पति को ‘गार्ड’ समझकर किया अपमान, वो शहर का सबसे बड़ा अफसर निकला! 😱

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सच्चाई की पहचान

सूरज की किरणें धीरे-धीरे बनारस के पुराने मोहल्ले में फैल रही थीं। शर्मा सदन के बाहर बच्चों की किलकारियाँ गूंज रही थीं, लेकिन घर के अंदर काजल का मन उदासी से भरा था। पिछले कई महीनों से उसका दिल रोहन को लेकर बेचैन था। वह अपने पति की साधारण नौकरी, उसकी नीली वर्दी और हर महीने मुश्किल से आने वाली तनख्वाह से परेशान थी।

काजल ने हमेशा सपने देखे थे – बड़ा घर, चमचमाती कार, महंगे कपड़े। लेकिन शादी के दो साल बाद भी उसकी जिंदगी में वही पुराना किराए का मकान, टूटी दीवारें और एक गार्ड की वर्दी थी। वह अक्सर रोहन से झगड़ती, उसे ताने मारती – “कब तक ऐसे ही जिएंगे? कब तक दूसरों की चौकीदारी करते रहोगे?”

रोहन शांत रहता। कभी जवाब नहीं देता। उसकी आंखों में एक गहरा दर्द था, जिसे वह छुपा लेता। एक दिन, काजल की बुआ घर आईं। उन्होंने पूछा, “तुम्हारा पति क्या करता है?” काजल ने झूठ बोल दिया, “बैंक में क्लर्क है।” लेकिन उसके दिल में शर्म थी। वह चाहती थी कि रोहन कुछ बड़ा करे, कुछ ऐसा जिससे लोग उसकी तारीफ करें।

रात को जब रोहन घर लौटा, उसके हाथ में सब्जी का थैला था। काजल ने फिर ताना मारा, “मेरी बहन के पति को देखो, उनके पास बंगला है, कार है। और तुम? सिर्फ गार्ड की नौकरी और ये हजार रुपए की तनख्वाह।”

रोहन ने सब्जी का थैला मेज पर रखा, टोपी उतारी और बोला, “काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। मैं मेहनत करता हूँ, चोरी नहीं।”

काजल ने गुस्से में चूड़ियाँ तोड़ दीं। रोहन का दिल टूट गया। लेकिन वह कुछ नहीं बोला। वह जानता था कि उसकी असली पहचान काजल के सामने आना खतरे से खाली नहीं है।

अगले दिन काजल के कजिन की शादी थी। ग्रैंड होटल में रिसेप्शन था। काजल ने रोहन से कहा, “अगर मेरी इज्जत बचाना चाहते हो तो मत आना। मैं अकेली चली जाऊंगी।” रोहन चुपचाप मुस्कुराया, “एक दिन तुम्हें मुझ पर गर्व होगा।”

शाम को होटल रोशनी से जगमगा रहा था। काजल ने अपनी सबसे सुंदर साड़ी पहनी थी, ताकि गरीबी छिपा सके। रिश्तेदारों के बीच बैठी थी, लेकिन मन दरवाजे पर था – क्या रोहन आएगा? तभी उसके अमीर मामा जी ने मजाक उड़ाया, “तेरा पति गार्ड है ना, कहीं गेट पर खड़ा है?” सब हंस पड़े।

तभी रोहन अंदर आया। साधारण शर्ट पहने, शांत कदमों से। मामा जी ने फिर मजाक किया, “हीरो आ गया, प्लेट गिरा न देना।” काजल शर्म से लाल हो गई। रोहन ने सबकी हंसी नजरअंदाज की, जेब से एक डिब्बी निकाली और काजल को दी, “सालगिरह मुबारक हो।” डिब्बी में सोने की चैन थी, जो रोहन ने महीनों की तनख्वाह से खरीदी थी।

अचानक होटल की लाइटें बुझ गईं। अफरातफरी मच गई। जब लाइट आई, चार लोग स्टेज पर थे, हथियारों के साथ। उन्होंने दरवाजे लॉक कर दिए। “कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा,” लीडर ने कहा। काजल रोहन से चिपक गई, “अब क्या होगा?” रोहन ने हाथ कसकर पकड़ा, “जब तक मैं हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होगा।”

