पत्नी की एक गलती की वजह से पूरे परिवार के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/

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एक गलती, एक परिवार की तबाही

राजस्थान के जोधपुर जिले के बालेश्वर गाँव में महेंद्र सिंह अपने छोटे से परिवार के साथ रहता था। महेंद्र गाँव में गोलगप्पे बेचता था, उसकी पत्नी आस्था देवी और इकलौती बेटी करुणा थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन तीनों मिल-जुलकर जीवन काट रहे थे। महेंद्र मेहनती था, लेकिन उसकी दो बुरी आदतें थीं—शराब और जुआ। जितना भी कमाता, वह इन दोनों में उड़ा देता। आस्था देवी, उसकी पत्नी, शुरू से ही अपने चाल-चलन को लेकर गाँव में चर्चित थी। महेंद्र को इस बात का अंदेशा था, मगर गरीबी और मजबूरी के कारण वह कुछ कह नहीं पाता था।

करुणा, उनकी बेटी, पढ़ाई में ठीक थी। उसने तीन साल पहले 12वीं पास की थी और अब घर पर सिलाई-कढ़ाई सीख रही थी। महेंद्र का गुस्सा भी मशहूर था, छोटी-छोटी बातों पर वह पत्नी और बेटी पर चिल्ला पड़ता। एक रात, जब महेंद्र की शराब खत्म हो गई, उसने पत्नी से शराब लाने को कहा। आस्था ने मना किया, तो महेंद्र ने गैस सिलेंडर की गैस लीक कर दी, माचिस जलाने की धमकी दी। आस्था ने माचिस छीन ली, डर के कारण शराब का इंतजाम कर दिया। महेंद्र ने जमकर शराब पी और गहरी नींद में सो गया।

दिन बीतते गए, गरीबी बढ़ती गई। आस्था सोचने लगी कि बेटी जवान हो चुकी है, शादी के लिए पैसे कहाँ से आएंगे? महेंद्र तो शराब में डूबा रहता था। आस्था ने घर का एक कमरा किराए पर देने का विचार किया। गाँव में खबर फैला दी कि कोई किराएदार मिल जाए तो बता देना। कई दिन बाद, गाँव के स्कूल का चपड़ासी उत्तम सिंह, जो गाँव से दूर रहता था, कमरा ढूँढ़ते-ढूँढ़ते आस्था के घर पहुँच गया। आस्था ने कमरा दिखाया, उत्तम को पसंद आ गया। एडवांस किराया देकर वह रहने लगा।

धीरे-धीरे उत्तम और आस्था के बीच नजदीकियाँ बढ़ने लगीं। अकेलापन और पैसे की जरूरत ने आस्था को उत्तम के साथ गलत संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया। उत्तम भी खुश था, उसे प्रेम और सुख मिल रहा था। आस्था जब भी अकेली होती, उत्तम को बुला लेती, उससे पैसे लेती और साथ समय बिताती।

कुछ समय बाद उत्तम का दोस्त राहुल, जो अमीर घर का था, भी वहाँ रहने आ गया। आस्था ने महसूस किया कि राहुल के पास पैसे हैं, उसे भी अपने जाल में फंसा लिया जाए। राहुल और उत्तम दोनों अब आस्था के साथ संबंध बनाने लगे और पैसे देते रहे। करुणा, बेटी, इन सब से अनजान थी।

एक दिन, करुणा अपनी नानी के घर चली गई। घर में सिर्फ आस्था और दोनों लड़के थे। आस्था ने मौका देखकर दोनों को बुलाया, दरवाजा बंद किया, और तीनों के बीच गलत संबंध बने। करुणा जब वापस आई, तो दोनों लड़कों की नजर उस पर पड़ी। राहुल ने उत्तम से कहा, “अगर यह लड़की भी हमारे जाल में फँस जाए तो अच्छा होगा।” कुछ दिन बाद, करुणा अकेली थी, मां पड़ोस में थी। उत्तम ने करुणा से पैसे देने के बहाने संबंध बनाने की बात की। करुणा ने भी पैसों के लिए हामी भर दी। नींद की दवाइयाँ खरीदकर माता-पिता को खिला दीं, खुद बच गई। रात में दोनों लड़कों के पास गई और गलत संबंध बनाए।

अब जब भी मौका मिलता, करुणा दोनों लड़कों के पास जाती, पैसे लेती और संबंध बनाती। मां आस्था भी यही करती थी। परिवार की नैतिकता पूरी तरह टूट चुकी थी। एक दिन, करुणा को चक्कर आया, वह बेहोश हो गई। महेंद्र ने अस्पताल ले जाकर जांच करवाई, डॉक्टर ने बताया—”आपकी बेटी एक महीने की गर्भवती है।” महेंद्र के पैरों तले जमीन खिसक गई।

महेंद्र ने करुणा से पूछा, “यह कैसे हुआ?” करुणा ने सच बता दिया—”मां और मैं दोनों इन लड़कों के साथ गलत संबंध बना चुके हैं।” महेंद्र का गुस्सा सातवें आसमान पर था, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। रात को सब खाना खाकर सो गए। महेंद्र ने गैस सिलेंडर की गैस लीक कर दी, दोनों लड़कों के कमरे में जाकर चाकू से उनका गला रेत दिया। फिर रसोई में माचिस जलाकर सिलेंडर में आग लगा दी। धमाके में आस्था और करुणा दोनों जलकर मर गईं।

महेंद्र सीधे पुलिस स्टेशन गया, सरेंडर किया, पूरी घटना बताई। पुलिस ने घर जाकर चारों लाशें बरामद कीं। पोस्टमार्टम हुआ, महेंद्र के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। अदालत में मामला गया। गाँव में सनसनी फैल गई—”एक पत्नी की गलती, पूरे परिवार की तबाही।”

महेंद्र ने अदालत में कहा—”मेरी पत्नी और बेटी ने मुझे धोखा दिया, इसी वजह से मैंने सबको मौत के घाट उतार दिया।” अब फैसला अदालत के हाथ में था कि महेंद्र को क्या सजा मिलेगी।

यह कहानी हमें सिखाती है कि एक छोटी सी गलती, लालच, नैतिकता की कमी, और परिवार में संवाद की कमी किस तरह पूरे परिवार को बर्बाद कर सकती है। रिश्तों की मर्यादा, विश्वास और ईमानदारी सबसे जरूरी है।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो अपनी राय जरूर दें। क्या महेंद्र ने सही किया या गलत? ऐसे हादसों से सतर्क रहें, परिवार में संवाद बनाए रखें।