नौकर ने पुलिस दरोगा की पत्नी के साथ किया करनामा/अंजाम ठीक नहीं हुआ/

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वासना, बेवफाई और खूनी प्रतिशोध: जब एक पुलिस दरोगा की पत्नी ने नौकर के साथ लांघी मर्यादा की सारी सीमाएं

बागपत, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश का बागपत जिला अक्सर अपनी वीरता और कृषि के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही में यहाँ के गाजीपुर गाँव में जो घटा, उसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक आलीशान मकान, समाज में रसूख रखने वाला पुलिस दरोगा और उसकी खूबसूरत पत्नी—बाहर से देखने पर यह एक सुखी परिवार लगता था, लेकिन इस घर की चारदीवारी के भीतर बेवफाई का जो खेल चल रहा था, उसका अंत मौत के वीभत्स तांडव के साथ हुआ।

पात्र और पृष्ठभूमि: एक अधूरा परिवार

इस घटना का मुख्य पात्र है जंगशेर सिंह, जो नजदीकी पुलिस स्टेशन में हेड कांस्टेबल (दरोगा स्तर के अधिकार रखने वाला) के पद पर तैनात था। जंगशेर के पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी। गाँव में उसका सबसे आलीशान घर था और पाँच एकड़ जमीन से अच्छी आय होती थी। लेकिन जंगशेर का व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा था। वह ‘शराब, कबाब और शवाब’ का शौकीन था और अपनी पत्नी अनीता देवी को समय देने के बजाय बाहर की महिलाओं में दिलचस्पी रखता था।

अनीता देवी, जो स्वभाव से एक घरेलू महिला थी, अपने पति की उपेक्षा से आहत रहती थी। जंगशेर अक्सर 15-20 दिनों तक ड्यूटी के बहाने घर नहीं आता था। उनका इकलौता बेटा बबलू अपने माता-पिता के आए दिन के झगड़ों से तंग आकर अपनी नानी के घर रहने चला गया था। घर में अनीता बिल्कुल अकेली रह गई थी, और यही अकेलापन उसके भीतर एक भयानक तूफान को जन्म दे रहा था।

दरोगा की अपनी अनैतिकता

कहानी में मोड़ तब आता है जब जंगशेर खुद मर्यादा की सीमाएं तोड़ता है। 1 दिसंबर 2025 की रात, नशे में धुत जंगशेर के दरवाजे पर गाँव की एक महिला कोयल देवी मदद मांगने आती है। उसका पति सुरेश जुए के आरोप में जेल में था। जंगशेर ने मदद के बदले कोयल देवी के सामने उसकी अस्मत का सौदा किया। अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए, उस रात जंगशेर ने कोयल के घर जाकर उसके साथ गलत संबंध बनाए।

लेकिन जंगशेर यह नहीं जानता था कि उसकी पत्नी अनीता ने यह सब सुन और देख लिया था। पति की इस घिनौनी हरकत ने अनीता के मन में प्रतिशोध और खुद की दबी हुई इच्छाओं को जगा दिया। उसने सोचा कि यदि उसका पति बाहर मुँह मार सकता है, तो वह क्यों नहीं?

नौकर विजय का प्रवेश और अनैतिक संबंधों की शुरुआत

अनीता ने घर के कामकाज के बहाने एक नौकर रखने का फैसला किया। गाँव की कोई महिला जंगशेर के चरित्र के कारण वहां काम करने को तैयार नहीं थी। तभी अनीता की नजर घर के सामने नाई की दुकान चलाने वाले विजय पर पड़ी। विजय युवा था और अनीता उसकी ओर पहले से ही आकर्षित थी। अनीता ने विजय को 10,000 रुपये महीने का लालच देकर घर का नौकर रख लिया।

विजय भी लालची और ढीले चरित्र का था। जल्द ही मालकिन और नौकर के बीच की दूरियां खत्म हो गई। 26 दिसंबर 2025 को, जब अनीता की शादी की सालगिरह थी और जंगशेर ने घर आने से मना कर दिया, तो अनीता ने विजय को रात में घर बुलाया। उस रात अनीता ने विजय को 5,000 रुपये अतिरिक्त दिए और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद यह सिलसिला आम हो गया। अनीता अब पूरी तरह से विजय के प्यार और वासना के जाल में फंस चुकी थी।