रोहन बाथरूम जाने का बहाना बनाकर बाहर गया। काजल को लगा, वह डरकर छिपने गया है। लेकिन बाहर गलियारे में रोहन बदल चुका था। उसने ब्लूटूथ डिवाइस ऑन किया, “कंट्रोल, यह ईगल है। होटल में छह घुसपैठिए हैं। पुलिस बाहर रहे। मैं हैंडल कर रहा हूँ।”

रोहन ने बिजली बॉक्स से हॉल की लाइटें फ्लक्चुएट कीं। अपराधी कंफ्यूज हो गए। एक आदमी बाहर आया, रोहन ने उसे कमांडो दांव से बेहोश कर दिया। दूसरा भी बाहर आया, वही हाल। हॉल में लोग डरने लगे, बाहर क्या हो रहा है?

अचानक हॉल के स्पीकर पर भारी आवाज गूंजी, “तुम्हारा खेल खत्म हो चुका है।” स्टेज के पीछे से धुआं उठा, आग बुझाने वाले यंत्र का पिन निकाल कर रोहन ने फेंक दिया था। धुएं की आड़ में वह अंदर आया, अपराधियों को पल भर में निहत्था कर दिया। दो मिनट में चार अपराधी गिर चुके थे, लीडर अकेला था।

लीडर ने कुर्सी उठाकर रोहन पर हमला किया, लेकिन रोहन ने हवा में रोक लिया और लीडर को धक्का देकर गिरा दिया। तभी पुलिस की गाड़ियां आईं, कमिश्नर अंदर आए, और रोहन के सामने सैल्यूट किया, “जय हिंद सर। आपने अकेले ही स्थिति संभाल ली।”

काजल के होश उड़ गए। उसका पति, जिसे वह गार्ड समझती थी, शहर का सबसे बड़ा अफसर निकला। पुलिस कमिश्नर उसे “एजेंट डेल्टा” कह रहे थे। सबके सामने रोहन की असली पहचान आ गई।

घर लौटते वक्त काजल खामोश थी। उसे याद आया, कैसे रोहन ने उसकी दवाई के लिए अपनी घड़ी बेच दी थी, कैसे बारिश में भीगकर ओवरटाइम किया था। जिसे वह कंजूसी समझती थी, वह त्याग था। जिसे कायरता समझती थी, वह धैर्य था।

घर पहुंचकर काजल ने रोहन से पूछा, “कौन हो तुम? क्यों छुपाया इतना बड़ा सच?” रोहन ने आईडी कार्ड दिखाया, “मैं देश की सुरक्षा के लिए काम करता हूँ। दो साल पहले एक मिशन पर था, दुश्मनों से परिवार की सुरक्षा के लिए मुझे अंडरग्राउंड होना पड़ा। अगर तुम्हें पता होता, तो खतरा बढ़ जाता।”

काजल रो पड़ी, “मैंने तुम्हें कितना जलील किया।” रोहन ने हाथ थाम लिया, “गलती तुम्हारी नहीं थी। एक पत्नी उम्मीद करती है। लेकिन आज मेरा मिशन पूरा हो गया है। अब मुझे छुपना नहीं है।”

अगली सुबह मोहल्ले के लोग हैरान थे। सरकारी गाड़ियां, अफसर की वर्दी में रोहन। मिस्टर वर्मा भी शर्मिंदा थे। रोहन ने कहा, “इज्जत वर्दी की नहीं, इंसान की कीजिए।”

गाड़ी में बैठकर काजल ने पूछा, “अब हम कहां जा रहे हैं?” रोहन मुस्कुराया, “नई शुरुआत की तरफ।” पीछे एक बड़ा सबक छूट गया – कभी किसी को उसके काम या कपड़ों से जज मत करो। रिश्ते में भरोसा और सम्मान सबसे जरूरी है।

समाप्त