पत्नी की एक गलती की वजह से फौजी पति ने उठाया बड़ा कदम/अंजाम ठीक नहीं हुआ/

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पत्नी की एक गलती और फौजी पति का बड़ा कदम

यह कहानी एक ऐसे परिवार की है, जो प्यार, विश्वास और घातक ग़लतफहमी के बीच संघर्ष कर रहा था। एक गांव, एक परिवार और एक ऐसी गलती जिसने परिवार के रिश्तों को तोड़ा और एक आदमी को अपने हाथों से अपनी पत्नी की हत्या करने की सोच तक ले आया।

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक छोटे से गांव, बहादुरपुर, में मोहर सिंह नामक किसान अपनी ज़िंदगी बिता रहा था। मोहर सिंह की आठ एकड़ ज़मीन थी, जिस पर वह खेती करता था और पूरे परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी पत्नी की मौत पांच साल पहले हो चुकी थी, जिससे वह अकेला और उदास रहने लगा था। मोहर सिंह के दो बेटे थे: प्रताप और सुमेर। सुमेर अभी 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था, और प्रताप, जो फौज में भर्ती हो चुका था, देश की सेवा कर रहा था।

मोहर सिंह ने अपने बड़े बेटे प्रताप का रिश्ता गांव की एक लड़की, संजना, से तय कर दिया था। शादी की तारीख़ तय की गई थी, और जब प्रताप 20 दिनों की छुट्टी लेकर घर वापस आया, तो धूमधाम से उसकी शादी संजना से कर दी गई। दोनों ने खुशी-खुशी शादी के बाद अपनी ज़िंदगी शुरू की। लेकिन संजना को घर में अपने स्थान को स्थापित करने में समय लगने लगा। वह काफी समय तक अकेली महसूस करती थी, क्योंकि मोहर सिंह खेती करने के लिए बाहर जाता था, और सुमेर अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहता था।

एक दिन, जब संजना अकेली थी, उसने अपने देवर सुमेर को कुछ घर के कामों के लिए रोक लिया। इस बहाने वह सुमेर को अपने पास बुलाना चाहती थी। हालांकि, सुमेर ने अपनी भाभी की बात को मना किया और घर से बाहर चला गया। संजना का मन खराब हो गया था और उसने महसूस किया कि उसका देवर उसे आकर्षित करने के लिए तैयार नहीं है।

कुछ दिन बाद, संजना ने अपने पड़ोसी सुरेश, जो ट्रक ड्राइवर था, से बातचीत करना शुरू किया। सुरेश और संजना के बीच धीरे-धीरे घनिष्ठता बढ़ी, और दोनों के बीच अनैतिक रिश्ते शुरू हो गए। सुरेश और संजना के बीच का यह रिश्ता घर के अंदर छुपा हुआ था। संजना जब भी अकेली होती, वह सुरेश को बुलाकर गलत रास्ते पर चलने लगती थी।

यह सब सुमेर से छुपा नहीं रहा। उसने एक दिन अपनी भाभी संजना और सुरेश को एक कमरे में देखा, और अब उसे यकीन हो गया कि उसकी भाभी गलत रास्ते पर चल पड़ी है। उसने प्रताप से सारी बातें साझा की, और प्रताप को यकीन हो गया कि उसका भाई झूठ नहीं बोल सकता।

जब प्रताप को पता चला कि उसकी पत्नी संजना ने गलत रास्ता अपनाया है, तो वह गुस्से से भर गया। उसने सोचा कि उसे अपनी पत्नी को सबक सिखाना होगा। 22 अक्टूबर 2025 को, जब संजना अपने घर में अकेली थी, प्रताप ने उसके साथ एक घिनौनी सजा देने का फैसला लिया। उसने संजना को मौत के घाट उतारने का सोच लिया।

प्रताप ने अपनी पत्नी का गला दबा दिया और उसे मौत के घाट उतार दिया। जब सुबह सुमेर और मोहर सिंह ने दरवाजा तोड़ा, तो संजना की लाश पड़ी हुई थी। पुलिस ने प्रताप को गिरफ्तार किया और उसकी पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसने अपनी पत्नी को उसके गलत रास्ते के कारण मारा था।

यह घटना पूरे गांव में फैल गई, और सभी लोग चौंक गए कि एक पति अपनी पत्नी को मौत के घाट कैसे उतार सकता है। यह सवाल उठता है कि क्या प्रताप का कदम सही था या गलत? क्या परिवार में विश्वास और रिश्तों की इतनी अहमियत है कि किसी को अपनी पत्नी की हत्या करने का अधिकार मिल जाता है?

इस कहानी में हम यह सिख सकते हैं कि कोई भी ग़लत कदम उठाने से पहले हमें अपने रिश्तों पर विचार करना चाहिए। किसी भी रिश्ते में विश्वास, ईमानदारी और समझदारी की जरूरत होती है।