नोकर ने पुलिस दरोगा की बेटी के साथ कर दिया कारनामा/अंजाम ठीक नहीं हुआ/

.
.

अलवर जिले के किशनपुर गांव में दोहरी हत्या: पुलिस दरोगा ने बेटी और नौकर को मारी गोली, “ऑनर किलिंग” की आशंका

रिपोर्ट: विशेष संवाददाता

राजस्थान के अलवर जिले के एक छोटे से गांव किशनपुर में 16 फरवरी 2026 को हुई दोहरी हत्या की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि गांव में तैनात पुलिस दरोगा राजशेखर ने अपनी ही बेटी कंचन और घर में काम करने वाले नौकर कमल सिंह को लाइसेंसी पिस्तौल से गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। प्रारंभिक जांच में मामला पारिवारिक विवाद और कथित प्रेम संबंध से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपी दरोगा को मौके से गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


परिवार और पृष्ठभूमि

किशनपुर गांव निवासी मोहन सिंह एक फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी पत्नी का तीन वर्ष पूर्व निधन हो चुका था। परिवार में उसका इकलौता बेटा कमल सिंह ही था, जो 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था, हालांकि पढ़ाई में उसका प्रदर्शन कमजोर बताया जाता है। गांव के लोगों के अनुसार कमल का स्वभाव कुछ लापरवाह था और वह पढ़ाई से अधिक दोस्तों के साथ समय बिताता था।

उधर, गांव में ही तैनात पुलिस दरोगा राजशेखर अपनी पत्नी और बेटी कंचन के साथ रहते थे। कंचन 12वीं कक्षा की छात्रा थी और पास के शहर के एक निजी विद्यालय में पढ़ाई करती थी। परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा अच्छी मानी जाती थी और राजशेखर अपने सख्त स्वभाव के लिए जाने जाते थे।


नौकरी की शुरुआत और बढ़ती नजदीकियां

दिसंबर 2025 में मोहन सिंह ने अपने बेटे कमल को सुधारने की नीयत से उसे काम पर लगाने का निर्णय लिया। इसी सिलसिले में वह कमल को लेकर राजशेखर के घर पहुंचे। बातचीत के बाद राजशेखर ने कमल को घरेलू कामकाज के लिए अपने यहां नौकरी पर रख लिया।

शुरुआती दिनों में कमल ने मेहनत से काम किया और घर के सदस्यों का विश्वास जीत लिया। जांच में सामने आया है कि इसी दौरान कमल और कंचन के बीच बातचीत बढ़ी और दोनों के बीच कथित प्रेम संबंध स्थापित हो गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर साझा किए और अक्सर बातचीत करने लगे।

कुछ समय बाद दोनों के शहर के होटलों में मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि इस संबंध में होटल प्रबंधन और अन्य साक्ष्यों की जांच अभी जारी है।


जन्मदिन का दिन और होटल की घटना

10 जनवरी 2026 को कंचन का जन्मदिन था। परिवार ने शाम को घर पर कार्यक्रम रखा, लेकिन दिन में कंचन और कमल के शहर जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार दोनों ने एक होटल में कमरा बुक किया था। इस संबंध में होटल रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।

बताया जा रहा है कि यह सिलसिला कई सप्ताह तक चलता रहा। गांव में भी दोनों के संबंधों की चर्चा होने लगी थी, लेकिन परिवार को इसकी जानकारी नहीं थी या वह इससे अनजान था।


16 फरवरी की सुबह: तबीयत बिगड़ने से खुला राज

घटना वाले दिन, 16 फरवरी 2026 की सुबह कंचन की तबीयत अचानक खराब हो गई। उसे उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद राजशेखर उसे नजदीकी अस्पताल ले गए। मेडिकल जांच में डॉक्टरों ने बताया कि कंचन गर्भवती है। यह सुनकर राजशेखर स्तब्ध रह गए।

घर लौटने के बाद उन्होंने बेटी से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पहले तो कंचन ने कुछ नहीं बताया, लेकिन सख्ती के बाद उसने कमल का नाम लिया। इसके बाद घटनाक्रम ने हिंसक रूप ले लिया।


गोलीकांड: कुछ ही मिनटों में दो मौतें

आरोप है कि गुस्से में आकर राजशेखर ने अपने कमरे से लाइसेंसी पिस्तौल निकाली और पहले कमल पर दो गोलियां चलाईं। कमल की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी कंचन को भी गोली मार दी। कंचन ने भी घटनास्थल पर दम तोड़ दिया।

गोलियों की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम ने पहुंचकर दोनों शवों को कब्जे में लिया और आरोपी दरोगा को गिरफ्तार कर लिया।


कानूनी स्थिति

पुलिस ने राजशेखर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है। लाइसेंसी हथियार को भी जब्त कर लिया गया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो राजशेखर को उम्रकैद या मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। चूंकि घटना में दो हत्याएं शामिल हैं, मामला गंभीर श्रेणी में आता है।


“ऑनर किलिंग” की आशंका

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को संभावित “ऑनर किलिंग” करार दिया है। उनका कहना है कि परिवार की प्रतिष्ठा के नाम पर की गई हत्या किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती। कानून अपने हाथ में लेना एक दंडनीय अपराध है।

हालांकि कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि राजशेखर भावनात्मक आघात में थे और अचानक आवेश में आकर यह कदम उठा बैठे। लेकिन कानून विशेषज्ञों का कहना है कि उकसावे या गुस्से की स्थिति भी हत्या को न्यायोचित नहीं ठहरा सकती।


सामाजिक प्रश्न

यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ जाती है:

क्या परिवार में संवाद की कमी इस त्रासदी का कारण बनी?

क्या युवाओं को सही मार्गदर्शन न मिल पाने से ऐसे हालात बनते हैं?

क्या समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा की अवधारणा अभी भी इतनी कठोर है कि लोग हिंसा का रास्ता चुन लेते हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में बच्चों के साथ खुलकर बातचीत और भावनात्मक समर्थन बेहद जरूरी है। साथ ही, कानून के प्रति सम्मान और आत्मसंयम भी आवश्यक है।


गांव में सन्नाटा

घटना के बाद किशनपुर गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है। मोहन सिंह अपने बेटे की मौत से टूट चुके हैं। वहीं राजशेखर का परिवार भी बिखर गया है। एक ही दिन में दो जिंदगियां खत्म हो गईं और एक परिवार जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बातचीत और समझदारी से कदम उठाया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था।


पुलिस की आगे की कार्रवाई

पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। मोबाइल कॉल डिटेल्स, होटल रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे घटना की समयरेखा स्पष्ट होगी।

जांच अधिकारी ने बताया कि “हम हर पहलू से जांच कर रहे हैं। कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”


निष्कर्ष

अलवर जिले की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक विफलता का भी उदाहरण है। संवाद की कमी, भावनात्मक आवेश और सामाजिक दबाव—इन सबने मिलकर तीन जिंदगियों को तबाह कर दिया।

अंततः यह न्यायालय तय करेगा कि राजशेखर को क्या सजा मिलेगी। लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है—चाहे वह स्वयं कानून का रखवाला ही क्यों न हो।

समाज के लिए यह एक चेतावनी है कि सम्मान और क्रोध के नाम पर हिंसा का रास्ता कभी समाधान नहीं हो सकता।