पत्नी की एक गलती की वजह से पति ने कर दिया कां#ड/पत्नी को गो*ली मा*र दी/

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लखनऊ का खौफनाक ति-हरा ह-त्या-कांड: व-फा-दारी, धो-खे और प्रति-शोध की र-क्त-रंजित दास्तां

[लखनऊ, उत्तर प्रदेश – विशेष ब्यूरो]

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके में स्थित ‘टेरा खास’ गांव, जो कभी अपनी शांति के लिए जाना जाता था, आज एक ऐसी वि-भत्स घटना का गवाह बना है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक सफल मेडिकल स्टोर संचालक ने अपनी पत्नी और दो अन्य युवकों की नि-र्मम ह-त्या कर पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे छिपी हकीकत बे-व-फाई और खु-ूनी अं-जाम की एक काली दास्तां है।

1. प्रमोद सिंह: एक सफल जीवन की नींव

प्रमोद सिंह टेरा खास गांव का एक प्रतिष्ठित नाम था। उसने गांव में एक मेडिकल शॉप खोली थी। उसकी मेहनत और कम मुनाफे पर दवाइयां बेचने की नीति ने उसे बहुत जल्द लोकप्रिय बना दिया। उसकी दुकान पर सुबह से रात तक ग्राहकों का तांता लगा रहता था। इसी व्यापार के दम पर प्रमोद ने न केवल आलीशान घर बनाया, बल्कि कई संपत्तियां भी खरीदीं।

हालांकि, इस सफलता की एक भारी कीमत थी। प्रमोद सुबह 7 बजे दुकान निकल जाता और रात 10:30 बजे वापस आता। वह अपने परिवार को आर्थिक सुख तो दे रहा था, लेकिन अपनी पत्नी ‘कल्पना’ को वह समय नहीं दे पा रहा था जिसकी उसे दरकार थी।

2. कल्पना: सुंदरता और भीतर पनपता असंतोष

कल्पना एक अत्यंत सुंदर महिला थी। इसके विपरीत, प्रमोद का रंग काफी काला था। पुलिस जांच और ग्रामीणों के बयानों के अनुसार, कल्पना अक्सर अपने पति के रंग और उसकी व्यस्तता को लेकर हीन भावना महसूस करती थी। वह पार्टियों या शादियों में प्रमोद के साथ जाने से कतराती थी। इसी अकेलेपन और असंतोष ने उसे ग-ल-त रास्तों की ओर धकेल दिया।

3. धो-खे का पहला जाल: नौकर राजीव

जब प्रमोद ने काम के दबाव के कारण दुकान के लिए एक सहायक की तलाश शुरू की, तो कल्पना ने बड़ी चालाकी से अपने पड़ोसी ‘राजीव’ का नाम सुझाया। राजीव एक 12वीं पास युवक था जो कारखाने में काम करता था। प्रमोद ने उस पर भरोसा कर उसे नौकरी दे दी।

लेकिन प्रमोद इस बात से बेखबर था कि राजीव और कल्पना के बीच पहले से ही आंख-मिचौली चल रही थी। 16 जनवरी 2026 को, जब प्रमोद अपना टिफिन घर भूल गया, तो उसने राजीव को घर भेजा। उसी दिन घर के बंद दरवाजों के पीछे उन दोनों के बीच अ-वै-ध सं-बंधों की शुरुआत हुई। कल्पना उसे पैसे का लालच देकर अक्सर घर बुलाने लगी।

4. दूसरा प्रेमी: मिस्त्री पंकज की एंट्री

कल्पना की भूख यहीं शांत नहीं हुई। 25 जनवरी 2026 को जब घर की वाशिंग मशीन खराब हुई, तो गांव का मिस्त्री पंकज घर आया। पंकज को देखते ही कल्पना ने उसे भी अपने मोहपाश में बांध लिया। उसने पंकज को अधिक मजदूरी दी और उसके साथ भी शा-री-रि-क सं-बंध बना लिए। अब कल्पना एक साथ दो मर्दों के साथ खेल खेल रही थी।

5. श-क की शुरुआत और टकराव

कहते हैं कि जुर्म की उम्र लंबी नहीं होती। 5 फरवरी 2026 को जब राजीव प्रमोद का फोन लेने घर पहुंचा, तो पंकज मिस्त्री ने उसे वहां से निकलते देख लिया। पंकज को यह बर्दाश्त नहीं हुआ कि कल्पना किसी और के साथ भी सं-बंध रख रही है। उसने सीधे प्रमोद की दुकान पर जाकर सारा सच उगल दिया।

प्रमोद ने पहले तो पंकज को डांटा, लेकिन उसके मन में श-क का बीज बोया जा चुका था। उसने अपनी पत्नी और नौकर की हर हरकत पर नजर रखनी शुरू कर दी।

6. 15 फरवरी 2026: प्रति-शोध की काली रात

घटना वाले दिन, कल्पना ने राजीव के साथ शहर जाकर होटल में समय बिताने की योजना बनाई। प्रमोद को इसकी भनक लग गई। उसने अपने मित्र ‘गुरु’ से एक अ-वै-ध पि-स्तौ-ल हासिल की।

जब कल्पना शाम को शहर से लौटी, तो उसने प्रमोद को हाथ में पि-स्तौ-ल लिए इंतजार करते पाया। मो-त के डर से कल्पना ने अपना सारा गुनाह कुबूल कर लिया। उसने राजीव और पंकज दोनों के साथ अपने सं-बंधों की बात स्वीकार की। यह सुनकर प्रमोद का खून खौल उठा।

7. त्रि-प-ल म-र्ड-र: बिछ गई तीन ला-शें

प्रमोद ने सबसे पहले अपनी पत्नी कल्पना पर तीन गो-लि-यां दागीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौ-त हो गई। इसके बाद वह रुका नहीं। उसने राजीव को ढूंढा और उसे दो गो-लि-यां मारीं। अंत में, उसने पंकज मिस्त्री को भी मौ-त के घाट उतार दिया। एक ही रात में पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

8. पुलिस कार्रवाई और आत्म-समर्पण

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। प्रमोद सिंह ने भागने की कोशिश नहीं की। उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा कि उसने अपनी “मर्यादा” की रक्षा के लिए यह कदम उठाया। पुलिस ने तीनों श-वों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और प्रमोद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

निष्कर्ष: समाज के लिए एक सबक

यह घटना हमें रिश्तों के गिरते स्तर और संचार की कमी के भयावह परिणामों के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। क्या प्रतिशोध में तीन जानें लेना सही था? या क्या धो-खा देने वाली पत्नी को माफ किया जा सकता था? यह मामला अब न्यायालय के अधीन है, लेकिन टेरा खास गांव की गलियों में आज भी उस रात की चीखें सुनाई देती हैं।