वासना का विस्तार: एक से दो हुए साथी

अनीता की वासना अब इस कदर बढ़ गई थी कि उसने विजय के दोस्त दर्शन सिंह को भी इस खेल में शामिल कर लिया। एक दिन नशे की हालत में विजय ने दर्शन को अनीता के बारे में बताया। अनीता, जो अब नैतिकता के सारे बंधन तोड़ चुकी थी, दर्शन को भी अपने घर बुलाने के लिए राजी हो गई। अब दरोगा की गैर-हाजिरी में एक पत्नी दो-दो गैर मर्दों के साथ रंगरेलियां मना रही थी। वह उन्हें पैसे भी देती थी और वक्त भी।

दरोगा का शक और खूनी जाल

कहानी का सबसे भयानक अध्याय तब शुरू होता है जब गाँव में अनीता के चर्चे होने लगते हैं। जंगशेर, जो खुद एक शातिर पुलिसवाला था, उसे अपनी पत्नी की गतिविधियों पर शक हो गया। उसने अपनी पत्नी पर नजर रखनी शुरू कर दी। 10 जनवरी 2026 को जंगशेर ने एक जाल बुना। उसने अनीता को फोन कर कहा कि वह रात को घर नहीं आएगा।

अनीता ने इसे एक मौका समझा और विजय व दर्शन को रात 9:30 बजे घर बुला लिया। उधर जंगशेर अंधेरे में घर के बाहर घात लगाकर बैठा था। जैसे ही अनीता ने दोनों को अंदर लेकर दरवाजा बंद किया, जंगशेर ने कुछ देर इंतजार किया।

अंजाम: खूनी खेल और सरेंडर

रात के सन्नाटे में जब घर के भीतर अनैतिक काम चरम पर था, तभी दरवाजे पर जंगशेर ने जोर-जोर से दस्तक दी। अनीता का दिल बैठ गया। उसने कांपते हाथों से दरवाजा खोला। सामने साक्षात ‘यमराज’ के रूप में जंगशेर खड़ा था। कमरे के अंदर विजय और दर्शन आपत्तिजनक स्थिति में थे। पुलिसवाले को सामने देख दोनों लड़के उसे धक्का देकर भाग निकले, लेकिन अनीता की किस्मत ने उसका साथ छोड़ दिया था।

जंगशेर ने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लिया। उसने अनीता को घसीटकर कमरे में पटका, उसके हाथ-पैर बांधे और उसके मुँह में कपड़ा ठूंस दिया। गुस्से और अपमान की आग में जल रहे जंगशेर ने पहले अनीता के साथ बर्बरता की और फिर रसोई से एक धारदार चाकू लेकर आया। बिना एक पल सोचे, उसने अपनी ही पत्नी की गर्दन रेत दी।

कमरा खून से लथपथ था। बेवफाई का हिसाब हो चुका था। रात के करीब 1 बजे जंगशेर खुद अपने पुलिस स्टेशन पहुँचा और अपने खून से सने हाथ दिखाकर सरेंडर कर दिया। उसने पुलिस को अपनी पूरी कहानी सुनाई।

कानूनी और सामाजिक पहलू

पुलिस ने जंगशेर के खिलाफ हत्या (धारा 302) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं:

    क्या जंगशेर का अपनी पत्नी की हत्या करना सही था? कानून इसकी इजाजत कभी नहीं देता।

    रिश्तों में संवाद की कमी: यदि जंगशेर खुद वफादार होता और अपनी पत्नी को समय देता, तो क्या अनीता भटकती?

    वासना का अंत: अनीता, विजय और दर्शन—तीनों ने क्षणिक सुख के लिए अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली।

निष्कर्ष

बागपत की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। यह बताती है कि जब घर का मुखिया खुद अनैतिक होता है, तो घर की नींव डगमगा जाती है। बेवफाई का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है। आज जंगशेर जेल की सलाखों के पीछे है, अनीता कब्र में है और उनका बेटा बबलू अनाथ जैसा जीवन जी रहा है। वासना की इस आग ने एक हंसते-खेलते (दिखने वाले) परिवार को राख कर दिया।