऐसा नहीं करती तो उसकी इज्जत तार-तार हो जाती। पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया, बल्कि अंजलि की हिम्मत की सराहना की।
समाज में चर्चा होने लगी—क्या अंजलि ने सही किया? क्या रिश्तों की मर्यादा टूट चुकी है? क्या आजकल के जमाने में बेटियों को अपनी सुरक्षा खुद करनी चाहिए? पुलिस विभाग ने अंजलि को नए साल की शुभकामनाएं दीं, उसकी बहादुरी को सलाम किया।
सीख
यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि समाज के बदलते रिश्तों, हिम्मत और जागरूकता की है। अंजलि ने अपनी इज्जत के लिए जो कदम उठाया, वह साहस की मिसाल है। रिश्तों की मर्यादा तभी तक है, जब तक सम्मान है। जब कोई रिश्तेदार अपनी हदें पार करे, तो बेटियों को चुप नहीं रहना चाहिए।
अंजलि की कहानी हमें सिखाती है कि बेटियां कमजोर नहीं हैं। उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए खुद आगे आना चाहिए। समाज को भी बेटियों की हिम्मत को सम्मान देना चाहिए। रिश्ते, चाहे कितने भी गहरे हों, अगर उनमें खतरा हो तो उन्हें तोड़ना ही सही है।
निष्कर्ष
नया साल, पिकनिक, जंगल और एक लड़की की हिम्मत—यह कहानी हर परिवार को सोचने पर मजबूर करती है। बेटियों को कमजोर समझना बंद करें, उन्हें सुरक्षा और सम्मान दें। अंजलि ने जो किया, वह अपनी इज्जत के लिए था। अगर आपको यह कहानी पसंद आई, तो कमेंट करें, शेयर करें और अपनी राय जरूर लिखें।
क्या अंजलि ने सही किया? क्या समाज को बेटियों की हिम्मत को सलाम करना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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