पति की एक गलती की वजह से पत्नी के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/
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शराब की वेदी पर रिश्तों की बलि: अलवर के नाथूराम हत्याकांड की पूरी दास्तां
अलवर, राजस्थान।
राजस्थान के शांत माने जाने वाले अलवर जिले के इंद्रगढ़ गांव में हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल मानवता को शर्मसार किया, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि नशे की लत एक इंसान को कितना नीचे गिरा सकती है। यह मामला एक शराबी पति की हत्या का है, जिसे उसकी अपनी पत्नी और बेटी ने अंजाम दिया। लेकिन इस हत्या के पीछे की कहानी प्रतिशोध, मजबूरी और उस जमीर की है जो शराब की एक बोतल के लिए बिक चुका था।
1. एक खुशहाल परिवार और शराब का ग्रहण
इंद्रगढ़ गांव में रहने वाला नाथूराम एक साधारण मजदूर था। उसके परिवार में उसकी सुंदर पत्नी कांता देवी और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली मेधावी बेटी तान्या थी। शुरुआत में नाथूराम मेहनत-मजदूरी कर घर का गुजारा ठीक से चलाता था। कांता देवी एक समर्पित पत्नी थी और तान्या एक संस्कारी और होनहार छात्रा।
लेकिन धीरे-धीरे नाथूराम को शराब की लत लग गई। यह लत इस कदर बढ़ी कि वह मजदूरी के सारे पैसे शराब में उड़ाने लगा। घर में दरिद्रता छाने लगी और तीन वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया। शराब ने नाथूराम के सोचने-समझने की शक्ति और उसके जमीर को पूरी तरह खत्म कर दिया था।
2. मजबूरी का फायदा और सरपंच की गंदी नजर
तारीख 8 दिसंबर 2025 को नाथूराम ने अपनी पत्नी कांता को यह कहकर मजदूरी पर चलने को राजी किया कि बेटी की शादी के लिए पैसे जोड़ने हैं। वे दोनों गांव के सरपंच दिलावर सिंह के निर्माणाधीन घर पर काम करने पहुंचे। वहां के मिस्त्री रतन सिंह और खुद सरपंच दिलावर सिंह की नजर कांता की खूबसूरती पर पड़ गई।
सरपंच दिलावर सिंह, जो नाथूराम की शराब की कमजोरी को जानता था, उसने एक बेहद घिनौनी चाल चली। उसने नाथूराम को शराब की दो बोतलें और कुछ रुपयों का लालच दिया। बदले में उसने कांता के साथ समय गुजारने की मांग की। एक पति, जिसका जमीर मर चुका था, उसने शराब के लिए अपनी पत्नी का सौदा कर दिया। कांता के विरोध के बावजूद, नाथूराम ने उसे जबरन सरपंच के कमरे में धकेल दिया।
3. ब्लैकमेलिंग का अंतहीन सिलसिला
अगले दिन, जब कांता ने काम पर जाने से मना कर दिया, तो मिस्त्री रतन सिंह उनके घर पहुंचा। रतन सिंह ने सरपंच और नाथूराम के बीच के सौदे को देख लिया था। उसने कांता को धमकी दी कि अगर वह उसके साथ संबंध नहीं बनाएगी, तो वह पूरे गांव में उसकी बदनामी कर देगा और तान्या की शादी कहीं नहीं होने देगा। अपनी बेटी के भविष्य को बचाने के लिए मजबूर कांता एक बार फिर ब्लैकमेलिंग का शिकार हुई और मिस्त्री रतन सिंह ने भी उसका फायदा उठाया।
4. बेटी तान्या के सामने खुला कड़वा सच
15 दिसंबर 2025 को एक ऐसी घटना हुई जिसने इस राज को बेपर्दा कर दिया। तान्या स्कूल की फीस दोबारा लेने घर आई क्योंकि उसकी पहली फीस चोरी हो गई थी। घर पहुंचते ही उसने कमरे में सरपंच दिलावर सिंह को आपत्तिजनक स्थिति में देखा। शुरुआत में तान्या ने अपनी मां को गलत समझा और उसे भला-बुरा कहा।
लेकिन जब सच सामने आया कि उसका पिता ही इस पूरे गंदे खेल का मास्टरमाइंड है, तो तान्या के पैरों तले जमीन खिसक गई। नाथूराम ने बेशर्मी से स्वीकार किया कि वह अपनी शराब की जरूरतों के लिए यह सब करवा रहा है। उसने यहां तक कहा कि यह सब तान्या की शादी के खर्च के लिए है। कांता ने रोते हुए तान्या को बताया कि उसका पिता उसे शराब के लिए किसी गैर मर्द के हाथों बेच चुका है।
5. खौफनाक रात और प्रतिशोध का अंत
तान्या को अब डर सताने लगा था कि शराब के नशे में धुत उसका पिता कल को उसे भी किसी के हवाले कर सकता है। उस रात, जब नाथूराम शराब के नशे में बेसुध होकर सो रहा था, मां-बेटी के अंदर का डर गुस्से और प्रतिशोध में बदल गया।
तान्या ने कुल्हाड़ी उठाई और कांता ने रसोई से धारदार चाकू। तान्या ने अपने पिता के सिर और गर्दन पर कुल्हाड़ी से जोरदार प्रहार किए, जिससे उसका गला कट गया। कांता ने भी चाकू से कई वार किए। नफरत और सालों के उत्पीड़न का गुबार उस रात खून बनकर बह निकला। हत्या के बाद दोनों ने भागने की कोशिश नहीं की, बल्कि थाने जाकर सरेंडर कर दिया।
6. कानूनी स्थिति और सामाजिक सवाल
पुलिस ने नाथूराम का शव बरामद कर लिया है और कांता देवी व तान्या को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में वे न्यायिक हिरासत में हैं और मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
निष्कर्ष: सबक और चिंतन
यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि हमारे समाज की कई बुराइयों की तरफ इशारा करती है:
शराब का सामाजिक दुष्प्रभाव: शराब किस तरह एक इंसान को हैवान बना देती है कि वह अपने ही परिवार का सौदा करने लगता है।
महिलाओं की मजबूरी: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अक्सर परिवार की इज्जत और बच्चों के भविष्य के नाम पर चुपचाप शोषण सहती हैं।
कानून को हाथ में लेना: क्या कांता और तान्या के पास पुलिस के पास जाने का विकल्प था? उनके द्वारा उठाया गया कदम सही था या गलत, यह न्यायपालिका तय करेगी, लेकिन इसने समाज को हिला कर रख दिया है।
इस घटना ने अलवर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
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